बिजली बिल का नया नियम ! ‘कितनी’ नहीं, ‘किस वक्त’ खर्च की बिजली इस पर तय होगा बिल ; जानें क्या है ToD टैरिफ

Electricity Bill
Electricity Bill : सावधान! अब बिजली का बिल इस बात पर तय होगा कि आपने ‘किस वक्त’ बिजली खर्च की. जानिए क्या है विद्युत मंत्रालय का ‘Time-of-Day’ (ToD) नियम और सोशल मीडिया पर उड़ती अफवाहों का सच.
Electricity Bill : गर्मियों का सीजन आते ही मिडिल क्लास परिवारों का सबसे बड़ा विलेन एक्टिव हो जाता है बिजली का बिल. अभी तक हमारा और आपका गणित बिल्कुल सीधा था कि भाई, जितनी यूनिट फुकेंगी, महीने के अंत में उतना ही बिल थमा दिया जाएगा. लेकिन बॉस, अब यह नियम बदलने जा रहा है.
अब बिजली का बिल सिर्फ इस बात पर तय नहीं होगा कि आपने ‘कितनी’ बिजली खर्च की, बल्कि इस बात पर तय होगा कि आपने ‘किस वक्त’ बिजली खर्च की. अगर आप भी ऑफिस से लौटकर शाम को वाशिंग मशीन में कपड़ों का ढेर डाल देते हैं, या पानी की मोटर चला देते हैं, तो सावधान हो जाइए.
देश भर के शहरों में जो ‘स्मार्ट मीटर’ लगाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, उसके पीछे विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) का एक बड़ा नियम छुपा है, जिसे ‘Time-of-Day’ (ToD) टैरिफ कहा जा रहा है.
क्या है ये ‘Time of Day’ (ToD) टैरिफ का पेंच ?
सरल शब्दों में कहें तो ToD टैरिफ का मतलब है “जैसा समय, वैसा दाम.” इसे आप ओला या उबर कैब के ‘सरचार्ज’ या ‘पीक प्राइसिंग’ की तरह समझ सकते हैं. जब पीक टाइम पर गाड़ियों की मांग बढ़ती है, तो कैब का किराया बढ़ जाता है. ठीक यही फॉर्मूला अब आपकी बिजली पर लागू हो रहा है. नए नियमों के तहत अब पूरे 24 घंटे बिजली की दरें एक जैसी नहीं रहेंगी. दिन के 24 घंटों को मुख्य रूप से तीन स्लॉट्स में बांट दिया गया है.

क्या रात को वाशिंग मशीन चलाने से बिल दोगुना होगा?
सोशल मीडिया पर यह अफवाह तेजी से फैल रही है कि रात को भारी उपकरण चलाने पर बिल दोगुना आएगा. यह पूरी तरह सच नहीं है गुरु. इस नियम का असली पेंच समझिए. सबसे महंगी बिजली देर रात को नहीं, बल्कि शाम के 4 बजे से रात के 10 बजे के बीच होने वाली है. रात के 10 बजे के बाद तो दरें वापस सामान्य (नॉर्मल) हो जाएंगी.
असली झटका तब लगेगा जब आप शाम को 6 या 7 बजे ऑफिस से लौटकर कपड़े धोने बैठेंगे. अगर आपने शाम के इन 6 घंटों (पीक ऑवर्स) में वाशिंग मशीन या पानी का हीटर चलाया, तो आपका बिल सामान्य से 20% तक उछल सकता है. दोगुना भले न हो, पर बजट बिगाड़ने के लिए 20% की बढ़ोतरी भी बहुत बड़ी.
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By अभिषेक पाण्डेय
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करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।
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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।
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