देश की पहली LNG ट्रेन: साबरमती से अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा
ट्रैक पर खड़ी LNG ट्रेन (Photo: ANI)
साबरमती को मिली 1542 करोड़ की सौगात. देश की पहली LNG ट्रेन और 'कवच' सुरक्षा प्रणाली से लैस होगा रेल नेटवर्क.
India’s First LNG Train: गुजरात के साबरमती में 27 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करीब 1,542 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे. इसमें देश की पहली LNG से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाना भी शामिल है, साथ ही सुरक्षा और यातायात से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट भी लॉन्च होंगे.
क्या-क्या मिलेगा साबरमती को?
इस कार्यक्रम में कई परियोजनाएं एक साथ शुरू होंगी:
- WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड का उद्घाटन
- साबरमती-कलोल-भांडू मोतीदाऊ और साबरमती-सानंद-जाखवाड़ा सेक्शन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम
- साबरमती-सरखेज रेल लाइन का दोहरीकरण
- अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-समाखियाली सेक्शन पर कवच सुरक्षा प्रणाली की आधारशिला
- WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव और भारत की पहली LNG ट्रेन को झंडी
कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, राज्यमंत्री दर्शनाबेन वाघेला, सांसद हसमुखभाई पटेल और दिनेशभाई मकवाना, अहमदाबाद के मेयर हितेशभाई बारोट समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे.
कवच सिस्टम से यात्रियों को क्या फायदा?
रेल हादसों को रोकने के लिए अहमदाबाद डिवीजन में करीब 404 किलोमीटर के रेल नेटवर्क पर स्टैंडर्ड कवच सिस्टम लगाया जाएगा. इस पर लगभग 411 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें अहमदाबाद-पालनपुर सेक्शन के 157 किलोमीटर और अहमदाबाद-समाखियाली सेक्शन के 247 किलोमीटर हिस्से शामिल हैं.
कवच एक स्वदेशी तकनीक है जो ट्रेनों की टक्कर रोकने, ओवरस्पीडिंग पर काबू पाने और इंसानी गलती से होने वाले हादसों को कम करने में मदद करती है. यानी सीधे तौर पर कहें तो इससे रेल सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा.
इसके अलावा साबरमती-कलोल-भांडू मोतीदाऊ और साबरमती-सानंद-जाखवाड़ा के बीच 122.57 किलोमीटर हिस्से में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम पर करीब 118.83 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहेगी और रूट की क्षमता भी बढ़ेगी.
LNG ट्रेन क्यों है खास?
साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में दो 1,400 HP डीजल पावर कार को डीजल-LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम में बदला गया है. इसमें करीब 40 फीसदी डीजल की जगह LNG इस्तेमाल होगा। इससे न सिर्फ ईंधन का खर्च घटेगा, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों में भी कमी आएगी. यानी रेलवे अब पर्यावरण के लिहाज से भी ज्यादा जिम्मेदार बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
मालगाड़ियों और यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
700 करोड़ रुपये की लागत से बना नया WAG-12 मेंटेनेंस शेड 300 हाई-हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को मेंटेन कर सकेगा. ये लोकोमोटिव करीब 12,000 HP क्षमता के हैं और भारी व लंबी मालगाड़ियों को ढोने के लिए बनाए गए हैं.
वहीं 313.27 करोड़ रुपये की साबरमती-सरखेज लाइन दोहरीकरण परियोजना 21 किलोमीटर के हिस्से को कवर करेगी और मार्च 2028 तक पूरी होने का लक्ष्य है. इसमें साबरमती, गांधीग्राम, वस्त्रापुर और सरखेज स्टेशनों के साथ पुल और अंडरपास का काम भी शामिल है. इससे सरखेज-धोलेरा क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और इलाके में औद्योगिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी.
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