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GST Council की बैठक बेनतीजा खत्म, राज्यों के मुआवजे को लेकर नहीं बन पाई आपसी सहमति

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
राज्यों को आरबीआई या बाजार से लेना ही होगा कर्ज.
राज्यों को आरबीआई या बाजार से लेना ही होगा कर्ज.
फोटो : पीटीआई.

GST Council 43rd meeting : वस्तु एवं सेवाकर परिषद (GST Council) की 43वीं बैठक में राज्यों के राजस्व नुकसान को लेकर दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर सोमवार को भी सहमति नहीं बन पाई. इस बैठक की अध्यक्षता कर रहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों से साफ कह दिया है कि जीएसटी राजस्व में कमी की भरपाई के लिए केंद्र सरकार बाजार से कर्ज नहीं उठा सकती. इसके साथ ही, जीएसटी परिषद की बैठक में सेस, सेस कलेक्शन और सेस कलेक्शन की समयसीमा बढ़ाने जैसे कई मामलों पर चर्चा हुई.

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि अगर केंद्र सरकार बाजार से कर्ज उठाती है, तो बाजार में कर्ज की लागत बढ़ सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सेस को 5 साल से ज्यादा वक्त के लिए टाल दिया गया है, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई है. जो राज्य कर्ज लेने का विकल्प चुनना चाहते हैं, वे इसका फायदा ले सकते हैं.

निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस साल 20,000 करोड़ रुपये का सेस जमा किया गया है, जिसे आज रात को ही राज्यों के लिए जारी कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद ने फैसला किया है कि जून 2022 के बाद मुआवजा सेस को आगे बढ़ाया जाएगा.

बता दें कि राज्यों के मुआवजे को लेकर इससे पहले 6 अक्टूबर को जीएसटी परिषद की बैठक हुई थी. उस बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वह राज्यों को फिलहाल मुआवजे की रकम नहीं दे सकती हैं1 बैठक के बाद केरल के वित्त मंत्री थॉमस इजाक ने कहा था कि 10 राज्यों की मांग है कि शर्तों के मुताबिक मौजूदा साल में केंद्र सरकार को पूरी रकम देनी चाहिए. इसके लिए केंद्र सरकार को कर्ज लेना चाहिए. अब इस मामले में फैसले को 12 अक्टूबर के लिए टाल दिया गया है.

हालांकि, इस बैठक में छोटे करदाताओं को राहत दी गई है. परिषद ने यह फैसला किया है कि छोटे करदाता अब हर महीने नहीं, बल्कि तिमाही आधार पर रिटर्न फाइल करेंगे. साथ ही, जनवरी 2021 से छोटे करदाताओं का रिटर्न 24 से घटाकर 8 कर दिया जाएगा.

राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा था कि अभी जीएसटी संग्रह में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी है. इनमें से 97,000 करोड़ रुपये जीएसटी का बकाया है, जबकि बाकी कोरोना वायरस की वजह से बकाया है. अगस्त में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में केंद्र सरकार ने नुकसान की भरपाई के लिए दो विकल्प सुझाए थे.

सरकार के दो विकल्पों के तहत राज्यों को विशेष एकल खिड़की मुहैया कराया जाएगा. इसमें पहले विकल्प के तहत वे भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई से कर्ज ले सकते हैं. इसमें कम ब्याज दर पर राज्यों को 97,000 करोड़ रुपए का कर्ज मिल सकता है. इस रकम को 2022 तक जमा सेस संग्रह से किया जा सकता है.

केंद्र सरकार की ओर से दिया गया दूसरा विकल्प यह था कि विशेष एकल खिड़की के तहत पूरे का पूरा 2.35 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा सकता है. इस मुद्दे पर भाजपा शासित 21 राज्य इसका समर्थन कर रहे हैं. उनके पास मध्य सितंबर तक विकल्प चुनकर 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का मौका था, लेकिन गैर भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि केंद्र सरकार कर्ज लेकर उन्हें जीएसटी के मुआवजे की भरपाई करे.

हालांकि, अभी तक आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने बाजार से कर्ज लेने का विकल्प चुन लिया है.

Posted By : Vishwat Sen

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