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ओपीडी:अव्यवस्था के आगे मरीज बेबस, अस्पताल प्रशासन नहीं है गंभीर

Updated at : 07 Dec 2015 6:56 PM (IST)
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ओपीडी:अव्यवस्था के आगे मरीज बेबस, अस्पताल प्रशासन नहीं है गंभीर

ओपीडी:अव्यवस्था के आगे मरीज बेबस, अस्पताल प्रशासन नहीं है गंभीर एक अनार, सौ बीमार ओपीडी लाइवप्रतिनिधि, पूणियापूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल होने का गौरव प्राप्त करने वाला यहां का सदर अस्पताल एक नहीं अनेकों बदइंतजामी का शिकार हो गया है. डॉक्टरों की ड्यूटी से गायब रहना, कर्मियों का समय से कार्यालय नहीं पहुंचना, साफ-सफाई […]

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ओपीडी:अव्यवस्था के आगे मरीज बेबस, अस्पताल प्रशासन नहीं है गंभीर एक अनार, सौ बीमार ओपीडी लाइवप्रतिनिधि, पूणियापूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल होने का गौरव प्राप्त करने वाला यहां का सदर अस्पताल एक नहीं अनेकों बदइंतजामी का शिकार हो गया है. डॉक्टरों की ड्यूटी से गायब रहना, कर्मियों का समय से कार्यालय नहीं पहुंचना, साफ-सफाई में कोताही बरतना आदि समस्याएं यहां की पहचान बन चुकी है. जिले के दूर दराज इलाके से पहुंचने वाले मरीज अस्पताल में फैले अव्यवस्था के आगे खुद को बेबस व लाचार मान रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन इस बद इंतजामी पर कभी भी सीरियस नहीं हुआ. प्रभात खबर ने ओपीडी से लेकर अस्पताल उपाधीक्षक के कार्यालय की पड़ताल की.एक अनार, सौ बीमारसप्ताह का पहला दिन सोमवार.समय सुबह के 10:23 बज रहे थे. सदर अस्पताल का ओपीडी बाहर से भीतर मरीजों से खचाखच भरा था. मेडिसिन विभाग के आगे लगभग तीन सौ से अधिक मरीज बाहर एवं भीतर से कतार में खड़े आगे बढ़ने की होड़ में लगे थे.प्रतिदिन इस विभाग में रोस्टर के अनुसार दो डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए थी.किंतु सिर्फ एक ही डॉक्टर ओपीडी की कमान संभाले हुए थे.जो बड़े ही मंथर गति से मरीजों को देख रहे थे.ऐसे में मरीजों का शोर मचाना भी लाजिमी था.आंख व इएनटी से डॉक्टर थे नदारदसुबह के 10:29 बजे हम खड़े थे आंख एवं इएनटी विभाग के आगे.वहां भी मरीजों की लंबी कतार लगी थी.आंख के डॉक्टर तो मरीजों को देख रहे थे.किंतु इनएनटी के डॉक्टर नदारद थे. केनगर से संजिदा खातून नामक एक मरीज के परिजन ने बताया कि उसकी छह वर्षीया बच्ची कान के दर्द से पीड़ित है. उसके कान से मवाद भी निकल रहा है. वह बेचैन था कि इएनटी डॉक्टर आ जाते तो बच्ची को दिखा कर दवा लेते. किंतु अंत तक डॉक्टर नहीं पहुंचे.अस्पताल उपाधीक्षक भी थी गायबसमय 10:32 मिनट पर जब हम इस बाबत बात करने अस्पताल उपाधीक्षक के कार्यालय वेश्म में पहुंचे तो वहां अस्पताल उपाधीक्षक भी मौजूद नहीं थी, किंतु उससे मिलने की प्रतीक्षा में दो आगंतुक बैठे मिले. पूछने पर एक महाशय खुद को स्वास्थ्य विभाग का ऑफिसर बताया और कहा कि मैडम जी अस्पताल भ्रमण में गयी हैं.उस समय भी अस्पताल उपाधीक्षक का अकाउंट सेक्शन बंद पड़े थे. उसमें भी एक भी कर्मी नहीं आये थे.सामान्य शाखा खुले थे,कर्मी नदारदअस्पताल उपाधीक्षक के कार्यालय के सामान्य शाखा के कपाट तो खुले थे. किंतु एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के अलावा कोई कर्मी सुबह के 10:40 तक नहीं पहुंचे थे.सामान्य शाखा में विकलांगता प्रमाण पत्र संबंधी जानकारी लेने पहुंचे एक शख्स ने बताया -ंबाबू यहां सभ्भे काम आपनो मनमरजी चलैय छै. कोय रोक-टोक करैय वाला नैय छै. कुछ विभागीय लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पूर्व के अस्पताल उपाधीक्षक के समय से ही इन कार्यालयों का काम काज इसी प्रकार चलता है.एचआइवी विभाग में संक्रमित कचरेदिन के 11:02 हो चुके थे.किंतु एचआइवी जांच विभाग की साफ-सफाई नहीं हो पायी थी.जगह -जगह संक्रमित सूई,कॉटन आदि बिखरे पड़े थे.मरीजों की भीड़ भी जांच के लिए लग चुकी थी.उस संक्रमित सूई एवं कॉटन पर लोग चल रहे थे.लोग भिन्ना कर संक्रमण फैलने के भय से काफी संभल कर चल रहे थे. एचआइवी जांच के एक कर्मी ने बताया कि यह रोज का धंधा है.दस बार खबर देने के बाद यहां सफाई कर्मी सफाई हेतु पहुंचते हैं.कहते हैं अधिकारीडॉक्टरों का अभाव चल रहा है.हम कार्यालय में मौजूद थे.यदि मुलाकात नहीं हो पायी होगी तो लेवर रूम में मीटिंग चल रही थी.फिर भी मामले को अपने स्तर से देख लुंगी.डॉ सुशीला दास,अस्पताल उपाधीक्षक,सदर अस्पताल,पूर्णियाफोटो 02 से 08परिचय 02-मेडिसिन विभाग के आगे लगी मरीजों की भीड़.परिचय 03-मेडिसिन विभाग से एक डॉक्टर नदारद.परिचय 04-बच्चा विभाग से एक डॉक्टर गायब.परिचय 05-कार्यालय वेश्म में उपाधीक्षक की खाली पड़ी कुरसी.परिचय 06-बंद पड़ा उपाधीक्षक का अकाउंट सेक्शन.परिचय 07-उपाधीक्षक के सामान्य शाखा में नहीं पहुंचे थे कर्मी.परिचय 08-एचआइवी जांच विभाग में पसरा हुआ संक्रमित कचरा.

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