अमेरिका ने भारतीय IT कंपनियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर क्यों लगाई रोक? 10 सवाल-जवाब में समझें पूरी बात
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो एक्स
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. अमेरिकी सरकार ने विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया से जुड़े PERM कार्यक्रम के तहत IT कंपनियों पर कार्रवाई की है. इनमें Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini शामिल हैं. इसके अलावा Microsoft और Adobe को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है.
अमेरिकी श्रम विभाग के सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने आरोप लगाया है कि इन कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए. हालांकि, कार्रवाई से जुड़े सभी आरोपों, प्रभावित आवेदनों की संख्या और निलंबन की अवधि की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
इस कार्रवाई का असर उन भारतीय कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो इन कंपनियों के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहते हैं. आइए, सवाल-जवाब में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड और PERM कार्यक्रम क्या हैं.
अमेरिका में भारतीय IT कंपनियों पर कार्रवाई से जुड़े 10 सवाल-जवाब
अमेरिकी श्रम विभाग के सचिव कीथ सॉन्डरलिंग के मुताबिक, Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया गया है. इसके अलावा Microsoft और Adobe के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. PERM कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती हैं. ऐसे में इस कार्यक्रम से निलंबन का असर संबंधित कंपनियों के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनकी स्थायी निवास की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है या आगे बढ़ने के लिए PERM प्रमाणन की जरूरत है.
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए ऐसे तरीकों का सहारा लिया, जिनसे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर कम हुए. प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों और नियमों के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई है. श्रम विभाग के सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा कि सरकार अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देना चाहती है. उनके मुताबिक, विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ने से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि 2009 से प्रभावित कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास का अनुरोध किया. साथ ही, इन कंपनियों को 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा मंजूर हुए और एक लाख से ज्यादा लेबर सर्टिफिकेशन मिले. ये आंकड़े अमेरिकी अधिकारी के दावे हैं. इन्हें इन कंपनियों के खिलाफ साबित हुए धोखाधड़ी के मामलों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए.
PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है. यह अमेरिकी श्रम विभाग की एक प्रक्रिया है, जिसके तहत कोई अमेरिकी नियोक्ता विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी पर रखने के लिए लेबर सर्टिफिकेशन हासिल करता है. आमतौर पर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में यह एक महत्वपूर्ण चरण होता है. इसके लिए नियोक्ता को संबंधित पद का निर्धारित वेतन हासिल करना, भर्ती से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करना और यह दिखाना होता है कि विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. लेबर सर्टिफिकेशन मिलने के बाद नियोक्ता ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है. हालांकि, PERM मंजूर होने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी को ग्रीन कार्ड मिलना तय हो गया है.
H-1B अमेरिका का एक अस्थायी, गैर-आप्रवासी वर्क वीजा है. इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल और विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों को नौकरी दे सकती हैं. IT, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कई भारतीय इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं. इस वीजा पर कर्मचारी अमेरिका में निर्धारित नियमों और अवधि के अनुसार काम कर सकता है. सामान्य तौर पर H-1B वीजा की अधिकतम अवधि छह साल होती है. हालांकि, कुछ परिस्थितियों में इसके आगे भी विस्तार मिल सकता है. H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड में मुख्य अंतर यह है कि H-1B अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है, जबकि ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी निवास का दर्जा देता है.
ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला दस्तावेज है. इसका आधिकारिक नाम Permanent Resident Card है. ग्रीन कार्ड मिलने के बाद व्यक्ति अमेरिकी कानूनों के तहत स्थायी निवासी के रूप में रह सकता है और काम कर सकता है. हालांकि, इसके साथ कुछ कानूनी शर्तें और जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं. ग्रीन कार्ड अपने आप अमेरिकी नागरिकता नहीं देता, लेकिन पात्रता और अन्य शर्तें पूरी होने पर आगे नागरिकता के लिए आवेदन करने का रास्ता खुल सकता है. भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें अमेरिका में लंबे समय तक रहने और काम करने की स्थिरता मिल सकती है. इसके लिए कई कर्मचारी अपने नियोक्ता के माध्यम से आवेदन करते हैं.
H-1B वीजा: अमेरिकी कंपनी में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है. PERM: रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की कई श्रेणियों में नियोक्ता के लिए जरूरी लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया है. ग्रीन कार्ड: अमेरिका में स्थायी निवासी का दर्जा देता है. आमतौर पर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में पहले नियोक्ता PERM लेबर सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन करता है. इसके बाद, जहां जरूरी हो, नियोक्ता I-140 इमिग्रेंट याचिका दाखिल करता है. आगे की प्रक्रिया में वीजा नंबर की उपलब्धता और अन्य शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकता है. हर ग्रीन कार्ड श्रेणी में PERM जरूरी नहीं होता. इसलिए किसी कर्मचारी की स्थिति उसकी आवेदन श्रेणी और व्यक्तिगत मामले पर निर्भर करती है.
इसका सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनके लिए संबंधित कंपनियों को अभी PERM आवेदन दाखिल करना है. निलंबन जारी रहने के दौरान प्रभावित कंपनियां नए आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी, जिससे ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू होने में देरी हो सकती है. PERM आवेदन दाखिल होने की तारीख आमतौर पर रोजगार आधारित इमिग्रेशन प्रक्रिया में कर्मचारी की प्राथमिकता तारीख यानी Priority Date तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसी तारीख के आधार पर आगे वीजा नंबर उपलब्ध होने पर प्रक्रिया की बारी आती है. यदि आवेदन दाखिल करने में देरी होती है, तो कर्मचारी की प्रक्रिया आगे बढ़ने में भी परेशानी हो सकती है. हालांकि, वास्तविक असर संबंधित कर्मचारी के मामले, उसकी आवेदन श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करेगा.
सभी कर्मचारियों पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा. जिन कर्मचारियों के लिए अभी PERM आवेदन दाखिल नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया शुरू करने में देरी का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी ओर, जिन कर्मचारियों का PERM प्रमाणन पहले ही मंजूर हो चुका है या जिनकी प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है, उनकी स्थिति अलग हो सकती है. केवल कंपनी के निलंबन की खबर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी पुराने आवेदन रद्द हो जाएंगे. ऐसे कर्मचारियों पर असर इस बात से तय होगा कि उनका आवेदन किस चरण में है और अमेरिकी अधिकारियों के आदेश में पुराने आवेदनों को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं.
PERM कार्यक्रम से निलंबन का अर्थ अपने आप H-1B वीजा रद्द होना नहीं है. दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. हालांकि, कुछ कर्मचारियों के लिए इनका आपस में संबंध हो सकता है. सामान्य तौर पर H-1B वीजा की अवधि छह साल तक होती है. कुछ शर्तों के तहत कर्मचारी इस अवधि से आगे भी वीजा विस्तार हासिल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, पात्र मामलों में रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ी समय-सीमा पूरी होने पर छह साल से आगे विस्तार मिल सकता है. यदि किसी कर्मचारी की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया PERM आवेदन दाखिल न होने के कारण शुरू नहीं हो पाती, तो छह साल की सीमा के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है. हालांकि, हर कर्मचारी की पात्रता अलग होती है और सभी मामलों में वीजा विस्तार का रास्ता बंद नहीं होता.
अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की मांग बहुत अधिक है. वहीं, हर साल उपलब्ध ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित होती है. इसके अलावा, किसी एक देश के नागरिकों के लिए भी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर सीमा लागू होती है. भारतीय आवेदकों की संख्या अधिक होने के कारण कई श्रेणियों में उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है. अमेरिकी विदेश विभाग के सितंबर 2026 वीजा बुलेटिन के मुताबिक, भारत के लिए रोजगार आधारित दूसरी प्राथमिकता यानी EB-2 श्रेणी में अंतिम कार्रवाई के लिए वीजा उपलब्ध नहीं था. वहीं, EB-3 श्रेणी की अंतिम कार्रवाई की तारीख 1 जनवरी 2014 थी. ऐसे में PERM आवेदन दाखिल करने में होने वाली अतिरिक्त देरी कुछ कर्मचारियों के लिए चिंता बढ़ा सकती है. हालांकि, वास्तविक प्रतीक्षा अवधि और पात्रता संबंधित श्रेणी तथा उस समय लागू वीजा बुलेटिन पर निर्भर करेगी.
अमेरिका की इस कार्रवाई से भारतीय IT कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. खासकर वे कर्मचारी चिंता में पड़ सकते हैं, जिनके PERM आवेदन अभी दाखिल नहीं हुए हैं और जो लंबे समय से अमेरिका में स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि, यह कार्रवाई सभी भारतीय IT कर्मचारियों के H-1B वीजा या ग्रीन कार्ड को स्वतः रद्द नहीं करती. प्रभावित कर्मचारियों को अपनी आवेदन स्थिति, कंपनी पर लागू आदेश और अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार स्थिति समझनी होगी.
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