72 घंटे, 3 देश, प्राइवेट जेट और एक 'एस्केप प्लान': जब चुनाव हारते ही शुरू हुआ 'Mission Impossible'!
चुनाव हारते ही ट्रंप की मदद से अमेरिका पहुंचे बोल्सोनारो, कैसे हुआ पूरा 'एस्केप प्लान'? (AI Generated)
चुनाव में हार के बाद, विपक्ष का यह नेता अपने परिवार के साथ अमेरिका कैसे पहुंचे? यह पूरी घटना किसी फिल्मी पटकथा की तरह सामने आई. अर्जेंटीना, इक्वाडोर और मियामी से होकर तय किए गए उनके सफर की पूरी कहानी जानिए.
एक्शन, सस्पेंस, इंटरनेशनल साजिश और ऐसा एस्केप प्लान, जिसमें हर अगला मोड़ कहानी को और रहस्यमय बना दे! शाहरुख खान की आगामी फिल्म King के किसी थ्रिलर सीक्वेंस की कल्पना कीजिए... पीछे खतरा, सामने अनजान रास्ते और मंजिल तक पहुंचने के लिए वक्त से दौड़. लेकिन सोचिए, अगर ऐसा ही कोई घटनाक्रम बड़े पर्दे पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर घट रहा हो तो?
राष्ट्रपति चुनाव की हार, जांच का बढ़ता दबाव और फिर महज 72 घंटे के भीतर तीन देशों से गुजरकर अमेरिका के मियामी पहुंचने की कहानी. इस सफर में सीमाएं पार हुईं, निजी विमान ने उड़ान भरी और वॉशिंगटन की भूमिका को लेकर नए सवाल उठने लगे. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है.
आखिर यह महज एक राजनीतिक नेता का देश छोड़ना था या इसके पीछे कूटनीति, सत्ता और रणनीति की कोई बड़ी कहानी छिपी है? फ्लावियो बोल्सोनारो के इस रहस्यमय सफर के तार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कैसे जुड़ते हैं? और क्या इसका असर ब्राजील की राजनीति से आगे, दोनों देशों के रिश्तों पर भी पड़ सकता है?
चुनाव में हार के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम
25 अक्टूबर को ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हरा दिया. आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, लूला को 51.79% और फ्लावियो को 48.21% वोट मिले. दोनों के बीच करीब 44.3 लाख वोटों का अंतर रहा. हार के बाद फ्लावियो ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए, हालांकि धांधली के अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने ठोस सबूत पेश नहीं किए.
इसके बाद घटनाक्रम ने तेजी से करवट ली. फ्लावियो के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच चल रही थी. रिपोर्टों के मुताबिक, पासपोर्ट जमा कराने से संबंधित आदेश के बीच उन्होंने परिवार के साथ देश छोड़ दिया. फ्लावियो ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है.
72 घंटे का सफर: ब्राजील से मियामी तक कैसे पहुंचे फ्लावियो?
पहला पड़ाव: अर्जेंटीना
27 अक्टूबर की रात फ्लावियो अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ सड़क मार्ग से ब्राजील की सीमा पार कर अर्जेंटीना पहुंचे. रिपोर्टों के अनुसार, वे फोज दो इगुआसू और प्यूर्टो इगुआसू को जोड़ने वाले फ्रैटरनिटी ब्रिज से गुजरे.
दूसरा पड़ाव: इक्वाडोर
अर्जेंटीना पहुंचने के करीब 40 मिनट बाद परिवार निजी विमान से रवाना हुआ. विमान ने ईंधन भरने के लिए इक्वाडोर के ग्वायाकिल में ठहराव किया.
तीसरा पड़ाव: अमेरिका
28 अक्टूबर की सुबह विमान मियामी पहुंचा. यहां फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में अस्थायी मानवीय प्रवेश अनुमति मिली, जिसके तहत उनके एक साल तक रहने का प्रावधान बताया गया.
यात्रा का विवरण रॉयटर्स और ब्राजील के मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है.
ट्रंप की मदद से अमेरिका में मिली एंट्री?
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू अमेरिकी प्रशासन की भूमिका है.
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश देने की मंजूरी दी थी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी परिवार को वीजा दिए जाने की बात कही थी.
हालांकि, यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा. अमेरिका पहुंचने पर फ्लावियो को जो ह्यूमैनिटेरियन पैरोल यानी मानवीय आधार पर अस्थायी प्रवेश की अनुमति मिली, वह सामान्य वीजा या स्थायी निवास का दर्जा नहीं है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुमति के तहत उनके परिवार को एक साल तक रहने की इजाजत मिली. भविष्य में ग्रीन कार्ड मिलने की संभावना को लेकर भी चर्चा हुई है, लेकिन इसे स्थायी निवास की गारंटी नहीं माना जा सकता.

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप और लूला के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद रहे हैं. ऐसे में ब्राजील के चुनाव में हारे हुए उम्मीदवार को अमेरिका में प्रवेश देने का फैसला दोनों देशों के संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है.
क्या है फ्लावियो के खिलाफ जांच का मामला?
फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ वित्तीय लेनदेन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच की खबरें सामने आई हैं. इनमें उनके पिता, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए धन जुटाने का मामला भी शामिल बताया गया है.
रिपोर्टों के अनुसार, फ्लावियो ने फिल्म के लिए पूर्व बैंकर डैनियल वोरकारो से करीब 1.2 करोड़ डॉलर जुटाने की कोशिश की थी. इसके अलावा, एक ऐसे वकील से कथित संबंधों की भी जांच का जिक्र है, जिस पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए एक अरब डॉलर से अधिक की रकम की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.
ध्यान रहे: ये जांच और आरोप हैं, दोषसिद्धि नहीं. फ्लावियो ने अपने खिलाफ लगे आरोपों में किसी भी गलत काम से इनकार किया है.
अमेरिका पहुंचकर खुद को बताया ब्राजील का 'असली नेता'
मियामी पहुंचने के बाद फ्लावियो ने चुनावी नतीजों को चुनौती दी और राजनीतिक उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने ट्रंप और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति के प्रति आभार भी जताया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने शुरुआत में खुद को ब्राजील का वैध राष्ट्रपति बताने वाला बयान दिया, जिसे बाद में संशोधित कर 'नेता' शब्द का इस्तेमाल किया.
दूसरी तरफ, लूला की जीत आधिकारिक है और ब्राजील के चुनावी प्राधिकरण ने नतीजों की पुष्टि की है. चुनाव में धांधली के फ्लावियो के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है.
अब आगे क्या होगा?
फ्लावियो का अमेरिका पहुंचना केवल एक राजनीतिक नेता के देश छोड़ने की घटना नहीं है. यह तीन बड़े सवाल खड़े करता है-
- क्या चुनावी हार के बाद विदेश से विपक्ष की राजनीति प्रभावी रह सकती है?
- क्या ट्रंप का फैसला ब्राजील-अमेरिका संबंधों में नई दरार पैदा करेगा?
- और क्या ब्राजील में चल रही जांच आगे बढ़ने पर फ्लावियो की स्थिति बदल सकती है?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं. फिलहाल, 72 घंटे में तीन देशों से गुजरकर मियामी पहुंचने की यह यात्रा लैटिन अमेरिकी राजनीति और वॉशिंगटन की कूटनीति के बीच एक नई बहस बन गई है.
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