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इमरान के इरादे पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, कहा - चुनाव की खातिर 90 दिनों के लिए पाकिस्तान को किया गया असहाय

Updated at : 07 Apr 2022 1:21 PM (IST)
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इमरान के इरादे पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, कहा - चुनाव की खातिर 90 दिनों के लिए पाकिस्तान को किया गया असहाय

गौरतलब है कि नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम खान सूरी ने अविश्वास प्रस्ताव के सरकार को गिराने की तथाकथित विदेशी साजिश से जुड़े होने का हवाला देते हुए रविवार को उसे खारिज कर दिया था.

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इस्लामाबाद/नई दिल्ली : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने इमरान खान द्वारा लगाए गए ‘विदेशी साजिश’ वाले आरोप पर सरकार से सबूत के तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक का ब्योरा मांगे हैं. इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और नेशनल असेंबली भंग किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान के मामले में पिछले सोमवार से सुनवाई जारी है. इस मामले पर सर्वोच्च अदालत में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी.

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी न देने और नेशनल असेंबली भंग किए जाने को लेकर तीखी टिप्पणी की है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संसद को भंग करके चुनाव के लिए 90 दिनों का वक्त दिया गया है. इससे देश एक तरह से 90 दिनों (तीन महीने) के लिए असहाय जैसा हो गया है. जस्टिस मजहर आलम ने राष्ट्रपति के प्रतिनिधि अली जाफर से कहा कि क्या कोर्ट संविधान का संरक्षक नहीं है? यदि कोई संसदीय प्रक्रिया से प्रभावित होता है तो फिर न्याय कैसे होगा? यदि अन्याय होगा तो क्या अदालत चुप रहेगी.’

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बुधवार को कथित ‘विदेशी साजिश’ के बारे में और जानकारी के लिए सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के मिनट्स (ब्योरा) मांगे हैं. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष द्वारा विवादास्पद फैसले के जरिये खारिज करने को लेकर गुरुवार को भी अहम सुनवाई होगी.

उपाध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को किया था खारिज

गौरतलब है कि नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम खान सूरी ने अविश्वास प्रस्ताव के सरकार को गिराने की तथाकथित विदेशी साजिश से जुड़े होने का हवाला देते हुए रविवार को उसे खारिज कर दिया था. इसके कुछ मिनट बाद राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने प्रधानमंत्री खान की सलाह पर नेशनल असेंबली को भंग कर दिया था. सर्वोच्च अदालत ने कुछ ही घंटों में इस घटनाक्रम पर स्वत: संज्ञान लिया और पांच सदस्यीय पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई शुरू कर दी. पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल कर रहे हैं और इसमें न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन, न्यायमूर्ति मोहम्मद अली मजहर, न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर और न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखाइल शामिल हैं.

अदालत ने मांगा विदेशी साजिश ब्योरा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के तीसरे दिन बुधवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की तरफ से बाबर अवान पेश हुए, जबकि राष्ट्रपति अल्वी का प्रतिनिधित्व अली जफर ने किया. मुख्य न्यायाधीश बंदियाल ने अवान से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक के ‘मिनट्स’ के बारे में सवाल किए, जिसमें कथित तौर पर पीटीआई के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने के लिए एक कथित ‘विदेशी साजिश’ के सबूत दिखाने वाले एक पत्र पर चर्चा की गई थी.

डिप्टी स्पीकर के फैसले आधार क्या है : चीफ जस्टिस

पाकिस्तान में अंग्रेजी के प्रमुख अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बंदियाल ने पूछा कि किस आधार पर डिप्टी स्पीकर ने फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि क्या स्पीकर तथ्यों को पेश किए बिना इस तरह के फैसले की घोषणा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक बिंदु था, जिस पर अदालत को फैसला करना था.

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जस्टिस बंदियाल ने पूछे कई सवाल

न्यायमूर्ति बंदियाल ने अवान से अदालत को सूचित करने के लिए भी कहा कि क्या अध्यक्ष अनुच्छेद 95 को दरकिनार कर एक निर्णय जारी कर सकते हैं, जो दिन के एजेंडे में नहीं था. उन्होंने पीटीआई के वकील को ‘ठोस’ सबूतों के साथ फैसले का बचाव करने के लिए कहा. उन्होंने अवान से पूछा कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के मिनट्स कहां हैं? उन्होंने कहा कि हम देखना चाहते हैं कि क्या साजिश थी, जिसका इस्तेमाल प्रस्ताव को खारिज करने के लिए किया गया था.

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