सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल... क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है?

Updated:
विज्ञापन

Strait of Hormuz Crisis: ईरान, इराक, सऊदी अरब और इजरायल में क्यों बढ़ रहा तनाव? (AI Generated)

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

होर्मुज में बाधित जहाजरानी, इराक के कुर्द शिविर पर ड्रोन हमले, सऊदी अरब पर हूती हमले और सीरिया की नई रणनीतिक साझेदारी. जानिए कैसे मध्य पूर्व के अलग-अलग मोर्चे एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं.

विज्ञापन

मध्य पूर्व का मौजूदा संकट अब केवल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव नहीं रह गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित जहाजरानी, इराक के कुर्द इलाकों में ड्रोन हमले, सऊदी अरब पर हूती हमले और सीरिया की बदलती क्षेत्रीय भूमिका- ये सभी घटनाएं एक ऐसे क्षेत्रीय संकट की तस्वीर पेश करती हैं, जिसमें एक मोर्चे पर लिया गया फैसला दूसरे मोर्चे की रणनीति बदल सकता है.

विज्ञापन

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी गंभीर चुनौती बन गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के बड़े हिस्से का परिवहन होता है. यहां जहाजों की आवाजाही में गिरावट का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता; इसका प्रभाव ऊर्जा कीमतों, बीमा लागत और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर भी पड़ता है.

Read more: मस्क की नाराजगी, अंबानी पर तंज और राहुल गांधी की एंट्री: भारत के लिए क्या दांव पर है?

होर्मुज: खुला या बंद, असल स्थिति क्या है?

होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला या पूरी तरह बंद बताना मौजूदा स्थिति को सरल बनाकर पेश करना होगा. जहाजों की आवाजाही जारी रही है, लेकिन हमलों, सुरक्षा जोखिमों और बदलते मार्गों के कारण यातायात में भारी गिरावट आई है.

पश्चिम एशिया और होर्मुज (AI Generated)
पश्चिम एशिया और होर्मुज (AI Generated)
रॉयटर्स ने 8 अक्टूबर की रिपोर्ट में डेटा विश्लेषण कंपनी Kpler के हवाले से बताया कि मंगलवार को केवल सात कमोडिटी जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया. उसी रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल का परिवहन युद्धकालीन साप्ताहिक उच्च स्तर से घटकर लगभग 1.01 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गया था, जो युद्ध से पहले के स्तर का करीब 74 प्रतिशत था.

12 अक्टूबर को रॉयटर्स ने बताया कि ईरान अमेरिका की उस प्रतिक्रिया की समीक्षा कर रहा है जो उसने होर्मुज को फिर से खोलने के प्रस्ताव के जवाब में भेजी थी. दोनों पक्षों के बीच मतभेदों में यह सवाल भी शामिल है कि बातचीत की शुरुआत समुद्री सुरक्षा से हो या ईरान के परमाणु कार्यक्रम से. कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल हैं.

इसलिए संकट को केवल 'होर्मुज बंद है' या 'होर्मुज खुला है' कहकर नहीं समझा जा सकता. असली समस्या यह है कि क्या जहाज सुरक्षित, नियमित और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तरीके से इस मार्ग से गुजर सकते हैं.

इराक: कुर्द विपक्षी शिविर पर फिर ड्रोन हमला

12 अक्टूबर को इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के कोया जिले में ईरानी कुर्द विपक्षी संगठन Kurdistan Democratic Party of Iran (KDPI) के आजादी शिविर पर दो ड्रोन हमले हुए. स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में संपत्ति को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के हताहत होने की तत्काल खबर नहीं थी.

यह सितंबर की किसी पुरानी घटना की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि 12 अक्टूबर को हुआ नया हमला था. हालांकि, हमले के पीछे किसका हाथ था, इसकी सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई. KDPI से जुड़े एक अधिकारी ने ईरान पर आरोप लगाया, लेकिन आरोप और स्वतंत्र रूप से स्थापित जिम्मेदारी में अंतर रखना जरूरी है.

इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में ईरानी कुर्द विपक्षी समूह लंबे समय से शिविर चलाते रहे हैं. तेहरान इन समूहों को अपनी पश्चिमी सीमा के लिए सुरक्षा खतरा मानता है. दूसरी ओर, इन समूहों का कहना है कि वे इराकी क्षेत्र को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करने के इच्छुक नहीं हैं.

हमले के बाद धू-धूकर जला हेलीपैड. फोटो- एक्स.
हमले के बाद धू-धूकर जला हेलीपैड. फोटो- एक्स.

इसका रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है क्योंकि इराक में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था बदल रही है. यदि स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती है, तो कुर्द शिविरों और अन्य समूहों की सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है.

लेकिन एक जरूरी बात: 12 अक्टूबर के हमले को ईरान की कार्रवाई बताने के लिए अभी पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण नहीं हैं. इसे क्षेत्रीय तनाव के बीच हुआ हमला कहना अधिक सटीक है.

इराकी शिया गुट: समर्थन की घोषणा और युद्ध में उतरने के बीच अंतर

इराक में ईरान से जुड़े सशस्त्र गुट भी अपनी रणनीति तय कर रहे हैं. 12 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, Kataib Hezbollah ने यमन के हूतियों की सऊदी अरब के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया. समूह ने सऊदी नेतृत्व के सामने राजनीतिक मांगें भी रखीं. यह बयान संगठन का अपना रुख है; इसे इराक की पूरी जनता या सरकार की नीति नहीं माना जा सकता.

बगदाद के सामने कठिन संतुलन है. एक तरफ इराक को अपनी संप्रभुता और आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा करनी है; दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर उसके सुरक्षा और आर्थिक संबंधों पर पड़ता है.

रॉयटर्स ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि वॉशिंगटन ने ईरान समर्थक सशस्त्र गुटों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर इराकी नेतृत्व पर आर्थिक दबाव की संभावना जताई थी. इराक की तेल आय और डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी भूमिका इस दबाव को महत्वपूर्ण बनाती है.

सीरिया और सऊदी अरब: तेल व्यापार से सैन्य सहयोग तक?

सीरिया अब इस क्षेत्रीय समीकरण का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है. 6 अक्टूबर को सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की. इसके बाद सीरिया और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी गतिविधियां सामने आईं.

सीरियाई सरकारी समाचार एजेंसी SANA के अनुसार, 11 अक्टूबर को सीरिया के केंद्रीय बैंक ने 14 साल में पहली बार एक प्रमुख अमेरिकी बैंक के जरिए तेल आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया. यह व्यवस्था सऊदी अरामको के साथ तेल उत्पादों की आपूर्ति के समझौते से जुड़ी थी. SANA ने यह भी बताया कि 15 ईंधन टैंकर सीरियाई बंदरगाहों में प्रवेश और माल उतारने की प्रतीक्षा कर रहे थे.

यह आर्थिक सहयोग का ठोस संकेत है. लेकिन सैन्य सहयोग का सवाल अभी अनिश्चित है.

7 अक्टूबर को रॉयटर्स ने अमेरिकी और सीरियाई सैन्य अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया कि सीरिया सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने पर विचार कर रहा है. विकल्पों में रक्षात्मक सहायता और सऊदी समर्थित यमनी बलों की मदद के लिए सैनिक भेजने की संभावना भी शामिल बताई गई. हालांकि, सीरियाई राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार ने इस दावे का खंडन किया कि सऊदी अरब ने सैनिक भेजने का अनुरोध किया था. किसी सीरियाई सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं हुई है.

सऊदी अरब पर हूती हमले और अमेरिकी सुरक्षा की सीमाएं

सऊदी अरब पर हूती हमलों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में रॉयटर्स के अनुसार कम-से-कम 12 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए. इससे पहले भी सऊदी हवाई अड्डों और अन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें आई थीं.

रियाद में अरामको सुविधा पर हूतियों ने किया हमले का दावा- प्रतीकात्मक तस्वीर
रियाद में अरामको सुविधा पर हूतियों ने किया हमले का दावा- प्रतीकात्मक तस्वीर

यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी अरब लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए भारी सैन्य निवेश करता रहा है. आधुनिक हथियार, हवाई रक्षा प्रणालियां और अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध उसके सुरक्षा ढांचे के प्रमुख हिस्से हैं. लेकिन हालिया हमले यह दिखाते हैं कि महंगे हथियार भी हर हमले को रोकने की गारंटी नहीं दे सकते.

इससे अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था की उपयोगिता पर बहस बढ़ सकती है. हालांकि, किसी एक हमले के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं कि अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पूरी तरह विफल हो गई है. ज्यादा सटीक सवाल यह है कि बदलते ड्रोन और मिसाइल खतरे के सामने मौजूदा रक्षा प्रणालियां कितनी प्रभावी हैं और क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा रणनीति में कितना बदलाव करेंगे.

इजरायल में हाई अलर्ट: चार मोर्चों पर एक साथ नजर

11 अक्टूबर को इजरायली समाचार चैनल N12 ने रिपोर्ट किया कि देश की सुरक्षा व्यवस्था गाजा, लेबनान, सीरिया और ईरान से जुड़े मोर्चों पर बढ़ते तनाव को लेकर हाई अलर्ट पर है. रिपोर्ट में सऊदी अरब पर हूती हमलों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संबंधी बयानों को भी चिंता के कारणों में शामिल किया गया. इजरायली अधिकारियों को आशंका थी कि किसी पक्ष की गलत गणना अनियोजित क्षेत्रीय वृद्धि का कारण बन सकती है.

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (File Photo)
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (File Photo)

यह रिपोर्ट 12 अक्टूबर को किसी नए इजरायली हमले के आदेश का प्रमाण नहीं है. बल्कि यह बताती है कि इजरायल एक मोर्चे पर होने वाली घटना को दूसरे मोर्चों पर उसके संभावित असर के साथ देख रहा है.

यही इस क्षेत्रीय संकट की मुख्य विशेषता है. ईरान के आसपास इराक में कुर्द शिविरों पर हमले, यमन में हूती कार्रवाई, सऊदी अरब की प्रतिक्रिया और सीरिया की बदलती साझेदारियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं, भले ही इनके पीछे कोई एक साझा कमान या एक साथ चलाया जा रहा अभियान साबित न हुआ हो.

आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, लेकिन व्यापार पूरी तरह रुका नहीं

ईरान की अर्थव्यवस्था पर समुद्री प्रतिबंधों और युद्ध का असर पड़ रहा है. ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, एक ईरानी व्यापार अधिकारी ने बताया कि चालू फारसी वर्ष की पहली छमाही में देश के विदेशी व्यापार का वजन लगभग 34 प्रतिशत घट गया. उसी रिपोर्ट में वैकल्पिक मार्गों और निजी क्षेत्र की मदद से व्यापार जारी रहने की बात भी कही गई.

यह आंकड़ा ईरानी अधिकारी का दावा है, हर मालवाहक जहाज या व्यापारिक लेन-देन का स्वतंत्र ऑडिट नहीं. फिर भी यह एक महत्वपूर्ण अंतर दिखाता है: आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, जबकि व्यापार पूरी तरह ठप नहीं होता. वैकल्पिक मार्गों से सामान पहुंच सकता है, लेकिन लागत, समय और जोखिम बढ़ सकते हैं.

इसलिए होर्मुज का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि मार्ग बंद घोषित हुआ है या नहीं. असली प्रश्न यह है कि ऊर्जा और व्यापारिक माल कितनी नियमितता से, किस लागत पर और कितने जोखिम के साथ गुजर पा रहे हैं.

क्या मध्य पूर्व अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था से आगे बढ़ रहा है?

मध्य पूर्व के कई देश लंबे समय से अमेरिकी हथियारों, सैन्य सहयोग और सुरक्षा संबंधों पर निर्भर रहे हैं. लेकिन मौजूदा संकट एक कठिन सवाल उठा रहा है: क्या बाहरी सुरक्षा साझेदारियां स्थानीय देशों को पर्याप्त सुरक्षा दे पा रही हैं, या वे उन्हें बड़े क्षेत्रीय टकराव के जोखिम के सामने भी ला सकती हैं?

Iran-America Tension: Warning of Retaliatory Action — Iran, USA, Tension, Geopolitics, Middle East
Iran-America Tension: Warning of Retaliatory Action — Iran, USA, Tension, Geopolitics, Middle East
अमेरिकी सैन्य उपस्थिति किसी देश को रक्षा सहयोग और रणनीतिक समर्थन दे सकती है. साथ ही, संघर्ष के दौरान किसी सैन्य अड्डे या अमेरिकी साझेदारी की मौजूदगी उस देश को विरोधी पक्ष के निशाने पर भी ला सकती है. इसका अर्थ यह नहीं कि अमेरिकी गठबंधन अपने-आप असफल हैं, बल्कि यह कि सुरक्षा संबंधों की कीमत और जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन जरूरी है.

इराक, सीरिया, सऊदी अरब और इजरायल की हालिया स्थितियां अलग-अलग हैं. उन्हें एक ही रणनीति के हिस्से के रूप में देखना अतिसरलीकरण होगा. लेकिन इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि क्षेत्रीय सरकारों को अपनी सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, राजनीतिक स्वतंत्रता और सैन्य साझेदारियों के बीच संतुलन बनाना होगा.

निष्कर्षतः, मध्य पूर्व का संकट अब किसी एक देश या एक युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है. होर्मुज में समुद्री जोखिम, इराक में ड्रोन हमले, सऊदी अरब पर हूती हमले और सीरिया के बदलते संबंध मिलकर एक अस्थिर क्षेत्रीय वातावरण बना रहे हैं.

इन घटनाओं का आपस में जुड़ाव किसी एक केंद्रीय योजना का प्रमाण नहीं, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि एक मोर्चे पर लिया गया फैसला दूसरे मोर्चे पर उपलब्ध विकल्पों को तेजी से बदल सकता है.

Read more: कब्जे से कनेक्टिविटी तक: वैश्विक राजनीति में चोकपॉइंट्स क्यों बन रहे हैं नई ताकत?

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola