आतंकवाद का एकमात्र विकल्प संवादः पाकिस्तान

Updated at :25 Aug 2013 2:54 PM
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आतंकवाद का एकमात्र विकल्प संवादः पाकिस्तान

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने कहा है कि आतंकवाद की समस्या का मुकाबला करने का एकमात्र विकल्प बातचीत है और देश की सेना भी इस मुद्दे पर सरकार से सहमत है.गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान ने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए दिए गए प्रस्ताव को लेकर कोई शर्त नहीं रखी गई है. […]

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने कहा है कि आतंकवाद की समस्या का मुकाबला करने का एकमात्र विकल्प बातचीत है और देश की सेना भी इस मुद्दे पर सरकार से सहमत है.गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान ने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए दिए गए प्रस्ताव को लेकर कोई शर्त नहीं रखी गई है.

उन्होंने कहा कि देश में आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने के लिए बातचीत के विकल्प का सेना पूरी तरह से समर्थन करती है. निसार ने कहा कि बातचीत के सफल नहीं होने की स्थिति में वह किसी दूसरे विकल्प को लेकर अभी बात नहीं करना चाहते हैं.उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता बातचीत है और हम फिलहाल किसी और चीज के बारे में बात नहीं करना चाहते.’’

पाकिस्तानी गृह मंत्री ने समाचार पत्र ‘द न्यूज’ से कहा कि पीएमएल-एन ने अमेरिका में 2001 में हुए आतंकी हमले के बाद मुशर्रफ शासन की ओर से अपनाई नीतियों का विरोध किया था.उन्होंने कहा, ‘‘संसद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर दिए गए मेरे भाषणों को देखिए. मैं हमेशा ताकत के इस्तेमाल की बजाय बातचीत करने के पक्ष में रहा हूं.’’

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की ओर से दिए गए बातचीत के प्रस्ताव का पूरी तरह से समर्थन करते हुए निसार अली खान ने कहा कि मीडिया में यह गलत रिपोर्ट दी गई कि कैबिनेट की रक्षा समिति ने शर्त रखी है कि आतंकवादियों के हथियार डालने की स्थिति में ही सरकार उनसे बातचीत करेगी.

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से बेबुनियाद है. कैबिनेट की रक्षा समिति ने इसको लेकर कभी चर्चा ही नहीं की.’’ बातचीत के लेकर सरकार और सेना के बीच मतभेद को लेकर पूछे गए सवाल पर निसार ने कहा कि सरकार और सेना के बीच आज के दौर में सबसे अच्छे रिश्ते हैं और बातचीत को लेकर दोनों सहमत हैं. पाकिस्तानी गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवादी हिंसा में पाकिस्तान के 40,000 नागरिक, सैनिक, पुलिसकर्मी और दूसरे लोग मारे गए, लेकिन उन लोगों ने भी अपने निदरेष बच्चों को खोया है जो यहां आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं. बाद में समाचार चैनल जियो न्यूज के अनुसार तालिबान के साथ बातचीत नाकाम रही क्योंकि शासन करने वाले कभी इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर नहीं रहे.

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