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भारत का अपना रुपे कार्ड

Updated at : 23 Sep 2014 3:44 AM (IST)
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भारत का अपना रुपे कार्ड

।। सतीश सिंह ।। (लेखक एक प्रमुख बैंक में अधिकारी हैं) डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बारे में आप जानते होंगे और शायद उनका इस्तेमाल भी कर रहे होंगे. भारतीय बैंक अब अपने देश में तैयार ‘रुपे कार्ड’ जारी कर रहे हैं, जिसमें कई खासियतें हैं. क्या है रुपे कार्ड, क्या है इसका स्वरूप, प्रचलित […]

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।। सतीश सिंह ।।

(लेखक एक प्रमुख बैंक में अधिकारी हैं)

डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बारे में आप जानते होंगे और शायद उनका इस्तेमाल भी कर रहे होंगे. भारतीय बैंक अब अपने देश में तैयार ‘रुपे कार्ड’ जारी कर रहे हैं, जिसमें कई खासियतें हैं. क्या है रुपे कार्ड, क्या है इसका स्वरूप, प्रचलित क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से कैसे है यह अलग, जोखिम से निपटने के इसमें क्या किये गये हैं उपाय और इस कार्ड का बाजार पर क्या होगा संभावित असर, बता रहा है आज का नॉलेज..

रुपे कार्ड के बाजार में आने के साथ भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपना खुद का भुगतान गेटवे है. इसमें शामिल खूबियों की वजह से रुपे कार्ड को वीसा और मास्टर कार्ड का देशी, किंतु परिवर्धित संस्करण बताया जा रहा है.

जानकारों को उम्मीद है कि रुपे कार्ड से प्रचलित वीसा और मास्टर कार्ड को जबरदस्त चुनौती मिलेगी, क्योंकि तकनीक से लेकर दूसरे कई मामलों, मसलन- नकद भुगतान पर निर्भरता में कमी, अर्थ प्रबंधन, इस्तेमाल की आसान प्रक्रिया, सस्ती प्रोसेसिंग फी आदि में यह बेहतर है.

रुपे कार्ड की मदद से ग्रामीण क्षेत्र के सहकारी एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के ग्राहक ऑनलाइन, एटीएम और बिक्री केंद्रों से खरीदारी कर सकेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार इ-कॉमर्स की संकल्पना को सही मायने में सच करने की दिशा में भी यह सहायक हो सकता है. उल्लेखनीय है कि रुपे कार्ड की संकल्पना को साकार करने की दिशा में सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की अहम भूमिका रही है. सरकार चाहती है कि इस कार्ड की मदद से सामाजिक सरोकारों को साकार किया जाये. जन-धन योजना को अमलीजामा पहनाने में इस कार्ड की महती भूमिका होगी, क्योंकि सरकार ने जन-धन योजना के तहत खोले गये खाताधारकों को 5,000 रुपये के ओवरड्राफ्ट की सुविधा रुपे कार्ड के जरिये देने का फैसला किया है.

क्या है रुपे कार्ड

रुपे कार्ड क्रेडिट और डेबिट कार्ड के रूप में उपलब्ध है, जिसके माध्यम से भुगतान किया जा सकता है. इसका नाम (रुपे) दो शब्दों रुपया और पेमेंट (भुगतान) से मिल कर बना है. रुपे शब्द से भारतीयता का बोध होता है. इसका हरा और नारंगी रंग दर्शाता है कि हमारा देश सतत प्रगतिशील है और नीला रंग शांति का द्योतक है. इसका बोल्ड और यूनिक टाइपफेस इसकी मजबूती और स्थायित्व को दर्शाता है.

इस देशी कार्ड से एटीएम से धनराशि निकालने, दुकानों से खरीदारी और पेट्रोल पंपों से तेल लेने, इ-कॉमर्स का फायदा उठाने आदि कार्यो में मदद मिलेगी. इस प्रणाली को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) ने विकसित किया है.

रुपे कार्ड का स्वरूप

रुपे कार्ड का स्वरूप बाजार में पहले से उपलब्ध वीसा और मास्टर कार्ड की तरह है. यह डेबिट और क्रेडिट कार्ड के रूप में बाजार में उपलब्ध है. डेबिट कार्ड के तहत ग्राहक खुद की जमा रकम का इस्तेमाल करते हैं और क्रेडिट कार्ड के तहत बैंक ग्राहक की आर्थिक हैसियत को देखते हुए एक सीमा तक ऋण स्वीकृत करता है. ग्राहक उक्त ऋण सीमा तक खरीदारी कर सकता है, जिसे एक निश्चित समय-सीमा के अंदर उसे चुकाना होता है.

किसी भी बैंक से रुपे कार्ड प्राप्त करने की सरल प्रक्रिया, व्यापक स्वीकार्यता, कम वार्षिक शुल्क, बेहतर सुरक्षा मानक, सरल भुगतान प्रक्रिया आदि जैसी अनेक सुविधाएं मौजूद होना बाजार में उपलब्ध दूसरे कार्डो से इसे अलग और बेहतर बनाता है.

इंटर-ऑपरेबिलिटी की सुविधा

रुपे कार्ड विभिन्न भुगतान चैनलों और उत्पादों के बीच इंटर-ऑपरेबिलिटी की सुविधा उपलब्ध कराता है. इसका अर्थ यह हुआ कि रुपे कार्ड एटीएम, बिक्री केंद्र, प्वाइंट ऑफ सेल आदि जगहों पर स्वीकार्य होगा.

इसकी मौजूदा स्थिति यह है कि भारतीय स्टेट बैंक, आइसीआइसीआइ, पंजाब नेशनल बैंक आदि कई बड़े बैंक रुपे के समाशोधन निपटान में शामिल हो चुके हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अब तक 25,331 रुपे कार्ड एटीएम लगा दिये हैं और चालू वित्त वर्ष के दौरान 9,000 और एटीएम लगाने की उनकी योजना है. रुपे कार्ड देश के 1.6 लाख से अधिक एटीएम, 95 प्रतिशत बिक्री केंद्रों और मौजूदा सभी इ-वाणिज्य पोर्टल, जो फिलहाल लगभग 10,000 हैं, पर स्वीकार्य होगा.

उल्लेखनीय है कि राष्ट्र को समर्पित किये जाने से पहले से ही बैंक रुपे कार्ड जारी कर रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक, अप्रैल, 2014 तक दो करोड़ रुपे कार्ड जारी किये जा चुके थे, जिसमें किसान रुपे कार्ड की संख्या सबसे अधिक है. सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रुपे एवं रुपे एटीएम कार्ड दोनों जारी कर रहे हैं. रुपे कार्ड को जारी करने का काम मार्च, 2012 में ही शुरू हुआ था, लेकिन अपने आरंभिक चरण में यह कार्य जोर नहीं पकड़ सका था. बाद में इस प्रक्रिया में तेजी आयी. फिलहाल 20 वाणिज्यिक बैंक, 32 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, 75 को-ऑपरेटिव बैंक इस काम को कर रहे हैं.

वाणिज्यिक बैंक करीब 20 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड, मास्टर और वीसा कार्ड के नेटवर्क में जारी कर चुके हैं. आगे आने वाले दिनों में सभी 26 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, नौ निजी क्षेत्र के बैंक और 203 सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रुपे कार्ड जारी करेंगे.

इसके अलावा प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत ओवरड्राफ्ट की सुविधा से युक्त 7.5 करोड़ रुपे कार्ड जारी किया जायेगा. ग्राहकों को लुभाने के लिए इस प्रणाली के अंतर्गत होने वाले लेन-देन की प्रोसेसिंग घरेलू स्तर पर होगी. इस लिहाज से उम्मीद की जा रही है कि इसके द्वारा किये जाने वाले भुगतान की लागत कम होगी. विदेशों में इस सुविधा का उपभोग करने वाले ग्राहकों के मामले में बैंक विदेशी मुद्रा के बदले भारतीय मुद्रा में शुल्क अदा करेंगे, जो मौजूदा शुल्क से 40 प्रतिशत कम होगा.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक रुपे को डेबिट और क्रेडिट कार्ड के अलावा किसान कार्ड के रूप में भी जारी कर रहे हैं, जिससे इसका फलक बढ़ रहा है. भारत की 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है. ग्राहकों को लुभाने के लिए सक्रिय रुपे कार्ड धारक को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और स्थायी निशक्तता के मामले में एक लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण दिये जाने की भी योजना है, जो फिलहाल दूसरे अंतरराष्ट्रीय कार्डो जैसे, मास्टर और वीसा कार्ड में उपलब्ध नहीं है.

अन्य कार्डो से बेहतर

माना जा रहा है कि रुपे कार्ड के आने से देश में लेन-देन का दायरा बढ़ेगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कार्ड की लागत से कम कीमत पर उपलब्ध होगा. साथ ही, इसकी स्वीकार्यता भी दूसरे कार्डो से ज्यादा होगी. इस्तेमाल में लाने के लिए इसमें हिंदी और अंगरेजी दोनों भाषाओं में दिशानिर्देश की सुविधा है. इसे इस्तेमाल में लाने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है, जिसे एक आम आदमी आसानी से समझ सकता है. भारतीय रेलवे की सहयोगी संस्था आइआरसीटीसी जल्द ही प्री पेड रुपे कार्ड का एक वेरियंट जारी करने वाला है. इसके बाद से इस कार्ड से रेलवे टिकट भी बुक कराये जा सकेंगे.

फायदे की प्रणाली

वीजा और मास्टर कार्ड की तरह अब ग्राहकों के भुगतान संबंधी सत्यापन का काम रुपे कार्ड के जरिये किया जा सकेगा. विभिन्न बैंकों के अलावा अन्य वाणिज्यिक एवं वित्तीय संस्थान इस तंत्र से कार्ड वेरियंट प्रस्तुत करके ग्राहकों को भुगतान संबंधी सुविधाएं मुहैया करा पायेंगे. इस प्रणाली के तहत ट्रांजेक्शन घरेलू स्तर पर प्रोसेस किये जायेंगे, जिससे क्लियरिंग और सेटलमेंट की लागत कम होगी. साथ ही, बैंकों को विदेशी मुद्रा की जगह घरेलू मुद्रा में भुगतान करने का फायदा मिलेगा.

जोखिम से निपटने के उपाय

जोखिम के दृष्टिकोण से रुपे कार्ड को मास्टर और वीसा कार्ड से ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है. मास्टर और वीसा कार्ड में जोखिम को पिन नंबर से कम किया जाता है, जबकि रुपे कार्ड में यह सुरक्षा एटीएम और इ-कॉमर्स नेटवर्क में सुरक्षित कोड डालकर मुहैया करायी जाती है, क्योंकि इसकी भुगतान प्रणाली को पिन और चिप आधारित बनाया गया है.

दूसरे सुरक्षा के उपायों के तहत, दोहरे सत्यापन की प्रक्रिया, ओटीपी, इमेज आधारित सत्यापन, एंटी फिशिंग उपाय, सरलता के साथ दूसरे प्रणालियों के साथ अनुकूलता, फास्ट ट्रांजेक्शन, इ-कॉमर्स की सुविधा का उपयोग करने के लिए रुपे सिक्योर में निबंधन कराने की अनिवार्यता आदि उपायों का सहारा लिया गया है, जो इसे दूसरे अंतरराष्ट्रीय कार्डो से सुरक्षित व बेहतर बनाता है.

रुपे कार्ड का बाजार पर संभावित असर

रुपे कार्ड की लॉन्चिंग को वीसा और मास्टर कार्ड के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. इस कार्ड को भारतीय बाजार के दृष्टिकोण से बाजार में उतारा गया है. इसके लिए बाजार की आबोहवा का बाकायदा विेषण किया गया है. यह जानने का प्रयास किया गया कि भविष्य में यक कार्ड कितना उपयोगी साबित हो सकता है. ग्रामीण बाजार पर कब्जा करने के लिए रुपे किसान कार्ड जारी करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इस आधार पर माना जा रहा है कि ग्रामीण इलाकों में रुपे कार्ड का उपयोग ज्यादा किया जायेगा.

इस कार्ड की सर्वसुलभता और ग्राहकों के लिए इसमें अन्य गुणों के समाहित होने की वजह से इसकी लोकप्रियता में इजाफा होना लाजमी है. रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एच आर खान का मानना है कि साल 2020 तक रुपे कार्ड हर भारतीय के हाथ में होगा. उम्मीद है कि रुपे कार्ड के फायदों को ध्यान में रखते हुए लोग निश्चित रूप से खुदरा खरीदारी के लिए प्रेरित होंगे. इ-कॉमर्स की सुविधा का उपयोग करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में लोग घर बैठे मनचाहा उत्पाद खरीद सकेंगे, जिससे बिचौलिये की भूमिका कम होगी और उन्हें सस्ती दरों पर सामान मुहैया हो पायेगा. इ-कॉमर्स, एटीएम और बिक्री केंद्रों पर लोगों का विश्वास निरंतर बढ़ रहा है.

इसलिए कहा जा सकता है कि आनेवाले दिनों में रुपे कार्ड की सहायता से खुदरा बाजार और सर्विस सेक्टर का टर्नओवर बढ़ेगा, जिससे औद्योगिक क्षेत्र की मंदी को दूर करने में मदद मिलने के अलावा विकास को भी गति मिलेगी. उधर, सरकारें इसकी मदद से अपने सामाजिक एजेंडों को भी पूरा कर सकेगी.

विदेशी बाजार पर नजर

रुपे कार्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित करने की योजना है. इसके लिए अमेरिका के डिस्कवर फाइनेंशियल सर्विसेज और जापान के जेडीसी के साथ समझौते की प्रक्रिया प्रगति पर है. शुरुआती दौर में विदेशों में भी रुपे कार्ड एटीएम, बिक्री केंद्रों और ऑनलाइन बिक्री केंद्र चैनलों पर काम करेगा. बाद में इसके द्वारा उपलब्ध करवायी जा रही सुविधाओं में विस्तार किया जायेगा. जानकारों के मुताबिक, अपनी गुणवत्ता की वजह से यह विदेशों में भी जल्द ही लोकप्रिय हो जायेगा.

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी रोचक जानकारियां

क्या है डेबिट कार्ड

डेबिट कार्ड को प्लास्टिक कार्ड भी कहा जाता है. यह कार्ड ग्राहक को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बैंकिंग कार्य अवधि के बाद भी उसके खाते में लेन-देन करने की सुविधा मुहैया कराता है. इसकी मदद से ग्राहक अपने बैंक खाते में पहले से मौजूद रकम को एटीएम के माध्यम से कभी भी और कहीं भी निकाल सकता है. साथ ही, प्वॉइंट ऑफ सेल और इ-कामर्स या ऑनलाइन बिक्री केंद्रों से खरीदारी भी कर सकता है. डेबिट कार्ड को भी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड वीसा और मास्टर कार्ड के नेटवर्क से जोड़ा गया है, ताकि इसका नेटवर्क बड़ा और व्यापक हो सके.

कैसे हुई शुरुआत

डेबिट कार्ड का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. कान्सास सिटी फेडरल रिजर्व के मुताबिक, इसकी शुरुआत 1966 में हुई थी. जैसे-जैसे सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र विकसित होता गया, डेबिट कार्ड का पूरी दुनिया में विस्तार होता गया. भारत में डेबिट कार्ड का पदार्पण 1998 में हुआ था, लेकिन अपनी उपयोगिता की वजह से यह बहुत जल्द लोगों के दिलों पर राज करने लगा. आज लोग इसके इस्तेमाल के इस कदर आदी हो गये हैं कि वे इसके बिना जीने की कल्पना नहीं सकते.

क्रेडिट कार्ड का इतिहास

क्रेडिट कार्ड का जिक्र सबसे पहले एडवर्ड बेलमी ने 1887 में अपने उपन्यास ‘लूकिंग बैकवर्ड’ में किया था, लेकिन इस शब्द का प्रयोग ‘उधार’ की जगह ‘सिटिजन डिविडेंड’ के संदर्भ किया गया था. सही मायनों में क्रेडिट कार्ड का आविष्कार जॉन बिगिन्स ने 1946 में किया. बिगिन्स नेशनल बैंक ऑफ ब्रूकलिन, न्यूयॉर्क में कार्यरत थे. आधुनिक क्रेडिट कार्ड का जन्म 1958 में हुआ.

इस संदर्भ में सबसे पहले बैंक ऑफ अमेरिका ने 1958 में अपना क्रेडिट कार्ड ‘बैंक अमेरिका कार्ड’ के नाम से कैलिफोर्निया के बाजार में उतारा, जो बाद में वीसा प्रणाली में तब्दील हो गया. 1966 में मास्टर कार्ड का जन्म हुआ, जिसे सिटी बैंक के एवरीथिंग कार्ड के विलय से मजबूती मिली. भारत में क्रेडिट कार्ड अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है. इस वजह से भारत में क्रेडिट कार्ड की संकल्पना ने देर से आकार लिया. मोटे तौर पर देखा जाये तो भारत में क्रेडिट कार्ड का विकास 2004 से 2008 के बीच हुआ.

कैसे होता है क्रेडिट कार्ड का संचालन

बैंक, ग्राहक को क्रेडिट कार्ड उसकी ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन करके जारी करता है. क्रेडिट कार्ड में ऋण सीमा निर्धारित की जाती है और कार्ड को यूनिक पहचान देने के लिए कार्ड नंबर तथा उसकी वैधता को उसमें डाला जाता है. कोई भी ग्राहक स्वीकृत ऋण सीमा से ज्यादा रकम की खरीदारी या सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

साथ ही, उसे खर्च या उपयोग की गयी रकम को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर बैंक को वापस लौटाना होता है, जो अमूमन कार्ड के प्रकार के अनुसार (वीसा या मास्टर) 50 से 90 दिन होता है. गौरतलब है कि इस संबंध में बैंकों के नियम-कायदे अलग-अलग हो सकते हैं. इस दृष्टिकोण से देखा जाये तो क्रेडिट कार्ड का स्वरूप चार्ज एवं कैश कार्ड से अलग होता है. चार्ज कार्ड के तहत उपयोग की रकम या डेबिट राशि का भुगतान महीने के अंत में करना होता है और कैश कार्ड का उपयोग करेंसी की तरह किया जाता है, जबकि क्रेडिट कार्ड में चक्रीय ऋण सीमा होती है.

अर्थात कार्ड यूजर ऋण सीमा का उपयोग कार्ड की वैधता अवधि तक ही कर सकता है, लेकिन इस संदर्भ में उसे उपयोग की गयी रकम को समय-सीमा के भीतर चुकाते रहना होता है. उल्लेखनीय है कि क्रेडिट कार्ड की भुगतान प्रणाली में तीसरे पक्ष की मौजूदगी होती है, जो विक्रेता को खरीदे गये वस्तु या सेवा का भुगतान करता है, जिसे खरीदारी के 50 से 90 दिनों के भीतर, कार्ड के प्रकार के अनुसार क्रेता द्वारा तीसरे पक्ष को चुकाना होता है. इसमें चूक करने यानी समय पर भुगतान न करने की दशा में क्रेता को विलंब शुल्क और ब्याज का भुगतान तीसरे पक्ष को करना होता है.

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