स्मार्टफोन शिपमेंट में 14 साल की सबसे बड़ी गिरावट, जानिए मोबाइल महंगे होने की वजह

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चिप की कमी, महंगे फोन

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स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं! चिप की कमी और कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने से बजट फोन पर असर. जानिए पूरी जानकारी.

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दुनियाभर में स्मार्टफोन बाजार पर महंगे कंपोनेंट्स और मेमोरी चिप की कमी का असर दिखने लगा है. काउंटरपॉइंट रिसर्च की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 20% की गिरावट दर्ज की गई. यह 2012 के बाद किसी तीसरी तिमाही का सबसे निचला स्तर है. इस गिरावट के पीछे मेमोरी चिप की कमी और स्मार्टफोन बनाने की बढ़ती लागत को बड़ी वजह माना जा रहा है.

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आखिर क्यों महंगे हो रहे हैं स्मार्टफोन?

स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली डीआरएएम (DRAM) और नैंड (NAND) मेमोरी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. इन कंपोनेंट्स का इस्तेमाल फोन की रैम, स्टोरेज और दूसरे जरूरी कामों में होता है. इनकी लागत बढ़ने से कंपनियों के लिए स्मार्टफोन बनाना महंगा हो गया है.

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 में अब तक दुनियाभर में स्मार्टफोन की खुदरा कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है. बढ़ती लागत का असर कम करने के लिए कंपनियां फोन की कीमतें बढ़ा रही हैं. इसका सबसे ज्यादा दबाव बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है.

सैमसंग और ऐपल की बाजार में मजबूत पकड़

शिपमेंट में गिरावट के बावजूद प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में सैमसंग 23% बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि ऐपल की हिस्सेदारी बढ़कर 22% हो गई. वहीं, शाओमी के शिपमेंट में सालाना आधार पर 30% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ओप्पो और वीवो के शिपमेंट में भी 20% से अधिक की कमी आई.

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अब कम कीमत वाले फोन की संख्या घटाने और ज्यादा मुनाफा देने वाले मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. इससे बाजार में प्रीमियम और बजट स्मार्टफोन के बीच अंतर बढ़ सकता है.

आम ग्राहकों पर क्या होगा असर?

बाजारों में बजट स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह स्थिति अहम है. अगर मेमोरी चिप की कमी और कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें जारी रहती हैं, तो कंपनियां नए फोन महंगे कर सकती हैं या कम कीमत में मिलने वाले मॉडल के फीचर्स में बदलाव कर सकती हैं.

ऐसे में नया फोन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से फैसला लेना चाहिए. केवल नए मॉडल के इंतजार में मौजूदा फोन बदलना जरूरी नहीं है, खासकर तब जब पुराना फोन ठीक से काम कर रहा हो.

काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, 2026 के बाकी महीनों में भी स्मार्टफोन बाजार पर दबाव बने रहने की आशंका है. बाजार में सुधार काफी हद तक मेमोरी चिप की कीमतों और सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगा. हालांकि, भारत में स्मार्टफोन की कीमतें कितनी बढ़ेंगी और स्थानीय बाजार में शिपमेंट कितना घटेगा, इसका अलग से आकलन जरूरी है .

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