अभी भी डिजिटल राशन कार्ड से वंचित हैं चाय श्रमिक

Updated at :15 Feb 2017 7:50 AM
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अभी भी डिजिटल राशन कार्ड से वंचित हैं चाय श्रमिक

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी के आसपास के कई चाय बागानों के श्रमिकों को अब तक डिजिटल राशन कार्ड नहीं मिला है, जिसकी वजह से इन चाय बागानों के श्रमिकों को अंत्योदय तथा अन्नपूर्णा जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. चाय बागानों में श्रमिकों की स्थिति ऐसी ही काफी खराब है, ऊपर से डिजिटल राशन कार्ड […]

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी के आसपास के कई चाय बागानों के श्रमिकों को अब तक डिजिटल राशन कार्ड नहीं मिला है, जिसकी वजह से इन चाय बागानों के श्रमिकों को अंत्योदय तथा अन्नपूर्णा जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. चाय बागानों में श्रमिकों की स्थिति ऐसी ही काफी खराब है, ऊपर से डिजिटल राशन कार्ड नहीं रहने की वजह से काफी श्रमिक राशन पाने की सुविधा से वंचित हैं.

यह आरोप माकपा जिला सचिव मंडली के सदस्य गौतम घोष ने लगाया है. चाय बागानों के श्रमिकों सहित सभी लोगों को डिजिटल राशन कार्ड देने सहित 10 सूत्री मांगों को लेकर हातीघीसा माकपा जोनल कमेटी की ओर से मंगलवार को सिलीगुड़ी स्थित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के फूड कंट्रोलर को एक ज्ञापन दिया गया. इस मौके पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए श्री घोष ने कहा कि चाय बागानों में राशन के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है.


चाय बागान मालिक श्रमिकों की मजदूरी से राशन के पैसे तो काट लेते हैं लेकिन उन्हें राशन नहीं मिलता. इसके अलावा डिजिटल राशन कार्ड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं. किसी का नाम कुछ है तो राशन कार्ड में कोई और नाम दर्ज हो गया है. पते आदि भी गलत लिखे गये हैं. ऐसे तमाम गड़बड़ी वाले राशन कार्ड को दुरुस्त करने की मांग खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से की गई है. इतना नहीं, राशन लेने में भी कार्डधारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि एक ही राशन डीलर के यहां भारी संख्या में कार्डधारियों का बोझ है. जिन राशन डीलर के यहां ज्यादा कार्डधारी हैं, वहां से कुछ कार्डधारियों को दूसरे राशन डीलर के अधीन करना चाहिए. इससे न केवल डीलरों के यहां भीड़ कम होगी, बल्कि आम ग्राहकों को भी राशन लेने के लिए घर से दूर चक्कर काटना नहीं पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अंत्योदय तथा अन्नपूर्णा योजना के तहत बीपीएल कार्डधारकों को न्यूनतम 35 किलो अनाज नहीं दिये जा रहे हैं. उन्होंने बीपीएल कार्डधारकों को न्यूनतम 35 किलो अनाज नियमित रूप से देने की मांग भी की है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीपीएल कार्डधारकों को दो रुपये किलो की दर से अनाज भी नहीं दिये जा रहे हैं. इन तमाम तरह की समस्याओं को दूर करने के लिए खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर को पंचायत इलाके में जाना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. हरेक 15 दिन के अंदर खाद्य इंस्पेक्टरों को पंचायत इलाके में जाकर निगरानी रखने की मांग भी की गई है. ज्ञापन देने के समय जोनल कमेटी के प्रसेनजीत मल्लिक, भानू मल्लिक, माधव सरकार, शीतल दत्ता आदि माकपा लोकल कमेटी के नेता भी उपस्थित थे.

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