10 सालों से बंद पड़ा सहकारी बैंक फिर से हुआ चालू

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jan 2017 7:56 AM

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जलपाईगुड़ी. करीब 10 सालों से बंद पड़ा एक सदी पुराना जलपाईगुड़ी पीपुल्स को-ऑपरेटिव बैंक का कामकाज मंगलवार को फिर से शुरू हो गया. इस सहकारी बैंक के लोन डिफाल्टरों (कर्ज नहीं लौटानेवालों) में पूर्व और वर्तमान शासक दल के कई नेताओं व उनके रिश्तेदारों, बैंक के पूर्व चेयरमैन के परिवार से लेकर चाय उद्योग समूहों […]

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जलपाईगुड़ी. करीब 10 सालों से बंद पड़ा एक सदी पुराना जलपाईगुड़ी पीपुल्स को-ऑपरेटिव बैंक का कामकाज मंगलवार को फिर से शुरू हो गया. इस सहकारी बैंक के लोन डिफाल्टरों (कर्ज नहीं लौटानेवालों) में पूर्व और वर्तमान शासक दल के कई नेताओं व उनके रिश्तेदारों, बैंक के पूर्व चेयरमैन के परिवार से लेकर चाय उद्योग समूहों का नाम सामने आया है. डिफाल्टरों से पैसा वसूल करने के लिए नवनिर्वाचित चेयरमैन शुभेंदु बोस ने ब्याज दर
बैंक सूत्रों ने बताया कि 1992 से 2005 तक इस बैंक की तत्कालीन परिचालन कमिटी ने व्यवसायियों, राजनीतिक नेताओं व उनके रिश्तेदारों को 7 करोड़ रुपये कर्ज दिया था. लेकिन 2006 में बैंक में प्रशासक बिठा दिया गया. इसके बाद डिफाल्टरों से 1.35 करोड़ रुपये वसूल किये गये, लेकिन तब भी 5.65 करोड़ रुपये नहीं वसूला जा सका.
शुभेंदु बोस ने बताया कि जलपाईगुड़ी जिला अदालत में मामला करने के लिए 93 लोन डिफाल्टरों की सूची तैयार की गयी है. अगर एक लोग बार में पूरा कर्ज चुकाने को तैयार हों, तो उनसे 12 फीसद की जगह 6.25 फीसद ब्याज लिया जायेगा. डिफाल्टरों की कुल संख्या 400 है, जिनमें 93 बड़े डिफाल्टर हैं. ये लोग बड़ी रकम दबाकर बैठे हैं और समझते हैं कि बैंक इनसे पैसा नहीं वसूल पायेगा. लेकिन इस बार बैंक ने कमर कस ली है.
एक चाय कंपनी ने बैंक से साल 2002 में 69 लाख रुपये का कर्ज लिया था. असल और सूद मिलाकर यह रकम अब डेढ़ करोड़ रुपये के पार हो गयी है. वहीं तृणमूल के एक नेता ने साढ़े चार लाख रुपये कर्ज लिया था, जो अब ब्याज मिलाकर 15 लाख रुपये पहुंच गया है. पूर्व शासक दल के एक बड़े स्थानीय नेता के रिश्तेदार पर भी कई लाख रुपये बकाया हैं. एक फार्मर पर सूद और मूल मिलाकर करीब एक करोड़ रुपये बाकी हैं.
बैंक के नये चेयरमैन शुभेंदु बोस ने बताया कि डिफाल्टरों को नोटिस भेजा जा रहा है. इसमें असिस्टेंट रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सहायता कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि डुवार्स के बिन्नागुड़ी, बानरहाट समेत कई चाय बागानों के श्रमिकों का पीएफ और अन्य पैसा इस बैंक में जमा है. लेकिन अभी बैंक के पास केवल डेढ़ लाख रुपये नकद मौजूद हैं. वहीं डिफाल्टरों के पास बैंक का पांच करोड़ रुपये से ऊपर बकाया है. बकाया कर्ज का पैसा वसूल करके जमाकर्ताओं को उनकी रकम 10 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से लौटायी जायेगी. यह काम आगामी मार्च महीने तक होगा. बैंक में पहले कुल 32 कर्मी थे, जो अब घटकर केवल सात लोग रह गये हैं. 2008 से बैंक नहीं चलने के बावजूद ये लोग बिना वेतन के काम कर रहे हैं. 1913 में तत्कालीन रंगपुर (अब यह बांग्लादेश का हिस्सा है) के जिला सहकारी दफ्तर के अधीन यह बैंक स्थापित हुआ था. 1992 में इस बैंक का काफी विस्तार हुआ. बानरहाट, कोलाबाड़ी, मेटेली, नागराकाटा, बिन्नागुड़ी, अदलाबाड़ी समेत कई जगहों पर बैंक की बंद शाखाएं दोबारा शुरू की गयीं. बीते साल सहकारी निर्वाचन कमिश्नर के माध्यम से बैंक की नयी परिचालन समिति गठित हुई. जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के तृणमूल के महासचिव तथा आइएनटीटीयूसी (असंगठित श्रमिक) के जिला अध्यक्ष शुभेंदु बोस चेयरमैन निर्वाचित हुए. सुशील कुमार सेन को सचिव बनाया गया.
बैंक में नये खाते खोलने और पुराने खातों को चालू करने की प्रक्रिया शुरू हुई है. शुभेंदु बोस ने बताया कि विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के कर्मियों की मजदूरी और वेतन का भुगतान इस बैंक से किये जाने का अनुरोध किया जा रहा है. मंगलवार को बैंक के अधिकारियों ने संवाददाता सम्मेलन कर यह खबर दी. एक तरफ जब नोटबंदी के चलते सहकारी बैंक संकट में हैं, तो ऐसे में इस बैंक की दोबारा शुरू होने की कोशिश कितना रंग लायेगी, यह देखना दिलचस्प होगा.
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