प्राथमिक स्कूलों को अंगरेजी माध्यम में करने के प्रस्ताव को लगा झटका

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Nov 2016 5:55 AM

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सिलीगुड़ी में बंद हुआ एक और प्राथमिक स्कूल, एक भी बच्चे ने नहीं लिखाया नाम सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी महकमा के कइ सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिणत करने की योजना में पलीता लगने की संभावना है. सिलीगुड़ी प्राथमिक शिक्षा परिषद ने इसकी पहल की है. इसको लेकर राज्य शिक्षा विभाग की ओर से […]

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सिलीगुड़ी में बंद हुआ एक और प्राथमिक स्कूल, एक भी बच्चे ने नहीं लिखाया नाम
सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी महकमा के कइ सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिणत करने की योजना में पलीता लगने की संभावना है. सिलीगुड़ी प्राथमिक शिक्षा परिषद ने इसकी पहल की है.
इसको लेकर राज्य शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है. कुकुरमुत्ते की तरह अनियंत्रित होकर फैल रहे निजी विद्यालयों की वजह से सरकारी विद्यालयों पर काफी असर पड़ा है. सिलीगुड़ी के देशबंधुपाड़ा स्थित एक नंबर शिशु विद्यालय नामक प्राथमिक स्कूल विद्यार्थियों के अभाव में बंद हो गया है. सिलीगुड़ी प्राथमिक शिक्षा परिषद इन विद्यालयो में अच्छे शिक्षकों को भेजकर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू करना चाहती है.
सिलीगुड़ी शिक्षा जिला प्राथमिक विद्यालय निरीक्षक विजय लक्ष्मी पाल से मिली जानकारी के अनुसार टेट नियुक्ति प्रक्रिया खत्म होने के बाद इस ओर पहल की जायेगी. उल्लेखनीय है कि सिलीगुड़ी महकमा परिषद इलाके में निजी विद्यालयों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. जहां एक ओर बड़े-बड़े शिक्षण संस्थान एक के बाद एक ब्रांच खोलने में लगे हैं वहीं हर एक गली मुहल्ले में तेजी से छोटे-छोटे निजी स्कूल खुल रहे रहे हैं. आलम यह है कि कुछ जमीन खरीद कर या भाड़े पर मकान लेकर भी लोग बच्चों के लिये अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खोल रहे हैं.
सिलीगुड़ी नगर निगम और सिलीगुड़ी महकमा परिषद से मिली जानकारी के अनुसार कुछ निजी विद्यालय ऐसे भी हैं जिनके पास किसी भी प्रकार का वैध दस्तावेज नहीं है. इनके पास ना तो किसी बोर्ड की मान्यता है और ना ही स्कूल चलाने का ट्रेड लाइसेंस आदि. ऐसे विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाले सर्टिपिकेट का काइ महत्व ही नहीं है. फिर भी अंग्रेजी शिक्षा के तेज बहाव में लोग उसी ओर बहते जा रहे हैं.
अपनी सुविधा के लिये मध्यम वर्गीय परिवार अपने नन्हे बच्चों को पास वाले अंग्रेजी स्कूल में दाखिला करा देते हैं. कक्षा चतुर्थ या पाचवीं के बाद विद्यार्थी को किसी सरकारी उच्च विद्यालय में डाल देते हैं. अभिभावकों के इस सोच से सरकारी प्राथमिक विद्यालयों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ रहा है. सिलीगुड़ी महकमा के अंतर्गत ऐसे दो-चार स्कूल हैं जिनमें छात्रों की संख्या नगण्य है. सिलीगुड़ी शिक्षा जिला प्राथमिक विद्यालय काउंसिल ने ऐसे विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिणत करने का मन बनाया है.
इसके लिये राज्य शिक्षा विभाग का प्रस्तवा भी भेजा गया है. बस अब शिक्षा विभाग की ओर हरी झंडी मिलने भर की देरी है. स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के 27 नंबर वार्ड के बाबूपाड़ा स्थित 1 नंबर शिशु विद्यालय पूरी तरह से बंद हो गया. वर्तमान में उस विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में एक भी बच्चे का नाम दर्ज नहीं है. विद्यालय में एक ही शिक्षिका है जो प्रत्येक दिन विद्यालय आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करती है, और कुछ घंटे विद्यालय में अकेली बैठकर फिर विद्यालय बंद कर वापस लौट जाती है. इसकी जानकारी सिलीगुड़ी शिक्षा जिला प्राथमिक विद्यालय काउंसिल को भी है. लेकिन विद्यार्थियों के अभाव में कोई करे भी तो क्या?
सिलीगुड़ी शिक्षा जिला प्राथमिक विद्यालय काउंसिल के जिला विद्यालय निरीक्षक विजय लक्ष्मी पाल ने बताया कि प्रतिवर्ष प्राथमिक विद्यालय में नामांकन प्रतिशत लगातार घट रहा है. कुछ ऐसे भी विद्यालय हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या काफी नगण्य है या बंद होने के कागार पर हैं. ऐसे सरकारी प्राथमिक विद्यालय को फिर से शुरू करने के लिये राज्य शिक्षा विभाग से विचार-विमर्श किया जा रहा है.
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे राज्य में रोजगार की इतनी मारामारी है कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी बेकार बैठे युवक व युवती प्राथमिक शिक्षक बन जाते हैं. सिलीगुड़ी प्राथमिक विद्यालय काउंसिल ऐसे शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता को उपयोग में लाकर बंद होने के कागार पर खड़े विद्यालयों को फिर से शुरू करना चाहती है. मिली जानकारी के अनुसार ऐसे विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रणाली शुरू करने के लिय राज्य शिक्षा विभाग के समक्ष पेशकश की गयी है. उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षक व शिक्षिकाओं को इन विद्यालयों में लाकर कायाकल्प करने की योजना बनाई गयी है.
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