जीटीए से गोजमुमो का मोहभंग

Updated at : 17 Jun 2014 9:40 AM (IST)
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जीटीए से गोजमुमो का मोहभंग

सिलीगुड़ी: लोकसभा चुनाव के बाद से ही गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) का गोरखलैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) से मोहभंग हो गया लगता है. लोकसभा चुनाव के बाद से अबतक गोजमुमो नेताओं को जीटीए के मुख्यालय लालकोठी में कम ही आते देखा गया है. जीटीए में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग समेत मोरचा […]

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सिलीगुड़ी: लोकसभा चुनाव के बाद से ही गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) का गोरखलैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) से मोहभंग हो गया लगता है. लोकसभा चुनाव के बाद से अबतक गोजमुमो नेताओं को जीटीए के मुख्यालय लालकोठी में कम ही आते देखा गया है. जीटीए में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग समेत मोरचा के अन्य जीटीए सदस्य लालकोठी आ ही नहीं रहे हैं.

हर महीने लालकोठी में जीटीए की बोर्ड बैठक होने की बात थी, लेकिन जनवरी महीने के बाद से जीटीए सदस्यों को लेकर कोई बोर्ड बैठक नहीं की गयी. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जीटीए के माध्यम से विकास योजनाएं भी नहीं बनायी जा रही है. इसी वजह से विकास कार्यो के लिए धनराशि का आवंटन भी बंद है.जीटीए के प्रति गोजमुमो नेताओं के इस मोहभंग से पार्टी के अंदर भी असंतोष है. मोरचा समर्थकों का कहना है कि पहाड़ में दिशाहीन राजनीति का दौर चल रहा है. हालांकि जीटीए के डिप्टी चीफ कर्नल रमेश आले ने जीटीए में सबकुछ ठीक होने की बात कही है. लेकिन सबकुछ ठीकठाक लग नहीं रहा.

जीटीए के नियमों के तहत हर महीने एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक करनी होगी. इसके अलावा हर दो महीने में एक बार सभी सदस्यों व जीटीए सचिवों को लेकर आम सभा करने का भी नियम है. लेकिन जनवरी के बाद से ही जीटीए में किसी प्रकार की कोई बैठक नहीं हुई है. हालांकि दो जून को एक रिव्यू बैठक हुई थी. लेकिन इस बैठक में विकास कार्यो पर लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. इस संबंध में जीटीए के निर्वाचित मोरचा सदस्यों का कहना है कि विकास के लिए जीटीए के हर सदस्य को साल में 30 लाख रुपये देने की बात थी. इसके तहत जीटीए सदस्यों ने अपने इलाके में पेय जल, स्कूल, सड़क आदि परियोजनाओं का खाका तैयार कर लालकोठी में जमा कर दिया है, लेकिन अभी तक एक रुपया भी नहीं दिया गया.

जीटीए में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों का कहना है कि मोरचा जीटीए के संचालन के प्रति गंभीर है कि नहीं,यह सबसे बड़ी बात है. इनलोगों का कहना है कि जीटीए सदस्य नियमित रूप से बैठक नहीं कर रहे हैं.

विकास के बारे में इलाके के लोगों के सवालों का वहलोग क्या जवाब देंगे. गोजमुमो नेताओं के इस मोहभंग की जानकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी दे दी गयी है. सूत्रों के अनुसार उन्होंने बस कुछ ठीकठाक हो जाने की बात कही है.हालांकि गोजमुमो के कई नेताओं का कहना है कि बीच बीच में बिमल गुरुंग लालकोठी आते हैं.

इन नेताओं ने हर काम सही तरीके से होने का दावा किया. इनलोगों का कहना कि भले ही कुछ महीनों तक बोर्ड की बैठक नहीं हुई, लेकिन विकास का काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि जुलाई महीने में आम सभा बुलायी जा सकती है.

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