कंचनजंगा स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की तैयारी

Published at :13 Feb 2018 5:59 AM (IST)
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कंचनजंगा स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की तैयारी

राज्य सरकार के हाथों सौंपने की कवायद तेज स्टेडियम कमेटी ने लिया फैसला बैठक में प्रस्ताव भी हुआ पारित खेल मंत्रालय से की जायेगी बात सिलीगुड़ी : कंचनजंगा स्टेडियम को अंतराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए इसे राज्य सरकार को सौंपने की कवायद शुरू की गयी है. कंचनजंगा स्टेडियम कमेटी की बोर्ड बैठक में यह […]

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राज्य सरकार के हाथों सौंपने की कवायद तेज
स्टेडियम कमेटी ने लिया फैसला
बैठक में प्रस्ताव भी हुआ पारित
खेल मंत्रालय से की जायेगी बात
सिलीगुड़ी : कंचनजंगा स्टेडियम को अंतराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए इसे राज्य सरकार को सौंपने की कवायद शुरू की गयी है. कंचनजंगा स्टेडियम कमेटी की बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव आया था. जबकि सोमवार को स्टेडियम कमेटी ने राज्य सरकार को सौंपने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है. राज्य के खेल व युवा कल्याण मंत्री अरूप विश्वास को भी इस निर्णय से अवगत कराया जायेगा. उक्त जानकारी स्टेडियम कमेटी के सदस्य कृष्णचंद्र पाल ने दी है.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1969 में तत्कालीन वाम मोरचा सरकार ने कंचनजंगा स्टेडियम का निर्माण करवाया था. स्टेडियम बनने से पहले यह मैदान सिलीगुड़ी में तिलक मैदान के नाम से प्रसिद्ध था. यह जमीन तिलक छेत्री नामक एक ब्यक्ति की थी, जिन्होंने स्टेडियम बनाने के लिए राज्य सरकार को दे दिया था. स्टेडियम बनने के बाद तिलक मैदान का नाम कंचनजंगा स्टेडियम पड़ा. हांलाकि इसे अब कंचनजंघा क्रीड़ांगन के नाम से भी जाना जाता है.
ऐसे विभिन्न खेलों के लिए कंचनजंगा स्टेडियम का निर्माण हुआ था. अब यहां अधिकांशत: क्रिकेट व फुटबॉल का ही आयोजन होता रहा है. यहां अब तक कुल 11 रणजी ट्रॉफी क्रिकेट मैच के अलावा फेडरेशन कप, सेलिब्रिटी ट्रॉफी, संतोष ट्रॉफी, नेहरू गोल्ड कप व आई-लीग का मैच आयोजित हुआ है. अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी इस मैदान पर उतरे जरूर हैं, लेकिन अब तक इस मैदान पर एक भी अंतराष्ट्रीय मैच नहीं खेला गया है. वर्ष 2010 में कंचनजंगा स्टेडियम में सबसे पहला रणजी ट्रॉफी बंगाल और पंजाब के बीच खेला गया था.
इस्ट बंगाल व मोहन बागान के बीच होने वाले डर्बी मैच में पूरे राज्य से समर्थकों का हुजूम उमड़ता है. राज्य का दूसरे सबसे बड़े शहर में शामिल सिलीगुड़ी के कंचनजंगा स्टेडियम की स्थिति अंतराष्ट्रीय स्तर का नहीं है. जबकि स्टेडियम में 40 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है. इडेन गार्डन व अन्य अंतराष्ट्रीय स्टेडियमो की तरह ही कंचनजंगा स्टेडियम का विकास व ढांचागत व्यवस्थाओं के लिए संचालन कमिटी ने इसे राज्य सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है.
निर्माण के साथ ही कंचनजंगा स्टेडियम की देखरेख व संचालन के लिए तत्कालीन सरकार ने एक कमेटी गठित की थी.जो आज तक कंचनजंगा स्टेडियम का संचालन करती आयी है.
हांलाकि समय के साथ स्टेडियम की सुविधाओं में कुछ खास विकास नहीं हो पाया है. राज्य सरकार ने वर्ष 2014 में कंचनजंगा स्टेडियम के विकास के लिए 1.7 करोड़ रूपया भी आवंटित किया था. लेकिन हाल ही में हुए बोर्ड मीटिंग में कंचनजंगा स्टेडियम को राज्य सरकार के हाथों सौंपने का प्रस्ताव पेश हुआ. स्टेडियम के विकास को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर सदस्यों ने सहमति जतायी है.
कंचनजंगा स्टेडियम कमिटी के सदस्य कृष्णचंद्र पाल ने बताया कि यह स्टेडियम शहर के विकास का साक्ष्य है. इस स्टेडियम की ढांचागत व्यवस्थाओं का विकास कर इसे अंतराष्ट्रीय स्टेडियम का दर्जा दिलाना आवश्यक है. सिलीगुड़ी सहित उत्तर बंगाल के खिलाड़ियों के लिए भी यह बड़ी उपलब्धि होगी. कंचनजंगा क्रीड़ांगन कमिटी ने इसे राज्य सरकार को सौंपने का निर्णय ले लिया है. राज्य के खेल व युवा कल्याण मंत्री अरूप विश्वास से भी इस संबंध में विचार-विमर्श किया जायेगा.
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