कालियागंज में धड़ल्ले से चल रहा सूदखोरी का धंधा

Published at :10 Nov 2017 10:25 AM (IST)
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कालियागंज में धड़ल्ले से चल रहा सूदखोरी का धंधा

कालियागंज: बैंकों से कर्ज मिलने की जटिल प्रक्रिया का लाभ सूदखोर उठा रहे हैं. कालियागंज में कुछ लोग ऊंची ब्याज दर पर प्राइवेट लोन देकर मोटी कमाई कर रहे हैं. प्रशासन की नाक के नीचे ऐसे सूदखोर बैठे-बैठे लाखों के वारे-न्यारे कर रहे हैं. गरीब और साधारण वर्ग के लोग सूदखोरों के कर्ज के भारतले […]

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कालियागंज: बैंकों से कर्ज मिलने की जटिल प्रक्रिया का लाभ सूदखोर उठा रहे हैं. कालियागंज में कुछ लोग ऊंची ब्याज दर पर प्राइवेट लोन देकर मोटी कमाई कर रहे हैं. प्रशासन की नाक के नीचे ऐसे सूदखोर बैठे-बैठे लाखों के वारे-न्यारे कर रहे हैं. गरीब और साधारण वर्ग के लोग सूदखोरों के कर्ज के भारतले दबकर जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं.

कई बार ऐसे लोग आत्महत्या भी कर ले रहे हैं. सूदखोरों को मूलधन भले देर से मिले, लेकिन ब्याज उन्हें हर महीने निर्धारित तारीख को मिल जाना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर या कुछ विलंब होने पर कर्जदार को अपने ही घर में अपमानित और प्रताड़ित होना पड़ता है. उसकी इज्जत मिट्टी में मिल जाती है. खबर है कि कालियागंज के कई नौकरीपेशा व्यक्ति और व्यवसायी इस तरह का काला धंधा कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं है.

अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर एक कर्जदार ने बताया कि वे पिछले पांच साल से कर्ज के लिए ब्याज दे रही हैं. उनके पति जब बीमार पड़े तो उन्होंने अपने पड़ोसी से कर्ज लिये. उन्होंने बताया कि 40 हजार रुपये के एवज में वह अब तक एक लाख रुपये दे चुकी हैं. महीना पूरा होते ही सूदखोर घर पर आ धमकते हैं. ब्याज दे दिया तो ठीक, नहीं तो शुरू होती है गाली-गलौज और मारने-पीटने की धमकी. इस तरह का गोरखधंधा कालियागंज प्रखंड अंतर्गत अस्पतालपाड़ा, महेन्द्रगंज, सेठ कालोनी, स्कूलपाड़ा, श्रीकालोनी, साहपाड़ा जैसे इलाकों में चल रहा है.
सूत्र के अनुसार, एक हजार रुपये पर 10 प्रतिशत या कहीं-कहीं 20 प्रतिशत मासिक तक ब्याज लिया जा रहा है. ब्याज की चक्की में पिस रहे कई लोग अपना घर छोड़ चुके हैं. वहीं कालियागंज शहर के एक निवासी ने राधिकापुर-कोलकाता एक्सप्रेस ट्रेन से कटकर जान दे दी. बताया जाता है कि वह कर्ज से दबे हुए थे. जानकारी अनुसार, सूदखोरी से हो रही मोटी आय के फलस्वरूप बहुत से लोगों ने अपार संपत्ति अर्जित कर ली है. इन संपत्तियों की अगर जांच की जाये, तो सच्चाई का पता लग जायेगा. कई कर्जदार लोगों ने कहा कि प्रशासन को इस तरह के लोगों पर लगाम कसनी चाहिए.
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