कमजोर पड़ने लगा पहाड़ पर जारी बेमियादी बंद

Published at :25 Aug 2017 11:13 AM (IST)
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कमजोर पड़ने लगा पहाड़ पर जारी बेमियादी बंद

सिलीगुड़ी: गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर 70 दिनों से अधिक समय से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र बंद चल रहा है. इससे जहां एक तरफ लोगों को कहीं आने-जाने में कठिनाई हो रही है, वहीं रोजी-रोजगार बंद हो जाने से आम लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं. पहाड़ का जनजीवन बेमियादी बंद के चलते […]

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सिलीगुड़ी: गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर 70 दिनों से अधिक समय से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र बंद चल रहा है. इससे जहां एक तरफ लोगों को कहीं आने-जाने में कठिनाई हो रही है, वहीं रोजी-रोजगार बंद हो जाने से आम लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं. पहाड़ का जनजीवन बेमियादी बंद के चलते पूरी तरह ठप है. वहीं जिस गोरखालैंड राज्य गठन के लक्ष्य को लेकर यह आंदोलन शुरू हुआ था, वह हासिल होता हुआ भी नहीं दिख रहा है. निराशा और हताशा के बीच झूल रहे पहाड़वासी अब इस बंद से छुटकारा चाहते हैं.
बीते मंगलवार की सुबह गाड़ीधुरा के निकट लांग व्यू चाय बागान में श्रमिकों ने बैठक कर हड़ताल को तोड़ते हुए काम-काज शुरू करने का फैसला लिया. उसी दिन लांग व्यू चाय बागान के प्रबंधन को काम पर लौटने की सूचना श्रमिकों ने दे दी. हालांकि काम पर लौटने के फैसले का गोजमुमो के कट्टर समर्थकों ने विरोध किया, लेकिन बहुसंख्यक चाय श्रमिकों के सामने उनकी एक न चली. बुधवार से लांग व्यू चाय बागान में सामान्य रूप से काम-काज शुरू हो गया है.
कुछ दिनों पहले सेवक बाजार के व्यवसायियों ने हड़ताल की परवाह नहीं करते हुए अपनी दुकानें और होटल वगैरह खोल दिये. बीते मंगलवार को दार्जिलिंग शहर और मिरिक में भी कई दुकानें खुली रहीं. इतने लंबे समय तक इस आंदोलन के जारी रहने के पीछे गोरखालैंड राज्य गठन का सपना था, लेकिन अब आंदोलन का नेतृत्व देनेवाले गोजमुमो और कोऑर्डिनेशन कमेटी के घटक दलों पर केन्द्र व राज्य सरकार दोनों का दबाव बढ़ गया है. मौजूदा हालात को देखते हुए आम जनता को भी अब लग रहा है कि गोरखालैंड राज्य मिलने से रहा. उलटे उनकी रोजी-रोटी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है.
चाय बागानों से लेकर होटल व्यवसाय और परिवहन व्यवस्था ठप हो जाने से पहाड़ के लोगों के लिए अपनी जीविका चलाना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में आम हड़ताल की नाफरमानी हैरत करनेवाली घटना नहीं है. उल्लेखनीय है कि लांग व्यू चाय बागान में स्थायी और अस्थायी मिलाकर करीब 4000 श्रमिक काम करते हैं. गोरखालैंड आंदोलन के चलते इनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया था. करीब एक सप्ताह पहले ही बागान के कई श्रमिकों ने बंद का विरोध करते हुए काम पर जाना चाहा. उस समय हालात प्रतिकूल होने के चलते गोजमुमो के श्रमिक नेताओं ने धमकाकर उन्हें चुप करा दिया था. लेकिन इस बार बहुसंख्यक श्रमिक आम हड़ताल के खिलाफ थे.
नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर लांग व्यू चाय बागान के एक अधिकारी ने बताया कि चाय बागान में काम-काज शुरू हो गया है. बुधवार को करीब 1500 से अधिक श्रमिकों ने काम किया है. कुछ बंद समर्थकों ने काम में बाधा देने की कोशिश की थी, लेकिन श्रमिकों के व्यापक प्रतिरोध के सामने उनकी एक नहीं चली. चाय बागान के एक मोर्चा समर्थक श्रमिक नेता ने बताया कि हमलोग भी गोरखालैंड राज्य चाहते हैं, लेकिन यह काम श्रमिकों के पेट पर लात मारकर नहीं हो सकता. हमलोग अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. पानी सिर के ऊपर से बह रहा है. घर में खाने को एक दाना नहीं है. बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया है. ऐसे कब तक चलेगा. मोर्चा के एक चाय श्रमिक संगठन ने डीटीडीटीएलयू के नेता तिलक चंद रोका ने इस प्रसंग में कहा कि हमलोग बागान श्रमिकों के साथ बात करेंगे. संभव है कि उनकी कुछ स्थानीय समस्याएं होंगी. हालांकि ये सभी श्रमिक उनके आंदोलन के साथ हैं.
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