जॉन बारला व सुकरा मुंडा हुए आमने-सामने, जॉन ने अलग गोरखालैंड राज्य का किया समर्थन, गोरखालैंड आंदोलन के चलते दोस्त बने विरोधी

Updated at :14 Jul 2017 10:04 AM
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जॉन बारला व सुकरा मुंडा हुए आमने-सामने, जॉन ने अलग गोरखालैंड राज्य का किया समर्थन, गोरखालैंड आंदोलन के चलते दोस्त बने विरोधी

जलपाईगुड़ी. गोरखालैंड आंदोलन ने रिश्तों में भी दरार डालनी शुरू कर दी है. जो कभी दोस्त हुआ करते थे, गोरखालैंड के लिए अब दुश्मनी निभाने पर तुले हुए हैं. ऐसा ही कुछ आदिवासी नेता जॉन बारला व सुकरा मुंडा के बीच चल रहा है. एक समय था जब जॉन बारला व सुकरा मुंडा दोनों सहपाठी […]

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जलपाईगुड़ी. गोरखालैंड आंदोलन ने रिश्तों में भी दरार डालनी शुरू कर दी है. जो कभी दोस्त हुआ करते थे, गोरखालैंड के लिए अब दुश्मनी निभाने पर तुले हुए हैं. ऐसा ही कुछ आदिवासी नेता जॉन बारला व सुकरा मुंडा के बीच चल रहा है. एक समय था जब जॉन बारला व सुकरा मुंडा दोनों सहपाठी थे. लेकिन गोरखालैंड आंदोलन को लेकर दोनों अब एक-दूसरे के विरुद्ध मैदान में उतर आये हैं. आनेवाले दिनों में दोनों के बीच विरोध और भी गाढ़ा होने की आशंका बनी हुई है. एक समय था कि जब डुवार्स में गोरखालैंड आंदोलन के विरोध में आदिवासी विकास परिषद की ओर से जॉन बारला व सुकरा मुंडा दोनों एक साथ खड़े हुए थे. लेकिन समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है.

गुरुवार को धूपगुड़ी ब्लॉक के लक्खीपाड़ा चाय बागान में अपने घर में जॉन बारला ने संवाददात सम्मेलन आयोजित कर साफ कह दिया कि वह छोटे राज्य के पक्षधर हैं. अगर गोरखालैंड का गठन होता है और डुवार्स के कुछ मौजों को गोरखालैंड में शामिल किया जाता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. जॉन बारला ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में गोरखालैंड का विरोध कर उन्होंने गलती की थी, ऐसी गलती वह दोबारा नहीं करेंगे. गोरखालैंड का विरोध कर आदिवासी विकास परिषद से उन्हें कुछ लाभ नहीं मिला.

उन्होंने आगे कहा कि डुवार्स में आदिवासी संप्रदाय के लोग ज्यादा रहने के बावजूद उनके पास निजी जमीन नहीं है. उन्हें अभी तक जमीन का पट्टा नहीं दिया गया है. अपनी भूमि में ही आदिवासी प्रवासी की तरह रह रहे हैं. छोटा राज्य के गठन होने से विकास ज्यादा होगा. छोटे राज्य के पक्ष में आदिवासी व नेपाली भाइयों को एकसाथ लेकर वह कैसे आंदोलन करेंगे, इस बारे में एक रूपरेखा तैयार किये जाने की जानकारी भी जॉन बारला ने दी.

इस बारे में आदिवासी विकास परिषद (आविप) के राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की ने बताया कि वे राज्य के बंटवारे के विरुद्ध हैं. 2008 में आविप नेता जॉन बारला व सुकरा मुंडा दोनों ने मोरचा का साथ दिया था. जिस कारण दोनों को आविप से निकाल दिया गया था. सुकरा मुंडा तृणमूल के विधायक बनने के बाद गोरखालैंड का विरोधी हुए हैं. लेकिन जॉन बारला अगर अलग राज्य की मांग में आंदोलन शुरू करता है तो तीव्र विरोध किया जायेगा.

दूसरी ओर, नागराकाटा के सुलका मोड़ पर निजी कार्यालय में बैठकर सुकरा मुंडा ने कहा कि पहाड़ के आंदोलन का असर डुवार्स में पड़ने नहीं दिया जायेगा. पश्चिम बंगाल का कोई भी आदमी नहीं चाहता है कि बंगाल का विभाजन हो. उन्होंने कहा कि जॉन बारला से अनुरोध किया गया है कि वह डुवार्स में शांति बनाये रखने पर ध्यान दें क्योंकि डुवार्स में कोई नहीं चाहता है कि गोरखालैंड का गठन हो.
उल्लेखनीय है कि जॉन बारला वर्तमान में बीजेपी के टी वर्कर्स यूनियन के डुवार्स यूनिट के सचिव है. छोटे राज्य के पक्ष में जॉन के दावों से जिला भाजपा भी मुश्किल में पड़ गयी है.
जलपाईगुड़ी जिला भाजपा अध्यक्ष दीपेन प्रमाणिक ने बताया कि अलग राज्य को लेकर भाजपा ने अभी कुछ निर्णय नहीं लिया है. लेकिन पहाड़ पर मोर्चा के आंदोलन में राज्य सरकार जिस तरह से शोषण व अत्याचार की राजनीति कर रही है, भाजपा उसका तीव्र विरोध करती है.
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