फिर उठी गोरखालैंड की मांग, 18 से दिल्ली में होगा आंदोलन

दार्जिलिंग : गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो)ने मंगलवार को अपना आठवां स्थापना दिवस स्थानीय चौरास्ता के ओपन थियेटर में मनाया. समारोह में मोरचा सुप्रीमो विमल गुरुंग मौजूद नहीं हो पाये. उनके चाचा के स्वर्गवास हो जाने के कारण वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाये. समारोह की अध्यक्षता पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष आरपी बाइवा ने किया. […]
दार्जिलिंग : गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो)ने मंगलवार को अपना आठवां स्थापना दिवस स्थानीय चौरास्ता के ओपन थियेटर में मनाया. समारोह में मोरचा सुप्रीमो विमल गुरुंग मौजूद नहीं हो पाये. उनके चाचा के स्वर्गवास हो जाने के कारण वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाये. समारोह की अध्यक्षता पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष आरपी बाइवा ने किया. वही पार्टी के केंद्रीय महासचिव रोशन गिरि, सहसचिव विनय तामांग, केंद्रीय सहसचिव ज्योति कुमार राई, विधायक त्रिलोक कुमार देवान, मोरचा के विभिन्न शाखा संगठन के कार्यकर्ता आदि उपस्थित थे.
कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी की तसवीर के सामने दीप जला कर किया गया. बाद में आरपी बाइवा ने गोजमुमो का झंडा फहराया. मोरचा के सदर महकमा समिति के अध्यक्ष राजू प्रधान ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया. गोरखालैंड पर्सनल (जीएलपी) के कैडरों ने नेपाली संगीत प्रस्तुत किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रोशन गिरि ने बताया कि सात अक्तूबर 2007 को विमल गुरुंग ने गोरखा जनमुक्ति मोरचा का गठन किया था.
मोरचा अपने स्थापना काल से गोरखा समुदाय के हित में काम करता आ रहा है. 2007 में मोरचा ने छठी अनुसूची के लिए आंदोलन किया था. बाद में छठी अनुसूची गोरखा समुदाय में हित में नहीं होने के कारण मोरचा ने उसका विरोध कर अलग राज्य गोरखालैंड की मांग में नारा लगाना शुरू कर दिया. मोरचा गणतांत्रिक व गांधीवादी नीतियों को आगे रख कर आंदोलन की शुरुआत की थी. मोरचा ने गोरखालैंड की मांग को छोड़ा नहीं है. आज भी मोरचा गोरखालैंड की मांग पर अडिग व ईमानदार है.
जीटीए एक अस्थायी व्यवस्था है. जीटीए के समझौता पत्र में मोरचा ने गोरखालैंड मुद्दे को यथावत रखते हुए समझौता पत्र में हस्ताक्षर किया था. गोरखालैंड के लिए मोरचा अपना कार्यक्रम करते आ रहा है. 18, 19 व 20 दिसंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर में धरना प्रदर्शन किया जायेगा. मोरचा का भाजपा के साथ अच्छा संबंध है. गोरखालैंड का सपना भाजपा जरूर साकार करेगी. आज के कार्यक्रम में जीएलपी जवानों व कांचनजंघा नृत्य अकादमी के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया. साथ ही मोरचा के गोरखालैंड आंदोलन को नाटकीय रूप में प्रदर्शन किया गया.
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