पश्चिम बंगाल के सरकारी महकमा में अवकाश ही अवकाश, आम जन तनाव में
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Oct 2019 9:13 PM
शिव कुमार राउत कोलकाता : असम के बाद पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लगाने के कयासों का दौर शुरू हो गया है. राज्य और केंद्र के बीच में इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मिंयां बढ़ी हैं. वहीं, महानगर के लोग ‘नागरिकता’ पहचान के दस्तावेजों को दुरूस्त करने में लगे हुए हैं. दीगर की बात यह […]
शिव कुमार राउत
कोलकाता : असम के बाद पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लगाने के कयासों का दौर शुरू हो गया है. राज्य और केंद्र के बीच में इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मिंयां बढ़ी हैं. वहीं, महानगर के लोग ‘नागरिकता’ पहचान के दस्तावेजों को दुरूस्त करने में लगे हुए हैं. दीगर की बात यह है कि त्योहारों के मौसम के बीच भी कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में जन्म प्रमाण पत्र के लिए भीड़ उमड़ती रही है.
अब सरकारी महकमों की लंबी छुट्टियों से लोग काफी तनाव में हैं. खासकर सीनियर सिटीजन का वह वर्ग जिन्हें अब तक जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं पड़ी थी. लेकिन ‘एनआएसी मसौदे’ से डरे कुछ लोग कोर्ट के ऑर्डर के साथ जन्म प्रमाण पत्र हेतु केएमसी पहुंच रहे हैं.
कोलकाता के 86 नंबर वार्ड निवासी 62 वर्षीय बाबला चौधरी का कहना है कि, ‘सचमुच में कलयुग आ गया है. यहीं बचपन बीता, जवानी भी गयी लेकिन कभी जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत ही नहीं पड़ी. लेकिन अब बुढ़ापे में बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना पड़ रहा है. 29 सितंबर से ही इस प्रमाणपत्र के चक्कर में केएमसी का चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन अब तक मेरा नंबर नहीं आया है. एक तो निगम का नियम-कानून जिसमें हर दिन 100 लोगों को ही बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है. दूसरा यहां के कर्मचारियों की भारी-भरकम छुट्टी. 2-15 अक्टूबर तक निगम बंद रहा. अब 21 अक्टूबर को जाउंगा देखते हैं क्या होता है?
वहीं, बेहला स्थित 128 नंबर वार्ड के निवासी नानटू पाल ने बताया कि उनके मकान में पानी के नल का कनेक्शन लगवाना है. लेकिन लंबी छुट्टी के कारण उन्हें अब तक पानी का कनेक्शन नहीं मिला है.
एक नजर सरकारी कर्मचारियों के हॉलिडे लिस्ट पर
त्योहारों पर छुट्टियां देने के मामले में पश्चिम बंगाल प्रशासन की दरियादिली बेमिसाल है. इस वर्ष सरकारी दुर्गापूजा में दफ्तरों में 14 दिन की लंबी छुट्टी रही है. इमरजेंसी सेवा को छोड़कर गांधी जयंती 2 से 15 अक्टूबर तक सरकारी महकमों में छुट्टी थी. दीगर की बात यह है कि कालीपूजा यानी 27 अक्टूबर रविवार को है. इसलिए दीपावली की छुट्टी 28 अक्टूबर सोमवार को दी गयी है. जबकि 26 अक्टूबर शनिवार को भी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे.
इसके बाद 29 अक्टूबर को भैया दूज के लिए सरकारी छुट्टी की घोषणा की गयी है. यानी अक्टूबर महीने में सरकारी कर्मचारी मात्र 11 दिन का कार्य कर पूरे महीने का वेतन लेंगे. छठ पूजा पर्व पर भी दिल खोलकर अवकाश दिया गया है. महापर्व छठ, इस वर्ष 2-3 नंवबर को है. चूंकि शनिवार व रविवार होने के कारण प्रशासन ने सेक्शनल हॉलीडे के अंतर्गत छठ पूजा करने वाले कर्मचारियों को चार नवंबर यानी सोमवार को छुट्टी देने की घोषणा की है. ज्ञात हो कि वाममोर्चा के 34 वर्ष के शासन काल में कर्मचारियों को छठपर्व पर छुट्टी नहीं मिलती थी. यही नहीं प्रशासन ने शिवरात्री, जमाईषष्ठी, भाईदूज जैसे त्योहारों पर भी कर्मचारियों को अवकाश देने का सिलसिला शुरू किया है.
छुट्टी है डैमेज कंट्रोल का प्रयास
विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने दुर्गापूजा, दीपावली एवं काली पूजा के अवसर पर लंबी छुट्टी को सरकार के प्रति कर्मचारियों के गुस्से को कम करने का तरकीब करार दिया है. सरकारी कर्मचारी परिषद के संयोजक देवाशीष शील ने कहा कि वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ. चार वर्ष बाद एक जनवरी 2020 से नये पे स्केल के तहत कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जायेगा. लेकिन कर्मचारियों के चार वर्ष के एरियर का भुगतान नहीं किया जायेगा. वहीं, करीब 17 फीसदी डीए बकाया है.
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