गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन प्लेट शुल्क में 220 करोड़ की धांधली, राज्य की जनता को लूट रही हैं दो कंपनियां - अधीर

Updated at : 25 Aug 2018 1:44 AM (IST)
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गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन प्लेट शुल्क में 220 करोड़ की धांधली, राज्य की जनता को लूट रही हैं दो कंपनियां - अधीर

कोलकाता : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने राज्य में गाड़ियों के हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के शुल्क में करोड़ों की धांधली होने का आरोप लगाया है. श्री चौधरी ने कहा कि राज्य में 2010 में दो कंपनियों को 10 वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन प्लेट देने के लिए ठेका दिया गया था. इनमें सेलेक्स टेक्नोलॉजिस […]

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कोलकाता : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने राज्य में गाड़ियों के हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के शुल्क में करोड़ों की धांधली होने का आरोप लगाया है. श्री चौधरी ने कहा कि राज्य में 2010 में दो कंपनियों को 10 वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन प्लेट देने के लिए ठेका दिया गया था. इनमें सेलेक्स टेक्नोलॉजिस और उत्सव सेफ्टी सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
अन्य राज्यों के तुलना में शुल्क काफी अधिक
श्री चौधरी ने कहा कि ये कंपनियां अन्य राज्यों में भी काम करती हैं, जहां दोपहिया वाहनों के लिए पश्चिम बंगाल में सेलेक्स शुल्क 282 रुपये लेती है, वहीं राजस्थान में यह 120 रुपये, ओडिशा में 170 रुपये और तमिलनाडु में 110 रुपये है. तिपहिया वाहनों का बंगाल में सेलेक्स का शुल्क 298 रुपये, राजस्थान में 140 रुपये, ओडिशा में 185 रुपये और तमिलनाडु में 125 रुपये हैं.
सेलेक्स का एलएमवी का शुल्क पश्चिम बंगाल में 441 रुपये, राजस्थान में 300, ओड़िशा में 350 और तमिलनाडु में 279 रुपये है. एचएमवी के शुल्क में भी ऐसा ही देखने को मिलता है. कुल मिलाकर सेलेक्स पश्चिम बंगाल में रजिस्ट्रेशन प्लेट के लिए औसत शुल्क 350 रुपये लेती है, जबकि राजस्थान में औसत शुल्क 145 रुपये, ओड़िशा में 198.9 रुपये और तमिलनाडु में 135 रुपये है.
उत्सव का शुल्क भी देखा जाये तो यही रुख देखने को मिलता है. पश्चिम बंगाल में उसका औसत शुल्क 350 रुपये है. जबकि हरियाणा में उसका औसत शुल्क 104 रुपये, हिमाचल में 190 रुपये, दिल्ली में 119.43 रुपये, मध्य प्रदेश में 146 रुपये और बिहार में 150 रुपये है. दोनों कंपनियों को मिलाकर देखा जाये तो राज्य से करीब 220 करोड़ रुपये अधिक वसूले गये हैं.
वाममोर्चा काल में दिया गया था ठेका
ठेका वाममोर्चा के शासनकाल में दिया गया था, लेकिन तृणमूल सरकार के भी सात साल हो गये हैं. उसे इस लूट को बंद करना होगा, जहां अन्य राज्यों ने मोलभाव करके इस शुल्क को कम किया था वहीं बंगाल में ऐसा देखने को नहीं मिला.
राज्य का नाम बदलने के बाद लूट बढ़ेगी
अधीर ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही राज्य का नाम पश्चिम बंगाल से बदलकर बंगाल करने वाली है, तब नये रजिस्ट्रेशन प्लेट बनेंगे और यह लूट और बढ़ेगी. अन्य राज्यों ने अदालत जाकर इस शुल्क को कम कराया है लेकिन बंगाल ने ऐसा नहीं किया. वह राज्य सरकार से मांग करते हैं कि इस दिशा में वह कदम उठाये. उसपर भी बात नहीं बनती तो वह अदालत का रुख करेंगे.
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