जल निकासी में 50 फीसदी कटौती शुरू

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आसनसोल : दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के पंचेत और मैथन जलाशयों में जल की कमी के मद्देनजर दामोदर नदीं में छोड़े जानेवाले पानी में 50 फीसदी की कटौती शुरू कर दी गयी है. बुधवार को पंचेत जलाशय से 38 हेक्टोमीटर और मैथन जलाशय से 50 हेक्टोमीटर जल की निकासी की गयी. डीवीसी के आधिकारिक सूत्रों […]

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आसनसोल : दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के पंचेत और मैथन जलाशयों में जल की कमी के मद्देनजर दामोदर नदीं में छोड़े जानेवाले पानी में 50 फीसदी की कटौती शुरू कर दी गयी है.
बुधवार को पंचेत जलाशय से 38 हेक्टोमीटर और मैथन जलाशय से 50 हेक्टोमीटर जल की निकासी की गयी. डीवीसी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आगामी जून माह तक 50 फीसदी की कटौती जारी रहेगी. दामोदर नदी के जल का उपयोग करनेवाले सभी निजी व सरकारी संस्थानों को इसकी आधिकारिक सूचना दे दी गयी है तथा उन्हें अपने खर्चे में कटौती करने का आग्रह किया गया है. डीवीसी के इन जलाशयों की स्थापना क ेबाद से पहली बार यह अभूतपूर्व संकट बना है. इस स्थिति में आनेवाले महीनों में आसनसोल व दुर्गापुर जैसे शहरों में पानी का संकट गहरा सकता है. गर्मी के दिनों की स्थिति का अनुमान लगाना अभी काफी कठिन है.
आसनसोल नगर निगम सर्वाधिक प्रभावित
डीवीसी की इस जल कटौती की सर्वाधिक बुरी मार आसनसोल नगर निगम के आसनसोल, बर्नपुर व रेलपार के इलाकों में ङोलनी पड़ेगी. इनमें से कई इलाकों में पहले से ही जल संकट रहता रहा है. कई इलाकों में सर्दी के इस मौसम में भी जल संकट से परेशानी हो रही है.
पार्षद मेयर व उपमेयर से निदान के लिए गुहार लगा रहे हैं. आसनसोल शहर के जल संकट के निदान के लिए डिहिका वाटर प्रोजेक्ट तैयार किया गया है. करीब 90 करोड़ की लागत से बनी इस परियोजना को नगर निगम प्रशासन को सौंपा जा चुका है. इस परियोजना को लेकर नगर निगम व अड्डा प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है. इस परियोजना की मुख्य विशेषता है कि इसके लिए पानी की पंपिंग दामोदर नदी के जल स्तर से होनी है.
यानी नदी के बीच बने कुआं से जल की पंपिंग होगी. नदी में छोड़े जाने ेवाले पानी में कटौती किये जाने से नदी का जल स्तर काफी कम हो जायेगा. इस स्थिति में पानी की पंपिंग काफी प्रभावित होगी. गर्मी के दिनों में इस शहर के लिए कम से कम पांच एमजीएम पानी की आवश्यकता रोजाना होगी. इसकी व्यवस्था निगम प्रशासन के लिए मुख्य चुनौती होगी.
क्यों बनी यह स्थिति
डीवीसी के जनसंपर्क अधिकारी एन विजय कुमार ने बताया कि विविभन्न नदियों में जल स्तर के आकलन का जिम्मा केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) का है. उसी के आदेशानुसार विभिन्न नदियों पर बने जलाशयों से जल की निकासी की जाती है. दामोदर नदी पर बने पंचेत डैम तथा बराकर नदी पर स्थित मैथन डैम के जलाशयों की सफाई निर्माण के बाद से कभी हुयी ही नहीं है.
इसके बेसिन में पानी के साथ आनेवाली मिट्टी व पत्थरों का नियमित जमाव होने से इनकी धारक क्षमता काफी घट गयी है. यही कारण है कि कम बारिश होने पर भी जलाशयों का जल स्तर खतरे के निशान तक पहुंच जाता है तथा सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर जल निकासी करनी पड़ती है. इस वर्ष भी मानसून के दौरान यही स्थिति बनी. बारिश के बाद जल निकासी कर दी गयी. लेकिन बाद के दिनों में आशा के अनुरूप बारिश नहीं हुयी. इसके कारण जलाशयों में पानी जमा नहीं हो सका. नदी के निचले इलाकों में पेयजल, सिंचाई तथा औद्योगिक उपयोग के लिए आवश्यक मात्र में जल निकासी की बाध्यता होती है.
उन्होंने कहा कि बुधवार की सुबह पंचेत जलाशय में जल स्तर 121.25 मीटर और मैथन जलाशय में जल स्तर 139.88 मीटर पर आ गया है. निचले क्षेत्र में आवश्यक कार्य के लिए पंचेत जलाशय से 38 हेक्टोमीटर और मैथन जलाशय हेक्टोमीटर ही पानी प्रतिदिन छोड़ा जा रहा है. जो अब तक के इतिहास में सबसे कम पानी छोड़ने का नया रिकार्ड है.
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