दो थानेदार-संजय, अनन्या ने की मनमानी

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आसनसोल : आसनसोल साउथ थाना अंतर्गत कुमारपुर निवासी शुद्धदेव रविदास की शिकायत व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश के आलोक में पुलिस आयुक्त की जांच में आसनसोल साउथ थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी संजय चक्रवर्त्ती व आसनसोल साउथ थाना पीपी की प्रभारी अनन्या दे कर्त्तव्य निर्वाह्न् में मनमानी करने की दोषी पायी गयी हैं […]

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आसनसोल : आसनसोल साउथ थाना अंतर्गत कुमारपुर निवासी शुद्धदेव रविदास की शिकायत व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश के आलोक में पुलिस आयुक्त की जांच में आसनसोल साउथ थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी संजय चक्रवर्त्ती व आसनसोल साउथ थाना पीपी की प्रभारी अनन्या दे कर्त्तव्य निर्वाह्न् में मनमानी करने की दोषी पायी गयी हैं तथा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गयी है.
आयोग के भेजे अपने प्रतिवेदन में पुलिस आयुक्त ने इसकी पुष्टि की है. सबसे गंभीर तथ्य यह है कि साक्ष्य न रहने के बाद भी थानेदार श्री चक्रवर्त्ती ने जांच अधिकारी पर दबाब डाल कर आरोप पत्र में भादवि की धारा 326 व 385 का जिक्र कराया.
क्या है मामला
शिकायतकत्र्ता श्री रविदास ने कहा है कि उनका परिवार रियल स्टेट व जमीन क्रय-विक्रय के व्यवसाय से जुड़ा है तथा अनुसूचित जाति का है. कुमारपुर के टीलाबांध में उनकी पैतृक जमीन है.
जिस पर कुछ दबंग पुलिस से मिल कर कब्जा करना चाहते हैं. बीते आठ अप्रैल, 15 को उनकी जमीन पर प्रबोध मंडल के नेतृत्व में जेसीबी से कब्जा शुरू किया गया. विरोध करने पर जातिसूचक शब्द कर धमकी दी गयी तथा थाने में पांच लाख रुपये पहुंचाने का निर्देश दिया गया. एक सप्ताह बाद साउथ थाना पीपी पुलिस उनके घर आयी तथा उन्हें, उनके छोटे भाई मनोज व कर्मी जयंत बाउरी को पक ड़कर ले गयी. पीपी कार्यालय में थाना प्रभारी श्री चक्रवर्त्ती व पीपी प्रभारी सुश्री दे के समक्ष पेश किया गया.
उन्हें दोनों ने जातिसूचक शब्द कह अपमानित किया. राशि की मांग की. इंकार करने पर भादवि की धारा 341, 323, 325, 326, 307, 506, 34 तथा 25/27 आर्म्स एक्ट के तहत झूठे मुकदमे में गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान किया. साक्ष्य के अभाव में उन्हें कोर्ट ने जमानत दे दी.
इसके बाद पुलिस ने उनके सहयोगी सुरेश यादव,भाई विजय व विनय को भी एकाउंटर की धमकी दी. इन तीनों ने भी कोर्ट में सरेंडर कर जमानत ले ली. इसकी पृष्टभूमि में उनका कहनना है कि उनका भाई विजय लोहा का व्यवसाय करता है. बीते सात जनवरी को दोनों पुलिस अधिकारियों ने उसे बुलाकर उसके कागजात की जांच की थी तथा धमकी दी थी. इसकी शिकायत तत्कालीन पुलिस आयुक्त से करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुयी थी. इसके बाद उसने आयोग के समक्ष न्याय की गुहार लगायी.
आयोग ने शुरू की कार्रवाई
श्री रविदास की शिकायत मिलने के बाद आयोग के रिसर्च ऑफिसर ए भट्टाचार्या ने पुलिस आयुक्त को 28 जुलाई को पत्र लिखा तथा पत्र पावती के तीस दिनों के अंदर पूरे मामले के संबंध में अधिकृत जानकारी मांगी. लेकिन तय समयावधि में पुलिस कमीश्नरेट के स्तर से कोई प्रतिवेदन आयोग को नहीं मिला. इसके बाद आयोग ने क ड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस आयुक्त को पुन: पत्र लिखा तथा प्रतिवेदन भेजने का निर्देश दिया. इसके बाद 13 अक्तूबर को पुलिस आयुक्त ने आयोग को प्रतिवेदन भेजा.
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सर्किल इंस्पेक्टर सब्यसाची सेनगुप्ता ने की है तथा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल) ने उन्हें अग्रसारित किया है. जांच में मिले साक्ष्य के अनुसार सुश्री दे ने शिकायतकत्र्ता के गोदाम में छापेमारी की थी, लेकिन कोई जब्ती सूची उन्हें नहीं दी. जब इसकी शिकायत लेकर श्री रविदास थानेदार श्री चक्रवर्त्ती के पास वैध दस्तावेज लेकर गये तो उन्होंने उनके साथ र्दुव्‍यवहार किया. दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गयी है.
सीआई की रिपोर्ट में गंभीर आरोप
सीआई श्री सेनगुप्ता ने कहा है कि सात जनवरी को सुश्री दे ने दुर्गा ट्रेडर्स के गोदाम में छापेमारी की थी तथा कार्य बंद करने का निर्देश दिया था. उन्होंने विजय को दस्तावेज के साथ थानेदार श्री चक्रवर्त्ती से मिलने के कहा था.
विजय उस दिन थानेदार से मिला. लेकिन जब उन्होंने सात जनवरी की जनरल डायरी की जांच की तो उन्हें थाने में बुलाने की कोई नोटिस जारी करने या उनके दस्तावेजों की जांच करने की बात का कोई उल्लेख नहीं था. उन्होंने कहा कि प्रबोध मंडल की शिकायत पर आठ अप्रैल को विजय, सिद्धू, मनोज, विनोद (सभी भाई), नीनू बाउरी व सुरेश प्रसाद के खिलाफ भादवि की धारा 341, 323, 325, 326, 307, 506, 34 तथा 25/27 आर्म्स एक्ट ते तहत कांड संख्या 123/15 दर्ज है.
जांच अङिाधकारी अवर निरीक्षक देवव्रत घोष ने आरोपी मनोज, सिद्धू व जयंत उर्फ नुनू को गिरफ्तार किया है. जांच अधिकारी श्री घोष ने 30 अप्रैल को आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया है. सीआइ श्री सेनगुप्ता ने स्पष्ट लिखा है कि आरोपियों के खिलाफ भादवि की धारा 326 व 385 के लिए कोई साक्ष्य नहीं है. इसके बाद भी थानेदार श्री चक्रवर्त्ती के दबाब मं उन्होंने आरोप पत्र में इन धाराओं का जिक्र कर दिया है.
क्या कहा है पुलिस अधिकारियों ने
जांच रिपोर्ट के अनुसार भूमि संबंधित विवाद की भी जांच की गयी है. श्री सेनगुप्ता को पीपी प्रभारी सुश्री दे ने कहा है कि उन्होंने थानेदार श्री चक्रवर्त्ती के निर्देश पर दुर्गा ट्रेडर्स के गोदाम में छापेमारी की. उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने थानेदार के इस निर्देश की इंट्री न तो साउथ थाना और न साउथ थाना पीपी की जनरल डायरी में की. इसके साथ ही छापेमारी की भी इंट्री किसी डायरी में नहीं की है.
थाने के अवर निरीक्षक विश्वनाथ मजुमदार ने भी जांच में इसकी पुष्टि की है कि जिस समय थानेदार श्री चक्रवर्त्ती विजय के साथ र्दुव्‍यवहार कर रहे थे, उस समय उनके चिल्लाने की आवाज उन्होंने सुनी थी तथा उस समय सुश्री दे भी कक्ष में मौजूद थी. जांच में विजय ने यह भी कहा कि इसके पहले भी थानेदार श्री चक्रवर्त्ती जब लाइसेंस सेक्शन में पदास्थापित थे और उन्होंने जब गन लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था तो श्री चक्रवर्त्ती ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया था.
संतुष्ट नहीं है शिकायतकर्ता
शिकायतकत्र्ता श्री रविदास ने कहा कि पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट व उनकी अनुशंसा की सूचना उन्हें मिली है. आयोग के स्तर से उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है. लेकिन मौका मिलने पर वे आयोग के समक्ष इस मुद्दे को उठायेंगे. उन्होंने कहा कि सर्किल इंस्पेक्टर की रिपोर्ट में ही पुलिस अधिकारियों की मनमानी की पुष्टि होती है.
इनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए तथा इन्हें जनता से संबंधित किसी भी दायित्व से अलग रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त उनके व उनके परिजनों के खिलाफ दर्ज व कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र को वापस लेने की पहल ेकरें
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