आसनसोल : अपनों ने ही नहीं की वफा तो गैरों से सिला क्या?

Updated at : 15 Jan 2019 2:48 AM (IST)
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आसनसोल :  अपनों ने ही नहीं की वफा तो गैरों से सिला क्या?

आसनसोल : आसनसोल पुस्तक मेले में हिंदी की उपेक्षा के लिए सिर्फ आयोजक ही मुख्य दोषी नहीं है बल्कि हिंदी की रोजी-रोटी खाने तथा हिंदी साहित्य का परचम लहराने का दावा करनेवाले भी समान रूप से दोषी है. राज्य सहित पूरे विश्व में अधिकांश लेखकों की योजना होती है कि उनके पुस्तकों का विमोचन पुस्तक […]

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आसनसोल : आसनसोल पुस्तक मेले में हिंदी की उपेक्षा के लिए सिर्फ आयोजक ही मुख्य दोषी नहीं है बल्कि हिंदी की रोजी-रोटी खाने तथा हिंदी साहित्य का परचम लहराने का दावा करनेवाले भी समान रूप से दोषी है.
राज्य सहित पूरे विश्व में अधिकांश लेखकों की योजना होती है कि उनके पुस्तकों का विमोचन पुस्तक मेले में हो ताकि उसका सदुपयोग हो सके.
लेकिन हिंदी कथाकार डॉ रविशंकर सिंह की कहानी संग्रह के विमोचन तथा उनके जीवन पर पकिचर्चा मेले से दूर हिंदी भवन में रविवार को आयोजित हुआ. पुस्तकों व हिंदी साहित्य को पुस्तक मेले से अलग रख कर शिल्पांचल में क्या हिंदी साहित्य स्थापित हो सकती है, यह यक्ष प्रश्न है.
हिंदी गवेषक परिषद ने उषाग्राम स्थित हिंदी भवन में कवि, कथाकार, आलोचक सह पूर्व अध्यापक रविशंकर सिंह के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया. जिसमें उनकी पुस्तक ‘तुमको न भूल पाएंगे’ का लोकार्पण हुआ. इसमें स्थानीय, कोलकाता, झारखंड तथा बिहार के हिंदी शिक्षक व साहित्यकार शामिल हुए.
एक बार भी इस विषय पर ध्यान नहीं दिया कि पुस्तक का लोकार्पण मेला में करने से हिंदी का मान बढ़ता, पुस्तक की पब्लिसिटी भी ज्यादा होती और हिंदी की उपेक्षा करने वाले आयोजकों के लिए यह सबक होता कि शिल्पांचल में हिंदी की उपेक्षा कर कोई सफल कार्यक्रम नहीं हो सकता है.
हिंदी गवेषक परिषद के सचिव डॉ विजेन्द्र अवस्थी ने इसकी जिम्मेदारी पुस्तक के लेखक पर डाल दी. जबकि लेखक श्री सिंह ने अपनी गलती मान क्षमा याचना कर ली.
गवेषक परिषद के सचिव डॉ अवस्थी ने कहा कि शिल्पांचल में गवेषक परिषद के अलावा भी हिंदी भाषा के विकास को लेकर कार्य करने वाली अनेकों संगठन है. जिम्मेदारी उनपर भी है . पुस्तक मेला के बजाय गवेषक परिषद के कार्यक्रम में नई पुस्तक का विमोचन करने का निर्णय लेखक का निर्णय था. परिषद ने उन्हें सिर्फ मंच दिया.
उन्होंने अपना पल्ला यह कह कर झाड़ लिया कि उनकी संस्था ही हिंदी का परचम लहरानेवाली इकलौती नहीं है. पुस्तक के लेखक श्री सिंह ने कहा कि यह बहुत बड़ी गलती है. जिससे वे आहत हैं. यह अक्षम्य अपराध है. कार्यक्रम सम्मान का था.
कुछ मित्र और छात्रों ने इसी कार्यक्रम में पुस्तक के विमोचन की गुजारिश की और पुस्तक का लोकार्पण किया गया. पुस्तक मेला आयोजन कमेटी द्वारा मेला में हिंदी की उपेक्षा के लिए उन्होंने अपनी जिम्मेदारी कबूल की. उन्होंने कहा कि इस गलती का सुधार किया जायेगा.
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