गांगुली के इस्तीफे से सोमनाथ चटर्जी दुखी,तृणमूल ने किया स्वागत

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कोलकाता : लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने आज कहा कि एक विधि इंटर्न के यौन उत्पीड़न के आरोपी न्यायमूर्ति ए के गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से ‘‘बिना सबूत या जांच के’’ इस्तीफा देना पड़ा. चटर्जी ने कहा, ‘‘ उन्हें बिना किसी सबूत या मामले में जांच के बगैर […]

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कोलकाता : लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने आज कहा कि एक विधि इंटर्न के यौन उत्पीड़न के आरोपी न्यायमूर्ति ए के गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से ‘‘बिना सबूत या जांच के’’ इस्तीफा देना पड़ा. चटर्जी ने कहा, ‘‘ उन्हें बिना किसी सबूत या मामले में जांच के बगैर इस्तीफा देना पड़ा.’’ उन्होंने कहा कि वह उस घटनाक्रम से दुखी हैं जिससे न्यायमूर्ति गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा.

चटर्जी ने कहा, ‘‘ अपने कानूनी तंत्र में जब तक किसी को दोषी नहीं ठहराया दिया जाता, वह निदरेष होता है. लेकिन इस मामले में उन्हें अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया गया.’’ उन्होंने कहा कि इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया. उन्होंने कहा, ‘‘ उच्चतम न्यायालय की जांच असंवैधानिक थी और उन्होंने खुद ही स्वीकार किया था कि उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है.’’ चटर्जी ने कहा, ‘‘ वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश थे और उन पर किसी को संदेह नहीं था.’’ उधर सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व न्यायाधीश के इस्तीफे का स्वागत किया है.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि न्यायमूर्ति गांगुली ने इस्तीफा देकर अपनी प्रतिष्ठा और गिरने से बचा ली है. उन्होंने कहा, ‘‘ हम इस फैसले से खुश हैं. उन्हें पहले ही ऐसा करना चाहिए था. फिर भी हम इसका स्वागत करते हैं क्योंकि आरोपों के बाद उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं था.’’ मशहूर वकील बिकास रंजन भट्टाचार्य ने इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यौन उत्पीड़न के मुख्य मुद्दे को दरकिनार कर दिया गया. उन्होंने कहा, ‘‘ उन पर इस्तीफे के लिए काफी दबाव था और अब घटना पर से जोर हट गया है. सच्चाई जो भी हो, उसकी जांच होनी चाहिए.’’

आल इंडिया लीगल एड फोरम के सचिव जयदीप मुखर्जी ने दावा किया कि इस्तीफा नैतिक विजय है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुयी है. हमने हमेशा मांग की है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही उन्हें दोषी बताया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ दिल्ली पुलिस को स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए और उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए.’’सामाजिक कार्यकर्ता सुजातो भद्र ने कहा कि गांगुली को पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था.

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