प्रेसिडेंसी जैसे संस्थानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत
कोलकाता: छात्रों व नयी पीढ़ियों की भलाई व वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान करने के लिए देश में प्रेसिडेंसी जैसे और विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की जरूरत है. ताकि उन्हें उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेशों में नहीं जाना पड़े. ये बातें राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री रवि रंजन चट्टोपाध्याय ने शनिवार को […]
कोलकाता: छात्रों व नयी पीढ़ियों की भलाई व वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान करने के लिए देश में प्रेसिडेंसी जैसे और विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की जरूरत है. ताकि उन्हें उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेशों में नहीं जाना पड़े. ये बातें राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री रवि रंजन चट्टोपाध्याय ने शनिवार को बंगाल नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से आयोजित एक परिचर्चा ‘हार्नेसिंग रिसर्च पोटेंशियल इन हायर एजुकेशन’ के मौके पर कहीं. उन्होंने प्श्चिम बंगाल को आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता बताते हुए कहा कि आर्थिक समस्याओं व पाठ्यक्रम के कारण तकनीकी क्षेत्र में पिछड़ रहा है.
तक नीकी शिक्षा मंत्री ने राज्य के शिक्षण सस्थानों/विश्वविद्यालयों में फैल रही अराजकता व आपराधिक घटनाओं व शिक्षा जगत में राजनीति के लिए वाम सरकार को जिम्मेदार ठहराया. कहा इसे दूर करने में समय लगेगा जिसके लिए सरकार प्रयासरत है.
परिचर्चा को संबोधित करते हुए आइआइटी कानपुर के निदेशक इंद्रनील मन्ना ने देश में विज्ञान के शोध कार्यो के लिए आगे आनेवाले छात्रों की कम संख्या पर चिंता जतायी. गौरतलब है कि भारत से जहां तकनीकी क्षेत्र में पीएचडी के लिए मात्र एक हजार से दो हजार आवेदन प्रति वर्ष आते हैं. अमेरिका में यह संख्या आठ-नौ व चीन में 16 हजार है. श्री मन्ना ने भारतीय छात्रों के शोध कार्यो के लिए आगे आने के लिए आइआइटी जैसे संस्थानों एक साथ मिल कर काम करने की जरूरत पर जोर दिया.
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