अर्धसैनिक बलों को भी जमीन मुहैया कराने में नाकाम रही राज्य सरकार, बीएसएफ की कई परियोजनाएं रुकीं

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कदमतला/कोलकाता: राज्य सरकार की ढुलमुल जमीन नीति का असर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. जमीन उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण अब तक सिर्फ औद्योगिक इकाइयों पर ही इसका प्रभाव पड़ रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति विकराल होने लगी है. देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक परियोजनओं का काम […]

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कदमतला/कोलकाता: राज्य सरकार की ढुलमुल जमीन नीति का असर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. जमीन उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण अब तक सिर्फ औद्योगिक इकाइयों पर ही इसका प्रभाव पड़ रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति विकराल होने लगी है.

देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक परियोजनओं का काम जमीन की कमी के कारण रुक गया है. इन परियोजनओं के लिए आवश्यक जमीन ही राज्य सरकार उपलब्ध नहीं करा पा रही है.

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की कई परियोजनाओं पर काम रुक गया है. इनमें उत्तर बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटा तार की घेराबंदी भी शामिल है. सूत्रों ने बताया है कि बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कांटा तार की घेराबंदी के लिए राज्य सरकार के पीडब्लयूडी विभाग को कई बार जमीन उपलब्ध कराने की बात कही, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ है. उत्तर बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब 15 स्थानों पर कांटा तार की घेराबंदी का काम बंद है. कांटा तार की घेराबंदी दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से ही दी जा सकती है. भारतीय सीमा क्षेत्र में घेराबंदी करने के लिए बांग्लादेश के बांग्लादेश बोर्डर गार्ड (बीबीजी) की मंजूरी जरूरी है.

बीबीजी ने इसके लिए आवश्यक मंजूरी भी दे दी है, लेकिन राज्य सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा आवश्यक जमीन का अधिग्रहण नहीं करने के कारण काम रुका हुआ है. कांटा तार की यह घेराबंदी बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकने के लिए बेहद जरूरी है. सामरिक दृष्टिकोण से इतने महत्वपूर्ण परियोजना के प्रति राज्य सरकार की इस उदासीनता को देखकर बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी चिंतित हैं. विभिन्न परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी का सामना बीएसएफ को पूरे उत्तर बंगाल में करना पड़ रहा है.

जमीन की कमी के कारण कई परियोजनाओं को बिहार के किशनगंज स्थानांतरित किया जा रहा है. सूत्रों ने आगे बताया कि दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट में बीएसएफ ने यूनिट हेड क्वार्टर बनाने के लिए राज्य सरकार से जमीन मुहैया कराने की मांग की गयी थी. इसके लिए 70 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी. लगातार कोशिशों के बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाये जाने के बाद इस परियोजना को बिहार में किशनगंज के हल्लामला स्थानांतरित कर दिया गया. इसके अलावा उत्तर दिनाजपुर जिले के इसलामपुर तथा कूचबिहार जिले के मेखलीगंज में भी यूनिट हेडक्वार्टर बनाने की योजना बीएसएफ की है. इसके लिए भी जमीन उपलब्ध कराने की मांग राज्य सरकार से की गयी है. करीब डेढ़ साल पहले राज्य पीडब्ल्यूडी विभाग को बीएसएफ ने एक चिट्ठी देकर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है. बीएसएफ के अधिकारियों ने इसको लेकर समय-समय पर पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत भी की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ है. इतना ही नहीं, उत्तर बंगाल में विभिन्न स्थानों पर भारत-बांग्लादेश सीमा पर बोर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) बनाने का काम भी रुका हुआ है. बीएसएफ को सीमा पर करीब 50 बीओपी बनाने हैं और इसके लिए जमीन की आवश्यकता है. राज्य के गृह मंत्रलय ने उत्तर बंगाल में विभिन्न स्थानों पर बीएसएफ के इन तमाम परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है और इसके लिए आवश्यक धन भी आवंटित कर दिये गये हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीन नहीं मिलने के कारण अब तक इन परियोजनाओं पर काम ही शुरू नहीं हो सका है.

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