पंचायत चुनाव के लिए तृणमूल की व्यूह रचना

Updated at :21 Oct 2017 4:20 AM
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पंचायत चुनाव के लिए तृणमूल की व्यूह रचना

लेबू बाबू की पत्नी को मैदान में लाने की तैयारी हर हाल में जिला परिषद पर कब्जे का लक्ष्य कोतवाली भवन में सेंध लगाने की योजना कांग्रेस ने भी झोंकी पूरी ताकत, प्रचार शुरू मालदा : पंचायत चुनाव नजदीक है और तृणमूल कांग्रेस किसी कीमत पर मालदा जिला परिषद पर अपने कब्जा बनाये रखना चाहती […]

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लेबू बाबू की पत्नी को मैदान में लाने की तैयारी

हर हाल में जिला परिषद पर कब्जे का लक्ष्य
कोतवाली भवन में सेंध लगाने की योजना
कांग्रेस ने भी झोंकी पूरी ताकत, प्रचार शुरू
मालदा : पंचायत चुनाव नजदीक है और तृणमूल कांग्रेस किसी कीमत पर मालदा जिला परिषद पर अपने कब्जा बनाये रखना चाहती है. जैसा कि अनुमान है, पंचायत चुनाव कांग्रेस तथा वाम मोर्चा मिलकर लड़ेंगे. इनसे मुकाबला करने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने अपने सभी नेताओं को एक होकर चुनाव मैदान में झोंकने की तैयारी कर ली है. चुनाव मैदान में जहां पुराने नेताओं को मौका मिलेगा, वहीं कुछ नये चेहरे भी मैदान में उतारे जायेंगे. मालदा जिला कांग्रेस पर अब भी गनीखान चौधरी की छाप है. स्वर्गीय गनीखान के आवास कोतवाली भवन से ही जिला कांग्रेस का संचालन होता है. तृणमूल को पता है कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस से ही कड़ी चुनौती मिलेगी. ऐसे में जरूरी है कि कोतवाली भवन के अंदर ही फूट पैदा कर दी जाये.
गनीखान चौधरी के भाई तथा पूर्व मंत्री अबू नासेर खान चौधरी उर्फ लेबू पहले से ही तृणमूल के खेमे में हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भरोसा भी जीत लिया है. ममता बनर्जी ने उन्हें जिला तृणमूल का चेयरमैन बना दिया है. अब तृणमूल की निगाहें उनकी पत्नी तंद्रा चौधरी पर टिकी हुई है. जिला परिषद के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस तंद्रा चौधरी को मैदान में उतारना चाहती हैं. हालांकि इसको लेकर तृणमूल के कोई नेता कुछ भी कहना नहीं चाहते. लेकिन यह स्पष्ट है कि यदि तंद्रा चौधरी तृणमूल के टिकट पर चुनाव लड़ती हैं तो न केवल कोतवाली भवन बल्कि जिला कांग्रेस में भी खलबली मच जायेगी.
इसको लेकर ऐसे तंद्रा चौधरी कुछ भी कहना नहीं चाहती. उनसे जब फोन पर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वह भाई फोटा त्योहार में अपने मायके आयी हुई हैं. वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस पर फैसला उनके पति अबू नासेर खान चौधरी करेंगे. उन्हीं के निर्णय पर उनके चुनावी भविष्य का फैसला होगा.
उल्लेखनीय है कि मालदा में कांग्रेस का अपना एक बड़ा वोट बैंक हैं. स्वर्गीय कांग्रेस नेता गनीखान चौधरी का जादू अभी भी मालदा जिले में कायम है. कांग्रेस उन्हीं के नाम पर चुनाव लड़ती है और जीतती भी है. इस बार भी कांग्रेस गनीखान के नाम के साथ-साथ वाम मोर्चा को साथ लेकर मालदा जिला परिषद पर वापस अपना कब्जा करना चाहती है. जिला कांग्रेस अध्यक्ष मौसम नूर ने भी पंचायत चुनाव में जीत के लिए अभी से अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. वह विभिन्न गांवों में भी चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़ी हैं. वह जहां भी जाती हैं, गनीखान चौधरी का नाम जरूर लेती हैं.
दूसरी ओर मौसम नूर को चुनौती देने के लिए तृणमूल ने भी अपना घर सजाना शुरू कर दिया है. गनीखान के भाई आबू नासेर के साथ-साथ उनकी पत्नी तंद्रा चौधरी पर भी दांव लगाना चाहती है. इसके साथ ही कभी कोतवाली परिवार के निकट रही तथा पूर्व मंत्री सावित्री मित्रा को भी जिला परिषद के चुनाव में मैदान में उतारा जा सकता है. इस मामले में जब नासेर खान से बातचीत करने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका. सावित्री मित्रा ने भी कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष मोअज्जम हुसैन भी पंचायत चुनाव को लेकर कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि पार्टी पंचायत चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है. अभी सीटों की आरक्षण पर निगाहें टिकी हुई हैं. एक बार आरक्षित सीटों की सूची प्रकाशित होते ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी जायेगी.
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