UP Panchayat Chunav 2026: यूपी पंचायत चुनाव पर फिर लटक सकता है इंतजार! 25 जिलों में पिछड़ा वर्ग सर्वे बाकी, आरक्षण रिपोर्ट में देरी के संकेत

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यूपी पंचायत चुनाव (AI)

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UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव 2026 पर अनिश्चितता. पिछड़ा वर्ग आयोग के सर्वे में 25 जिलों का काम बाकी, जिससे आरक्षण रिपोर्ट में देरी हो रही है. जानिए चुनाव की स्थिति.

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UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी के बीच पिछड़ा वर्ग आयोग के सर्वे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. आयोग 20 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की स्थिति में नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 75 जिलों में से अब तक 50 जिलों का ही सर्वे और भ्रमण पूरा हो सका है, जबकि 25 जिलों में सर्वे और जनसुनवाई का काम बाकी है. ऐसे में आयोग की रिपोर्ट में देरी की आशंका जताई जा रही है. सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि आयोग कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है.

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75 में से 50 जिलों का सर्वे पूरा, 25 में काम बाकी

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग के आरक्षण का आधार तैयार करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग जिलों में सर्वे और जनसुनवाई कर रहा है. आयोग को अलग-अलग जिलों से आंकड़े जुटाने और उनका परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 75 में से 50 जिलों का भ्रमण पूरा हुआ है. शेष 25 जिलों में सर्वे और जनसुनवाई की प्रक्रिया बाकी है. आंकड़ों के संकलन और उनकी जांच में लगने वाले समय के कारण 20 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपना मुश्किल माना जा रहा है.

आयोग मांग सकता है तीन महीने का अतिरिक्त समय

आयोग से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग सरकार से कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है. मौजूदा स्थिति में 31 दिसंबर से पहले रिपोर्ट सौंप पाना भी मुश्किल बताया जा रहा है. हालांकि, अतिरिक्त समय देने का अंतिम फैसला सरकार को करना होगा. आयोग की ओर से औपचारिक रूप से समय विस्तार की मांग और सरकार के फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.

हाईकोर्ट की तीन महीने की समयसीमा पर क्या होगा असर?

पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया था. इस समयसीमा के बीच आयोग की रिपोर्ट में देरी चुनाव की तैयारियों के सामने प्रशासनिक और कानूनी चुनौती खड़ी कर सकती है. हालांकि, आयोग की रिपोर्ट में देरी होने से हाईकोर्ट की समयसीमा अपने आप समाप्त या स्थगित नहीं हो जाती. इसके लिए अदालत के आदेश और सरकार की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी.

आरक्षण तय होने के बाद आगे क्या होगा?

पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार को उसकी सिफारिशों पर विचार करना होगा. इसके बाद पंचायतों में आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और चुनाव की अन्य तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा. चुनाव कार्यक्रम घोषित करने और मतदान कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की होगी.

यूपी पंचायत चुनाव कब होंगे?

फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. एक तरफ हाईकोर्ट का तीन महीने में चुनाव कराने का निर्देश है, दूसरी तरफ पिछड़ा वर्ग आयोग के सर्वे और रिपोर्ट में देरी की खबर सामने आ रही है. ऐसे में अब सबकी नजर आयोग की रिपोर्ट, सरकार के फैसले और राज्य निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी है.

यानी यूपी पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है. आयोग की रिपोर्ट समय पर आती है या अतिरिक्त समय मांगता है, इसी से आगे की प्रक्रिया की दिशा तय होने में अहम भूमिका होगी.

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