UP की सियासत का वो ऐतिहासिक अध्याय, जब सुचेता कृपलानी बनीं पहली महिला CM, ‘अदम्य शक्ति’ से बदली इतिहास की दिशा
यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी (फाइल फोटो)
जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है, सुचेता कृपलानी की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में सामने आती है. उन्होंने करीब छह दशक पहले भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा था.
UP Election: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. राज्य की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म होगा और चुनाव समय पर फरवरी-मार्च 2027 में कराए जाने की बात कही गई है. ऐसे चुनावी माहौल में यूपी की राजनीतिक विरासत और महिला नेतृत्व के इतिहास को याद करना भी जरूरी है. इसी इतिहास में एक नाम सुचेता कृपलानी का है, जिन्होंने करीब छह दशक पहले देश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा अध्याय लिखा था, जिसकी शुरुआत आज भी उनके नाम से होती है.
यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री
2 अक्टूबर 1963 को सुचेता कृपलानी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसके साथ ही वह न सिर्फ यूपी, बल्कि भारत के किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. उन्होंने 13 मार्च 1967 तक प्रदेश की कमान संभाली. उस दौर में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज की तुलना में काफी सीमित थी. ऐसे समय में देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक की सत्ता संभालना अपने आप में ऐतिहासिक घटना थी.
आजादी की लड़ाई से सत्ता तक
सुचेता कृपलानी का राजनीतिक सफर मुख्यमंत्री पद से शुरू नहीं हुआ था. वह स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहीं और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भूमिगत रहकर आंदोलन की गतिविधियों में शामिल हुईं. वह संविधान सभा की सदस्य भी थीं. आजादी के बाद उन्होंने संसद और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई. 1960 से 1963 के बीच वह उत्तर प्रदेश सरकार में श्रम, सामुदायिक विकास और उद्योग मंत्री भी रहीं.
62 दिन की हड़ताल, फिर भी नहीं झुकीं
मुख्यमंत्री के रूप में सुचेता कृपलानी का कार्यकाल उनके दृढ़ प्रशासन के लिए भी जाना जाता है. उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 62 दिन तक हड़ताल की थी. सुचेता कृपलानी ने कर्मचारियों की वेतन बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की और प्रशासनिक फैसले पर कायम रहीं. अंततः समझौते के बाद हड़ताल समाप्त हुई. यह घटना उनके कार्यकाल की सबसे चर्चित घटनाओं में गिनी जाती है.
2027 के चुनाव में क्यों याद आएगा यह इतिहास?
आज जब यूपी एक बार फिर विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है, सुचेता कृपलानी की कहानी प्रदेश की राजनीतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. 2027 का चुनाव महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, नेतृत्व और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भी चर्चा का मौका देगा. सुचेता कृपलानी का करीब 60 साल पुराना रिकॉर्ड यह बताता है कि उत्तर प्रदेश में महिला नेतृत्व कोई नया विचार नहीं है. उन्होंने उस समय मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी, जब देश की राजनीति में महिलाओं के लिए ऐसे शीर्ष पद तक पहुंचना बेहद असाधारण माना जाता था.
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