बरसात के मौसम में क्यों फटने लगते हैं नींबू? शाहजहांपुर के अधिकारी से जानिए कारण और बचाव के आसान उपाय
बरसात में नींबू की फसल का रखें खास ख्याल
बरसात के मौसम में नींबू के फलों का फटना एक आम समस्या है, जिसका मुख्य कारण मिट्टी में नमी का असंतुलन और पोषक तत्वों की कमी है. इस लेख में हम जानेंगे कि क्यों फटते हैं नींबू के फल और बचाव के कुछ आसान उपाय, जिनसे किसान और गार्डेनर अपने फलों को सुरक्षित रख सकते हैं.
UP Farming Tips : बरसात के मौसम में नींबू के फलों के फटने की समस्या आम हो जाती है. अचानक बारिश, मिट्टी में नमी का असंतुलन और पोषक तत्वों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं. सही समय पर पौधे की देखभाल और कुछ आसान उपाय अपनाकर किसान व गार्डेनर नींबू के फलों को फटने से बचा सकते हैं.
अचानक बढ़ती नमी से फटता है फल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शाहजहांपुर के जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने कहा की बारिश के दौरान मिट्टी में नमी अचानक बढ़ जाती है. कई बार लंबे समय तक मिट्टी सूखी रहने के बाद पौधा अचानक अधिक पानी सोखने लगता है. इससे नींबू के अंदर का गूदा तेजी से फैलता है, जबकि उसका छिलका उसी गति से नहीं बढ़ पाता. ऐसे में फल बीच से फटने लगता है. इस समस्या से बचने के लिए पौधे के आसपास बारिश के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करना जरूरी है. जड़ों के पास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए.
कैल्शियम और बोरॉन की कमी भी वजह
नींबू के फल फटने का एक बड़ा कारण कैल्शियम और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी है. कैल्शियम फल के छिलके को मजबूती देने में मदद करता है, जबकि बोरॉन छिलके की संरचना को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बरसात में मिट्टी से पोषक तत्व बह सकते हैं. इसलिए मानसून की शुरुआत में मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करना लाभदायक रहता है.
जड़ों में पानी जमा न होने दें
बरसात के दिनों में नींबू के पौधे के आसपास जलजमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. जड़ों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधे की जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिलती और पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है. पौधे के तने के आसपास मिट्टी को थोड़ा ऊंचा रखें और पानी की निकासी के लिए उचित नाली बनाएं, ताकि बारिश का पानी जड़ों के पास रुके नहीं.
ये 5 उपाय अपनाकर बचाएं नींबू
- पौधे की हल्की छंटाई करें
बरसात के दौरान सूखी, बीमार और बहुत घनी टहनियों की छंटाई करें. इससे पौधे के अंदर हवा और धूप आसानी से पहुंचती है. अत्यधिक नमी कम होने से फंगस और अन्य बीमारियों का खतरा भी घटता है.
- जैविक खाद का इस्तेमाल करें
बरसात में रासायनिक उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें. सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है. हालांकि किसी भी पोषक तत्व की कमी होने पर मात्रा कृषि विशेषज्ञ या मिट्टी जांच के आधार पर तय करना बेहतर है.
- मल्चिंग करें
मिट्टी में नमी के अचानक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए मल्चिंग प्रभावी उपाय है. पौधे के आसपास सूखी घास, पुआल या सूखे पत्तों की परत बिछाई जा सकती है. इससे बारिश का सीधा असर मिट्टी पर कम होता है और नमी अपेक्षाकृत स्थिर बनी रहती है. ध्यान रखें कि मल्च को पौधे के तने से थोड़ा दूर रखें, ताकि तने के आसपास लगातार नमी जमा न हो.
- कीट और रोगों पर नजर रखें
बरसात में अधिक नमी के कारण फंगस और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है. इससे फलों की बाहरी सतह को नुकसान पहुंच सकता है और छिलका कमजोर हो सकता है. पौधे का नियमित निरीक्षण करें. नीम तेल या किसी अन्य जैविक/रासायनिक उपचार का इस्तेमाल स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल निर्देशों के अनुसार करें.
- तैयार फल की समय पर तुड़ाई करें
जो नींबू पकने या तुड़ाई के लिए तैयार हो चुके हैं, उन्हें लंबे समय तक पौधे पर न छोड़ें. बारिश के दौरान अधिक पानी मिलने से तैयार फल के फटने की आशंका बढ़ सकती है. इसलिए उचित अवस्था में फलों की तुड़ाई कर लेना बेहतर है.
नियमित निगरानी है सबसे जरूरी
बरसात में नींबू के पौधों की नियमित निगरानी करते रहें. मिट्टी में जलजमाव, पत्तियों या फलों पर बीमारी के लक्षण और फलों में दरार दिखाई देने पर समय रहते उपाय करें. पानी की उचित निकासी, संतुलित पोषण, हल्की छंटाई, मल्चिंग और समय पर तुड़ाई जैसे उपाय अपनाकर नींबू के फलों को फटने की समस्या से काफी हद तक बचाया जा सकता है.
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