बलिया की रागिनी को ट्राईसाइकिल मिली, घर तक सड़क और आवास का भरोसा भी, लेकिन मां अब भी 4 लाख की कर्जदार
रागिनी को ट्राईसाइकिल देते DM
Ragini Viral Video: बलिया की रागिनी, जिसका जीवन एक हादसे ने बदल दिया था, अब ट्राईसाइकिल के सहारे स्कूल जाएगी. उसे पक्की सड़क और पीएम आवास का भी भरोसा मिला है. यह उम्मीदें उसकी मां के चार लाख रुपये के कर्ज के बीच नई आशा जगाती हैं.
Ragini Viral Video: बलिया की रागिनी अब पहले की तरह सड़क पर गिरते-पड़ते स्कूल नहीं जाएगी. उसे ट्राईसाइकिल मिल गई है, घर तक सड़क बनाने का भरोसा मिला है और पीएम आवास भी मिलेगा. लेकिन इन खुशियों के बीच उसकी मां की आंखों में एक ऐसा दर्द है, जिसे कोई सरकारी मदद अभी मिटा नहीं पाई है. बेटी को अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश में मां ने अपने गहने बेच दिए, एक लाख रुपये स्वयं सहायता समूह से कर्ज लिया और गांव के लोगों से भी उधार लिया. आज भी करीब चार लाख रुपये का कर्ज उसके सिर पर है.
हादसे ने छीन लिया पैर, लेकिन पढ़ने का हौसला नहीं
रागिनी बलिया की रहने वाली मासूम बच्ची है. करीब छह साल पहले स्कूल जाते समय हादसे में उसका बायां पैर बुरी तरह प्रभावित हो गया. वह बाइक की चपेट में आ गई थी. इसके बाद उसकी जिंदगी बदल गई. चलना-फिरना मुश्किल हो गया, लेकिन पढ़ने की चाहत नहीं छूटी. वह स्कूल जाती रही. रास्ते में कई बार गिरती थी, फिर उठती थी और किसी तरह आगे बढ़ती थी. रोज का सफर उसके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसके लिए बेहतर इलाज और सुविधाओं का इंतजाम किया जा सके.
इलाज के लिए मां ने बेच दिए गहने
रागिनी की मां ने बेटी को ठीक कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. कभी बनारस तो कभी मऊ के अस्पतालों और सेंटरों के चक्कर लगाए. मऊ में डॉक्टर अरुण गुप्ता से भी इलाज कराया गया. डॉक्टरों ने ठीक होने की उम्मीद जताई, लेकिन इलाज के बावजूद रागिनी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी. इलाज का खर्च बढ़ता गया और मां की मजबूरी भी. बेटी के इलाज के लिए उसने अपने गहने बेच दिए. स्वयं सहायता समूह से एक लाख रुपये का कर्ज लिया. इसके अलावा गांव के लोगों से भी उधार लिया. अब करीब चार लाख रुपये अभी भी चुकाना बाकी हैं.
रागिनी को सहारा मिला, लेकिन मां का कर्ज बाकी
रागिनी की कहानी सामने आने के बाद बलिया के DM मंगला प्रसाद सिंह तक उसकी आवाज पहुंची. अब उसकी मुश्किलें कुछ कम हुई हैं. उसे ट्राईसाइकिल मिली है, जिससे उसके लिए स्कूल और बाहर आना-जाना आसान होगा. घर तक सड़क बनवाने की बात कही गई है. परिवार को पीएम आवास देने का भी भरोसा मिला है. सिकंदरपुर से संजय सिंह रागिनी के लिए ट्राईसाइकिल लेकर पहुंचे. जिस बच्ची ने वर्षों तक दूसरों के सहारे रास्ता तय किया, उसके लिए यह ट्राईसाइकिल सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर आगे बढ़ने की नई उम्मीद है.
बेटी के लिए कर्ज में डूब गई मां
रागिनी के परिवार में वह इकलौती बच्ची है. पिता रोजी-रोटी के लिए परदेश में रहते हैं. बेटी की जरूरतों और इलाज के खर्च ने परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है. रागिनी को स्कूल पहुंचाने में कभी बाबा तो कभी परिवार के दूसरे लोग मदद करते हैं. रागिनी अब ट्राईसाइकिल के सहारे आगे बढ़ेगी. उसे सड़क और घर मिलने की उम्मीद भी है. मगर उसकी मां के लिए एक और लंबी लड़ाई बाकी है. चार लाख रुपये का वह कर्ज, जो उसने बेटी के इलाज के लिए लिया था. रागिनी के चेहरे पर शायद अब मुस्कान लौट रही है, लेकिन मां के माथे की चिंता की लकीरें अभी बाकी हैं. बेटी को चलने का सहारा मिल गया, मगर उसे बचाने के लिए मां ने जिस कर्ज का बोझ उठाया है, उससे निकलने का रास्ता अभी तलाशना बाकी है.
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