ऑपरेशन सिंदूर के हीरो बने राम मंदिर के पहले CEO, जानिए क्यों चुने गये जितेंद्र मिश्र
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का शानदार सफर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया है. भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जितेंद्र मिश्र को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनके सैन्य अनुभव और उत्तर प्रदेश से जुड़ाव ने चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
Ram Mandir CEO : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया है. इस अहम जिम्मेदारी के लिए भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जितेंद्र मिश्र को चुना गया है. मिश्र वही अधिकारी हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी. सैन्य सेवा के दौरान उनके नेतृत्व और कार्य के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है. वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें राम मंदिर के बढ़ते प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपे जाने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, उनका चयन केवल ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के आधार पर नहीं हुआ. करीब चार दशक का सैन्य अनुभव, साफ-सुथरी पेशेवर छवि और उत्तर प्रदेश से जुड़ाव भी उनके पक्ष में गया.
16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद तीन नामों का पैनल
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए शुरुआती दौर में जितेंद्र मिश्र का नाम प्रमुख दावेदारों में नहीं था. इस पद के लिए पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्र, पूर्व IPS राजेश पांडेय, बिहार कैडर के IPS डॉ. परेश सक्सेना और IAS दिनेश सिंह समेत कई नामों की चर्चा हुई थी. इसके बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी. कुल 16 लोगों का इंटरव्यू लिया गया. इंटरव्यू के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया, जिसमें जितेंद्र मिश्र भी शामिल थे. अंत में ट्रस्ट ने उनके नाम पर मुहर लगाते हुए उन्हें राम मंदिर का पहला CEO नियुक्त किया.
ऑपरेशन सिंदूर ने बनाई मजबूत पहचान
जितेंद्र मिश्र के चयन की सबसे अहम वजहों में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका को माना जा रहा है. भारत की ओर से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर की गयी कार्रवाई के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर वायुसेना की अहम जिम्मेदारी उनके नेतृत्व में थी. 13 मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे थे, तब जितेंद्र मिश्र ने उनका स्वागत किया था. ऑपरेशन के दौरान उनकी भूमिका और नेतृत्व की काफी चर्चा हुई थी. उनके सैन्य कार्य को देखते हुए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया. ऐसे में रिटायरमेंट के कुछ ही समय बाद उन्हें राम मंदिर जैसी महत्वपूर्ण संस्था की प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलना खास माना जा रहा है.
करीब चार दशक का सैन्य अनुभव आया काम
जितेंद्र मिश्र ने करीब 39 साल भारतीय वायुसेना में सेवा दी. इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और बड़े स्तर पर कमान का अनुभव हासिल किया. राम मंदिर अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रह गया है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, रखरखाव और आने वाले बड़े प्रोजेक्ट का दायरा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में ट्रस्ट को ऐसे अधिकारी की जरूरत थी, जिसे बड़े संगठन को संभालने, विभिन्न टीमों के साथ काम करने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने का अनुभव हो. सैन्य सेवा में हासिल यही अनुभव CEO की जिम्मेदारी में उपयोगी साबित हो सकता है.
उत्तर प्रदेश से भी है गहरा जुड़ाव
जितेंद्र मिश्र का संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया से है. राम मंदिर अयोध्या में स्थित है और ट्रस्ट की तमाम प्रशासनिक गतिविधियां उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं. ऐसे में प्रदेश से उनका जुड़ाव भी उनके चयन की एक अहम वजह माना जा रहा है. उनके पास एक ओर देश की सुरक्षा से जुड़ा लंबा अनुभव है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों की समझ भी है.
आखिर क्यों बनाया गया CEO का पद?
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO का पद पहली बार बनाया गया है. मंदिर निर्माण के साथ अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, मंदिर संचालन, रखरखाव, सुरक्षा, नए प्रोजेक्ट और परिसर से जुड़े कई कार्यों का दायरा लगातार बढ़ रहा है. इन सभी कामों के बीच बेहतर समन्वय और रोजमर्रा के प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए CEO की जरूरत महसूस की गयी. CEO की जिम्मेदारियों और अधिकारों को लेकर एक SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार किया जाएगा. इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि CEO के अधिकार और जिम्मेदारियां क्या होंगी. भविष्य में जरूरत पड़ने पर संयुक्त CEO या डिप्टी CEO की नियुक्ति भी की जा सकती है.
चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट में बड़ा बदलाव
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO का नया पद हाल के प्रशासनिक बदलावों की कड़ी में भी देखा जा रहा है. जून में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े रुपयों में हेराफेरी का विवाद सामने आया था. मामले की जांच के लिए SIT गठित की गयी और मुकदमा दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव शुरू हुआ. जुलाई में चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 6 और 22 जुलाई को हुई बैठकों में ट्रस्ट के कामकाज को नये सिरे से व्यवस्थित करने पर फैसला हुआ. इसी क्रम में जगदीश आफले को पहला सचिव बनाया गया, जबकि कृष्ण मोहन ने अंतरिम महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली.
ट्रस्ट में तीन नये सदस्य भी शामिल
2 सितंबर को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में स्वामी गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया, जबकि महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी. बैठक में तीन नये सदस्यों को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया. इनमें शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और दिल्ली के महेश भागचंदका शामिल हैं. डॉ. निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बनी हैं. वहीं मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि मामले में रामलला की ओर से अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं. महेश भागचंदका का संबंध अशोक सिंघल के परिवार से बताया जाता है.
अब प्रशासनिक क्षमता की होगी असली परीक्षा
जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति को ट्रस्ट में हो रहे व्यापक प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. करीब चार दशक की सैन्य सेवा के बाद उन्हें मंदिर के बढ़ते प्रशासन की जिम्मेदारी दी गयी है. ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व, करीब 39 साल का सैन्य अनुभव और उत्तर प्रदेश से जुड़ाव उनके चयन की तीन प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं. अब देखने वाली बात होगी कि वायुसेना में बड़े ऑपरेशन और विशाल कमान संभालने का उनका अनुभव राम मंदिर जैसी लगातार बढ़ती और बहुआयामी व्यवस्था के संचालन में कितना कारगर साबित होता है.
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