पीजी-बीएससी बंद होने पर छात्र आंदोलित

Updated at : 13 Jun 2014 7:06 AM (IST)
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पीजी-बीएससी बंद होने पर छात्र आंदोलित

सरायकेला : काशी साहू महाविद्यालय में नामांकन बंद होने से छात्र संगठन एआइडीएसओ ने कॉलेज मुख्यालय में प्रदर्शन किया. एआइडीएसओ के विष्णुदेव गिरी के नेतृत्व में छात्राओं ने नामांकन जारी रखने का नारा लगाते हुए प्रदर्शन किया. साथ ही कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम प्राचार्य संतोष कुमार शर्मा को ज्ञापन सौंपा. सौंपे गये ज्ञापन […]

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सरायकेला : काशी साहू महाविद्यालय में नामांकन बंद होने से छात्र संगठन एआइडीएसओ ने कॉलेज मुख्यालय में प्रदर्शन किया. एआइडीएसओ के विष्णुदेव गिरी के नेतृत्व में छात्राओं ने नामांकन जारी रखने का नारा लगाते हुए प्रदर्शन किया. साथ ही कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम प्राचार्य संतोष कुमार शर्मा को ज्ञापन सौंपा.
सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि सरायकेला अत्यंत ही पिछड़ा क्षेत्र है जिला मुख्यालय का एक मात्र काशी साहू कॉलेज है, परंतु बीएससी व एमए की पढ़ाई बंद कर दिये जाने से यहां के छात्र छात्रएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जायेंगे. ज्ञापन में नामांकन जारी रखने का आग्रह किया गया, ताकि यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्ति में दिक्कत न आये. प्रदर्शन में अनोज पांडेय, राजू कुमार, विशाल वर्मा, अभिषेक, नरेंद्र महतो, रविशंकर कुमार, बापी, सपन, आर नंदी, आयशा परवीन के अलावा कई शामिल थे.
व्याख्याताओं की कमी से नामांकन बंद, निराशा
काशी साहू महाविद्यालय में बीएससी व एमए में नामांकन बंद होने के विश्वविद्यालय के फरमान से जिला के छात्र-छात्राओं में गहरी निराशा है. वहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन व्याख्याताओं की कमी व पद सृजित नहीं होने का हवाला देकर सत्र 2014-17 में नामांकन बंद कर दिया गया है. जिले के एक मात्र काशी साहू महाविद्यालय में स्नातक स्तर की पढ़ाई होती थी. कॉलेज में अधिकांश छात्र-छात्रएं जो आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं, वे यहां नामांकन करा कर उच्च शिक्षा हासिल करते हैं.
कॉलेज में बीएससी व एमए में नामांकन बंद होने से यहां के छात्र-छात्राओं को अब दूसरे जिले के कॉलेजों में जाकर नामांकन लेना होगा, और उच्च शिक्षा हासिल करनी पड़ेगी.
विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा जिले के एक और कॉलेज जो चांडिल अनुमंडल में हैं, वहां भी बीएससी की पढ़ाई बंद करने का फरमान जारी कर दिया गया है. विश्वविद्यालय द्वारा इन संकाय में व्याख्याताओं के पद सृजित नहीं होने व मान्यता नहीं होने का हवाला देते हुए नामांकन बंद कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि काशी साहु कॉलेज में वर्ष 1979 से बीएससी की पढ़ाई हो रही थी, तो बिना मान्यता के इतने दिनों तक विश्वविद्यालय द्वारा कैसे नामांकन लिया जा रहा था. साथ ही और परीक्षा भी आयोजित की जा रही थी. एमए में कॉलेज को वर्ष 2010 में पढ़ाई करने की स्वीकृति मिली थी. कॉलेज में इन दो संकाय में नामांकन बंद होने से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं में गहरी निराशा है.
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