चाईबासावासियों को पीने का पानी उपलब्ध करा पाने में असमर्थ

Updated at : 24 Apr 2018 5:03 AM (IST)
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चाईबासावासियों को पीने का पानी उपलब्ध करा पाने में असमर्थ

चाईबासा : चाईबासा में गर्मी ने प्रचंड रूप धारण कर लिया है. पारा 41 डिग्री के पार पहुंचने वाला है. जाहिर है कि दिन में तपिश बढ़ गयी है. भीषण गर्मी के साथ ही चाईबासावासी पेयजल की समस्या से भी जूझ रहे हैं. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग चाईबासावासियों को पीने का पानी उपलब्ध करा पाने […]

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चाईबासा : चाईबासा में गर्मी ने प्रचंड रूप धारण कर लिया है. पारा 41 डिग्री के पार पहुंचने वाला है. जाहिर है कि दिन में तपिश बढ़ गयी है. भीषण गर्मी के साथ ही चाईबासावासी पेयजल की समस्या से भी जूझ रहे हैं. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग चाईबासावासियों को पीने का पानी उपलब्ध करा पाने में असमर्थ साबित हो रहा है. चाईबासा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए विभाग की ओर से 13267 चापाकल लगवाये गये हैं. इनमें से 2260 चापाकल कंडम घोषित किया जा चुका है.

वहीं विभाग द्वारा नयी शहरी जलापूर्ति योजना के तहत अब-तक मात्र 25 फीसदी लोगों के घरों में ही पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जा सका है. बाकी 75 फीसदी लोग चापाकलों व कुओं का पानी पीने को मजबूर हैं. ऐसे में चापाकलों व कुओं से अत्यधिक जल की निकासी होने से भूगर्भीय जल का भी अत्यधिक दोहन हो रहा है.

खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए फंड नहीं : चाईबासा अंचल अंतर्गत जगन्नाथपुर, खूंटपानी, टोंटो, मंझारी, हाटगम्हरिया, झींकपानी, कुमारडुंगी, मझगांव, नोवामुंडी, तांतनगर आदि कुल 11 प्रखंड हैं. इन प्रखंडों में विभाग की ओर से कुल 13,297 चापाकल लगाये गये हैं, जिनमें से 2260 चापाकल खराब हो चुके हैं.
वाटर लेबल बढ़ाने को 882 करोड़ का डीपीआर : भूगर्भ जल स्तर की स्थिति दिन ब दिन दयनीय होती जा रही है. वहीं कई क्षेत्रों में डीप बोरिंग के कारण भी वाटर लेवल घट रहा है. जिसके कारण ग्राउंड वाटर लेबल को बचाने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल द्वारा कुल 882 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है.
फाइलों में धूल फांक रहीं योजनाएं
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की चाईबासावासियों को राहत दिलानेवाली सरकारी योजनाएं फिलहाल फाइलों में धूल फांक रही हैं. 2012-13 में चाईबासा के प्रत्येक घरों में पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से नयी शहरी जलापूर्ति योजना का कार्य प्रारंभ किया गया था. 40 करोड़ की लागत से बननेवाली उक्त योजना के निर्माण की जिम्मेवारी विभाग की ओर से एमएस पर्यावरण लिमिटेड को दी गई. लेकिन काम आरंभ होने के 5 साल बीत जाने के बाद भी उसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका है. जिस कारण गाड़ीखाना, मेरी टोला, नीमडीह व बरकंदाजटोली आदि क्षेत्रों के लोग पानी के लिए घंटों कतार में खड़े रहने को मजबूर हैं.
5 हजार चापाकलों का पानी पीने योग्य नहीं
चाईबासा अंचल अंतर्गत 11 प्रखंडों में करीब 5 हजार ऐसे चापाकल हैं. जिनका पानी पीने योग्य नहीं है. इन 5 हजार चापाकलों से मिट्टी व लौह अयस्क मिला पानी निकलता है. जिस कारण ग्रामीण चाह कर भी वह पानी पी नहीं पाते हैं. इन खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत के लिए पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल द्वारा जिला प्रशासन से फंड की मांग की गई, लेकिन प्रशासन ने खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया है.
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