दूषित पानी के इस्तेमाल से होते हैं बच्चे कुपोषित: पुरती

Updated at : 11 Aug 2017 3:59 AM (IST)
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दूषित पानी के इस्तेमाल से होते हैं बच्चे कुपोषित: पुरती

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कृमि मुक्ति दिवस मना चाईबासा : गांव- देहात के लोग नंगे पांव बाहर शौच जाते हैं. यहां खेत के मलमूत्र पानी में मिल जाते हैं और पानी दूषित हो जाता है. उक्त दूषित पानी का ग्रामीण इस्तेमाल करते हैं. इसके कारण बीमार हो जाते हैं. कीड़े भी शरीर में प्रवेश […]

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कृमि मुक्ति दिवस मना

चाईबासा : गांव- देहात के लोग नंगे पांव बाहर शौच जाते हैं. यहां खेत के मलमूत्र पानी में मिल जाते हैं और पानी दूषित हो जाता है. उक्त दूषित पानी का ग्रामीण इस्तेमाल करते हैं. इसके कारण बीमार हो जाते हैं. कीड़े भी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. शरीर में कीड़े प्रवेश कर पौष्टिक आहर चूस लेते हैं.
इसके कारण बच्चे कुपोषित हो जाते हैं. कुपोषित बच्चों का शारीरिक विकास नहीं होता है. उक्त बातें जिला परिषद अध्यक्ष लालमुनि पुरती ने गुरुवार को सदर अस्पताल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आयोजित कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहीं.
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला व बच्चों को पौष्टिक भोजन करना चाहिए. श्रीमती पूर्ति के हाथों बच्चों को कृमि की दवा एलबेंडाजॉल की गोली खिलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की.
स्कूली बच्चों को खिलाई गयी कृमि की दवा
जैंतगढ़. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर शिक्षा परियोजना के सौजन्य से बच्चों को कृमि की दवा खिलाई गयी. प्राथमिक मध्य व उच्च विद्यालय के 19 वर्ष आयु तक के
सभी बच्चों को दवा खिलाई गयी. उत्क्रमित मध्य विद्यालय बुढ़ाखमान के प्रधान शिक्षक सूरत महतो ने बताया
कि बच्चे आज अनुपस्थित हैं. उन्हें चिह्नित कर 17 अगस्त को दवा खिलाई जायेगी. इस अवसर पर उमवि बांसकाटा, मवि मानिकपुर, उमवि कुंदरीझोर, उमवि पट्टाजैंत, उमवि गोरियाडुबा, प्राथमिक विद्यालय तुतुडीपोसी, प्रा वि बासिरा, दलपोसी, हंडीमांगा, सरस्वतीपुर, उउवि सोसोपी, निश्चिंपुर पर दवा खिलाई गयी.
पेट में कृमि होने से कमजोर होते हैं बच्चे
सिविल सर्जन डॉ हिमांशु भूषण बरवार ने कहा कि पेट में कृमि होने से बच्चे कमजोर हो जाते हैं. कृमि पौष्टिक आहार खा लेता है. दुनिया में 20 करोड़ लोग इस रोग से ग्रसित हैं. बच्चों की बौद्धिक क्षमता कम होती है. उन्होंने कहा कि जिला में लगभग पांच लाख 63 हजार बच्चे व युवक-युवतियों को एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाने का लक्ष्य है. जिला कुष्ठ पदाधिकारी डॉ हरिपाल सोनार ने कहा कि कृमि संक्रमण से बच्चों में कुपोषण और खून की कमी से होती है. संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास नहीं होता है. मंच संचालन डॉ जगन्नाथ हेंब्रम तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ संजय कुमार ने किया. इस अवसर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ चंद्रावती बोयपाई, डॉ संगीता मुंडरी, डीपीएम नीरज कुमार यादव, यूनिसेफ कॉडिनेट अनिल कुमार समेतअन्य उपस्थित थे.
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