अभियान को सफल बनाने में मीडिया की भूमिका अहम
Updated at : 27 Jun 2018 4:59 AM (IST)
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कार्यशाला. मिजिल्स रूबेला टीकाकरण अभियान में सीएस बोले सिमडेगा : सदर अस्पताल स्थित सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में मिजिल्स रूबेला टीकाकरण पर मंगलवार को मीडिया कर्मियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान मीडिया कर्मियों को मिजिल्स रूबेला की जानकारी विस्तार पूर्वक दी गयी. मौके पर सीएस डॉ एजाज अशरफ ने […]
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कार्यशाला. मिजिल्स रूबेला टीकाकरण अभियान में सीएस बोले
सिमडेगा : सदर अस्पताल स्थित सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में मिजिल्स रूबेला टीकाकरण पर मंगलवार को मीडिया कर्मियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान मीडिया कर्मियों को मिजिल्स रूबेला की जानकारी विस्तार पूर्वक दी गयी. मौके पर सीएस डॉ एजाज अशरफ ने कहा कि मिजिल्स रूबेला टीकाकरण अभियान 26 जुलाई से शुरू हाेगा. इस अभियान को सफल बनाने में मीडिया की भूमिका अहम होगी. मीडिया के माध्यम से ही लोगों को इस अभियान के प्रति जागरूक किया जा सकता है. साथ ही लोगों को मिजिल्स रूबेला टीकाकरण अभियान की जानकारी दी जा सकती है.
डॉ आनंद खाखा ने कहा कि पूर्व में इस अभियान को 26 जून से ही शुरू किया जाना था, किंतु ग्राम स्वराज योजना अभियान के कारण इसकी तिथि बढ़ा कर 26 जुलाई कर दी गयी है. इससे पूर्व इस अभियान का प्रचार-प्रसार बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि मिजिल्स रूबेला वैक्सीन है, जो खसरा एवं रूबेला जैसी बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है. इस वैक्सीन को नौ माह से 15 साल तक के बच्चों को देना है. वर्तमान में इसे स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिया जाना है.
बाद में इस टीकाकरण को नियमित टीकाकरण में शामिल करने की योजना है.
क्या है खसरा (मिजिल्स) व रूबेला : डॉ आनंद खाखा ने खसरा के बारे में बताया कि यह एक जानलेवा बीमारी है, जो वायरस से फैलता है. खसरा रोग के कारण बच्चों में विकलांगता या उसकी असमय मृत्यु हो सकती है. यह रोग प्रभावित व्यक्ति के खांसने एवं छींकने से फैलता है. चेहरे व शरीर पर गुलाबी लाल दाने या चकते, अत्यधिक बुखार, खांसी, नाक बहना एवं आंखों का लाल हो जाना इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं. डॉ खाखा ने बताया कि रूबेला बीमारी भी वायरस के कारण होता है.
बच्चों में यह रोग आम तौर पर हलका होता है, जिसमें कम डिग्री का बुखार, मिचली एवं हलके नेत्र शोध के लक्षण दिखाई देते हैं. कान के पीछे और गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां सबसे विशिष्ट चिकित्सीय लक्षण हो सकते हैं. संक्रमित वयस्क महिला-पुरुष के जोड़ों में पीड़ा हो सकती है.
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