साहिबगंज में रामकथा की गूंज, मां तारा मंदिर में उमड़ रहे श्रद्धालु; वृंदावन से पहुंचीं कथा वाचिका

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वृंदावन से पहुंचीं कथा वाचिका | Prabhat Khabar Network

साहिबगंज के मां तारा मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य आयोजन. वृंदावन से आईं कथा वाचिका ऋचा जी सुना रहीं रामकथा, भक्तों की भारी भीड़.

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प्रतिनिधि, साहिबगंज. शहर के मां तारा मंदिर प्रांगण में भाद्रपद अमावस्या अनुष्ठान के साथ नौ दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है. समिति की ओर से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रीधाम वृंदावन की कथा वाचिका ऋचा जी प्रतिदिन शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक श्रद्धालुओं को श्रीराम कथा का रसपान करा रही हैं. कथा सुनने के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर परिसर पहुंच रहे हैं.

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तुलसीदास और वाल्मीकि की रामकथा के समन्वय पर चर्चा

कथा के प्रथम दिन कथा वाचिका ऋचा जी ने गोस्वामी तुलसीदास महाराज और महर्षि वाल्मीकि महाराज की रामकथा पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने वाल्मीकि रामायण और श्रीरामचरितमानस के बीच समन्वयात्मक संबंध, भगवान श्रीराम के अवतार के उद्देश्य और उनके आदर्श जीवन के विभिन्न प्रसंगों को कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया.

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में मर्यादा, धर्म और कर्तव्य के मार्ग को अपनाकर समाज के सामने आदर्श स्थापित किया. उनके जीवन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलते रहने की प्रेरणा मिलती है.

शिव-सती संवाद से शुरू होती है रामकथा की संवाद परंपरा

दूसरे दिन बुधवार की शाम कथा में शिव-सती संवाद, याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद और रामकथा की संवाद परंपरा पर विस्तार से चर्चा की गई. कथा वाचिका ने बताया कि रामचरितमानस में भगवान श्रीराम की कथा विभिन्न संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है.

उन्होंने बताया कि रामचरितमानस की कथा परंपरा में सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक संवाद भगवान शिव और माता सती के बीच होता है. शिव जी माता सती को भगवान श्रीराम की महिमा और उनकी कथा सुनाते हैं. इसी कथा परंपरा को आगे महर्षि याज्ञवल्क्य ने महर्षि भरद्वाज को प्रयागराज के पावन तट पर सुनाया.

याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद से भक्तों को कराया परिचित

कथा के दौरान याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद का प्रसंग श्रद्धालुओं के सामने रखा गया. कथा वाचिका ने बताया कि रामकथा की यह परंपरा आगे काकभुशुण्डि और गरुड़ संवाद तक पहुंचती है. काकभुशुण्डि जी ने पक्षीराज गरुड़ को श्रीराम की कथा सुनाई.

उन्होंने बताया कि तुलसीदास जी ने इसी समृद्ध कथा परंपरा को अपने गुरु से सुना और लोकभाषा में श्रीरामचरितमानस के रूप में जनसामान्य तक पहुंचाया. कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को रामचरितमानस की संवाद परंपरा और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराया गया.

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पूजन और आरती के साथ दूसरे दिन की कथा संपन्न

दूसरे दिन की कथा के समापन पर भगवान का पूजन और आरती की गई. इसके बाद श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ आरती में हिस्सा लिया. मंदिर परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा.

नौ दिवसीय श्रीराम कथा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है. शाम होते ही बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु मां तारा मंदिर परिसर पहुंच रहे हैं और कथा का श्रवण कर रहे हैं.

आयोजन में समिति के पदाधिकारी और श्रद्धालु रहे मौजूद

कार्यक्रम में दिगम्बरा नन्द जी महाराज, लाल बाबा, सचिव सह व्यवस्थापक कमल किशोर साह, उपाध्यक्ष शिव कुमार यादव, कोषाध्यक्ष मुन्ना गोस्वामी, राजीव केशरी, राकेश यादव, आचार्य लक्ष्मण पांडे, धीरज सिंह, अनिल सिंह, चंदन यादव, सुनील यादव, बंसी यादव, प्रवीण राय, चुनना गौर, सोनू कुमार यादव, कुंदन सिंह, गोविंद मिश्रा, काजल सहित अन्य श्रद्धालु और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे.

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