वियतनाम में योग का बढ़ा क्रेज, झारखंड से सैकड़ों योग शिक्षक पहुंच रहे विदेश, जानें क्यों है इतनी डिमांड

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योगासन करतीं महिलाएं. एआई जेनरेटेड फोटो.

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वियतनाम में योग शिक्षकों की भारी मांग है. झारखंड के युवा योग प्रशिक्षक बनकर विदेश में सुनहरा भविष्य बना रहे हैं. जानें कैसे.

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रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

रांची: वियतनाम में योग का बढ़ता प्रचलन झारखंड के प्रशिक्षित योग शिक्षकों के लिए रोजगार का नया रास्ता खोल रहा है. खासकर, रांची और जमशेदपुर से बड़ी संख्या में योग शिक्षक वियतनाम पहुंच रहे हैं. कोई वहां योग संस्थानों में ट्रेनर के तौर पर काम कर रहा है, तो कई शिक्षक लोगों के घर जाकर व्यक्तिगत रूप से योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं. योग क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, वियतनाम में स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर बढ़ती जागरूकता के साथ योग प्रशिक्षकों की मांग भी बढ़ी है.

राजा कुमार वर्मा की मौत के बाद सामने आया कनेक्शन

वियतनाम में योग शिक्षक राजा कुमार वर्मा की सड़क हादसे में मौत हो गयी. उनके पार्थिव शरीर को रांची लाने की प्रक्रिया चल रही है. इस घटना के बाद योग एसोसिएशन और योग से जुड़े शिक्षकों ने उनके परिवार से मुलाकात कर सहयोग का भरोसा दिया. इसी दौरान वियतनाम में झारखंड के योग शिक्षकों की मौजूदगी और वहां उनके लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी भी सामने आयी.

योग संस्थानों से लेकर घरों तक प्रशिक्षण

योग संस्थान चलाने वाले और योग एसोसिएशन से जुड़े प्रह्लाद भगत के अनुसार, पिछले कई वर्षों से झारखंड के योग शिक्षक वियतनाम जा रहे हैं. वहां योग की लोकप्रियता बढ़ने के साथ प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत भी बनी हुई है. झारखंड के कई शिक्षक वियतनाम के योग संस्थानों में नौकरी कर रहे हैं. इसके अलावा कुछ शिक्षक व्यक्तिगत तौर पर लोगों के घर जाकर योग का प्रशिक्षण देते हैं. इस तरह वियतनाम में योग शिक्षकों के लिए रोजगार के दो प्रमुख रास्ते दिखाई दे रहे हैं. एक तरफ योग संस्थानों और फिटनेस सेंटरों में नौकरी के अवसर हैं, तो दूसरी तरफ निजी तौर पर प्रशिक्षण देकर कमाई करने की संभावना भी है.

रांची-जमशेदपुर बन रहे योग ट्रेनर के केंद्र

झारखंड में रांची और जमशेदपुर योग प्रशिक्षकों के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं. यहां से योग का प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा विदेश में योग ट्रेनर के तौर पर करियर बनाने की कोशिश कर रहे हैं. योग क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, इन शहरों से प्रशिक्षित होकर निकले युवाओं में विदेश जाकर योग सिखाने की रुचि लगातार बढ़ रही है. प्रह्लाद भगत के मुताबिक, राजा कुमार वर्मा भी वियतनाम में एक योग संस्थान से जुड़े हुए थे और लोगों को व्यक्तिगत रूप से योग का प्रशिक्षण देते थे. उनके अनुसार, वियतनाम जाने के लिए उनके संस्थान की ओर से राजा कुमार को एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट भी दिया गया था.

तनाव और जीवनशैली से बढ़ी योग की मांग

वियतनाम में योग की बढ़ती मांग के पीछे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को प्रमुख कारण माना जा रहा है. तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच काम का तनाव और पीठ दर्द जैसी समस्याएं लोगों के लिए चुनौती बन रही हैं. ऐसे में कई लोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए योग की ओर रुख कर रहे हैं. वहां स्वस्थ जीवनशैली को लेकर भी लोगों में रुचि बढ़ रही है. कई लोग अपने दिन की शुरुआत योग और व्यायाम से करना पसंद करते हैं. यही वजह है कि योग केवल पारंपरिक अभ्यास तक सीमित नहीं रहकर फिटनेस और वेलनेस से जुड़े क्षेत्र का हिस्सा बन रहा है.

फिटनेस सेक्टर के विस्तार से बढ़े अवसर

वियतनाम में फिटनेस और योग सेंटरों के विस्तार ने भी प्रशिक्षित योग शिक्षकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाये हैं. बड़े फिटनेस और योग सेंटरों के बढ़ने के साथ प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर की जरूरत भी बढ़ती है. योग क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, इसी मांग के कारण भारतीय योग शिक्षकों के लिए भी वहां अवसर बन रहे हैं. भारत में योग की पारंपरिक और व्यवस्थित ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षकों को वहां काम मिलने की संभावना रहती है. भारत के अलग-अलग राज्यों से युवा योग प्रशिक्षण लेकर विदेशों में इस क्षेत्र में रोजगार तलाश रहे हैं. इनमें झारखंड के शिक्षक भी शामिल हैं.

झारखंड में प्रशिक्षण, लेकिन रोजगार की चुनौती

झारखंड में योग की पढ़ाई और प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराना अभी भी चुनौती है. योग क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी स्तर पर योग शिक्षकों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं. वहीं निजी योग संस्थानों में बेहतर वेतन वाली नौकरियां भी सीमित हैं. प्रह्लाद भगत का कहना है कि योग शिक्षकों के लिए राज्य में निबंधन और पेशेवर अवसरों की व्यवस्थित व्यवस्था होनी चाहिए. इससे प्रशिक्षित युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और उन्हें विदेश जाने की जरूरत कम पड़ सकती है.

विदेश में योग सिखाकर बना रहे करियर

वियतनाम जाने वाले झारखंड के युवाओं के लिए योग अब केवल प्रशिक्षण का क्षेत्र नहीं, बल्कि रोजगार और करियर का माध्यम भी बन रहा है. प्रशिक्षित शिक्षक वहां योग संस्थानों से जुड़ने के साथ व्यक्तिगत प्रशिक्षण देकर भी आय अर्जित कर रहे हैं. योग क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, झारखंड में प्रशिक्षण पूरा करने वाले कई युवा अब वियतनाम जाने में रुचि दिखा रहे हैं. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, फिटनेस सेक्टर के विस्तार और योग के प्रति लोगों की रुचि ने वहां प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए अवसर बढ़ाये हैं.

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रोजगार और योग का बन रहा नया कनेक्शन

झारखंड और वियतनाम के बीच योग के जरिये रोजगार का यह संबंध राज्य के प्रशिक्षित युवाओं के लिए एक नया रास्ता दिखा रहा है. हालांकि, विदेश में रोजगार के अवसरों के साथ प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रमाणपत्र, रोजगार की शर्तें और स्थानीय नियमों की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल योग क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुभव यह बताते हैं कि वियतनाम में योग की बढ़ती लोकप्रियता ने झारखंड के कई प्रशिक्षित शिक्षकों को विदेश में काम करने का अवसर दिया है. आने वाले समय में यह क्षेत्र झारखंड के युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है.

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