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झारखंड में बढ़ेगा बालू संकट, निर्वाचन आयोग से नहीं मिली टेंडर की अनुमति, कई काम हो सकते हैं बंद

झारखंड निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के कारण बालू घाटों का टेंडर करने की अनुमति नहीं दी. जिससे आने वाले दिनों में बालू का संकट बढ़ जाएगा. 15 अक्तूबर तक बालू संकट के कायम रहने की आशंका है. जबकि झारखंड में आधिकारिक रूप से बालू घाटों से खनन बंद है.

By Sameer Oraon
Updated Date
झारखंड में बालू का संकट
झारखंड में बालू का संकट
सांकेतिक तस्वीर

Jharkhand News रांची: झारखंड निर्वाचन आयोग ने सरकार को पंचायत चुनाव के कारण बालू घाटों का टेंडर करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इससे अब राज्य में बालू का संकट उत्पन्न हो जायेगा. एनजीटी कोलकाता द्वारा पारित आदेश के आलोक में राज्य के बालू घाटों से बालू का उठाव बारिश के मौसम में नहीं होना है. वर्ष 2020 से मॉनसून अवधि में यानी 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू के खनन पर पूर्णत: रोक लगायी गयी है. इससे 15 अक्तूबर तक बालू संकट के कायम रहने की आशंका है.

10 जून के बाद केवल भंडारण से उठाव :

10 जून के बाद केवल भंडारण से किये गये उठाव पर ही चालान और परमिट दिया जायेगा. इधर, राज्य में आधिकारिक रूप से बालू घाटों से खनन बंद है. पहले से विलंब चल रहे टेंडर का फाइनांशियल बिड खुलने के पहले ही पंचायत चुनाव के कारण राज्य में आचार संहिता लग गयी. अब 31 मई तक टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकेगी. उसके बाद टेंडर फाइनल करने के बाद भी 15 अक्तूबर तक बालू का उठाव पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा.

यहां बता दें कि खान एवं भूतत्व विभाग ने आयोग से विभिन्न जिलों में स्थित 118 बालू घाटों का टेंडर करने के लिए आचार संहिता से छूट देने का आग्रह किया था. आयोग ने 31 मई के बाद बालू घाटों का टेंडर करने की बात कही है. कुछ दिनों पूर्व ही आयोग ने पत्थर, ग्रेनाइट, बॉक्साइट आदि खनिजों के खनन के लिए भी टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को असहमति के साथ लौटा दिया था.

चुनाव आयोग ने खनिजों के खनन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को भी लौटा दिया था

फिलहाल मॉनसून अवधि में 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू खनन पर रहती है एनजीटी की रोक

महंगी कीमत पर बिक रहा है अवैध बालू

विभिन्न जिलों में बालू घाटों का टेंडर नहीं किया गया है. आधिकारिक रूप से रांची में ही पिछले दो वर्ष से बालू का खनन बंद है. अवैध उठाव कर बाजार में बेचा जा रहा है. माफिया बालू का उत्खनन कर मुंहमांगी कीमत पर बालू बेच रहे हैं. 15,000 रुपये हाइवा (600 सीएफटी) की कीमत बढ़ कर 22,000 रुपये तक पहुंच गयी है. इसी तरह 3,000 रुपये ट्रक (130 सीएफटी) की कीमत बढ़ कर 5,000 रुपये तक पहुंच गयी है.

बालू की कमी जारी रही तो बंद हो जायेंगे कई काम

क्रेडाइ, झारखंड के अध्यक्ष बिजय अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में रियल एस्टेट इंडस्ट्री बालू की समस्या से जूझ रही है. अगर बालू मिल भी रहा है, तो वह मनचाहे दाम पर. बालू की सप्लाई बाधित होने के कारण कई साइट में काम बंद हो गये हैं. जो स्थिति है, लगता है अगले छह माह तक बालू की समस्या से परेशानी बनी रहेगी. यही स्थिति रही, तो कई और साइट पर काम बंद हो जायेंगे.

Posted By: Sameer Oraon

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