JTET पास नहीं करने वाले पारा शिक्षकों को हाइकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं
झारखंड हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों की जेटेट पास न होने के कारण इंटरमीडिएट ट्रेड टीचर परीक्षा में शामिल होने की याचिका खारिज कर दी है. विभाग में अभ्यावेदन देने की छूट.
रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने इंटरमीडिएट ट्रेड टीचर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (पारा कोटि)-2026 में शामिल होने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रार्थियों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने हालांकि, प्रार्थियों को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में अभ्यावेदन देकर अपना पक्ष रखने की छूट दी है. परीक्षा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर 2026 निर्धारित है.
तीन साल में जेटेट पास करने का दिया था भरोसा
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) या पड़ोसी राज्यों की सीटीईटी/टीईटी परीक्षा पास नहीं की है. इसके बावजूद वे इंटरमीडिएट ट्रेड टीचर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (पारा कोटि)-2026 में शामिल होने का अवसर चाहते हैं. प्रार्थियों ने कहा कि उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाये. वे अगले तीन वर्षों के भीतर जेटेट पास कर लेंगे.
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जेएसएससी ने पात्रता की शर्तों का दिया हवाला
वहीं, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि विज्ञापन में निर्धारित शर्तों के अनुसार जेटेट या टीईटी पास नहीं करने वाले अभ्यर्थी आवेदन करने के पात्र नहीं हैं. उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनील यादव मामले में पारित आदेश के तहत पारा शिक्षक कोटि के लिए विज्ञापन जारी किया गया है.
विभाग में अभ्यावेदन देकर रख सकेंगे अपना पक्ष
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. हालांकि, उन्हें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देकर अपनी मांग और पक्ष रखने की छूट दी गयी है. इस मामले में पारा शिक्षक ऋषिकांत तिवारी एवं अन्य की ओर से याचिका दायर की गयी थी.
18 अक्टूबर तक करना होगा आवेदन
इंटरमीडिएट ट्रेड टीचर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (पारा कोटि)-2026 के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर 2026 है. ऐसे में परीक्षा में शामिल होने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के लिए समय काफी अहम है. हालांकि, हाइकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद अभ्यर्थियों को अब विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा.
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