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झारखंड की 68.77 फीसदी भूमि की गुणवत्ता हुई खराब, बंजर में तब्दील होने का खतरा मंडराया, जानें क्या है वजह

इसरो की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पूरे देश में झारखंड की भूमि सबसे अधिक खराब हो रही है. जिसका कारण है भूमि का क्षरण यह सर्वे 2018-19 में की गयी गणना पर आधारित है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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Jharkhand News: झारखंड की 68.77 फीसदी भूमि की गुणवत्ता हुई खराब
Jharkhand News: झारखंड की 68.77 फीसदी भूमि की गुणवत्ता हुई खराब
Prabhat Khabar

रांची : पूरे देश में झारखंड की भूमि सबसे अधिक खराब हो रही है. यहां की जमीन बंजर होती जा रही है. इसका मुख्य कारण भूमि का क्षरण बताया जा रहा है. झारखंड में करीब 54.80 लाख हेक्टेयर भूमि बंजर होने की ओर है. यह कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 68.77 फीसदी है. राज्य का कुल क्षेत्रफल 79.71 लाख हेक्टेयर का है. पूरे देश में झारखंड की स्थिति सबसे खराब राज्यों में टॉप पर है. इसरो से जारी ताजा रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है.

यह सर्वे 2018-19 में की गयी गणना पर आधारित है. इससे संबंधित सर्वे स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद ने किया है. झारखंड के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर की मदद से अध्ययन किया गया है. संस्थान ने पूरे देश में हो रहे मरुस्थलीकरण और भूमि की गिरती गुणवत्ता पर अध्ययन किया है. वैसे झारखंड में 2011-13 में की गयी तुलना में सुधार हुआ है. लेकिन, यह काफी मामूली है. 2011-13 में झारखंड में 68.98 फीसदी भूमि को बंजर बनने की ओर अग्रसर बताया गया था. वहीं 2003-05 में करीब 67.97 फीसदी भूमि की गुणवत्ता खराब होती बतायी गयी थी.

जल क्षरण बना मुख्य कारण :

अध्ययन में पाया गया है कि झारखंड में भूमि की गुणवत्ता खराब होने का मुख्य कारण जल क्षरण है. 2018-19 में कुल 49.12 फीसदी भूमि का क्षरण जल के कारण हुआ है. 2011-13 में जल क्षरण के कारण 50.64 फीसदी भूमि का क्षरण हुआ था. यह सबसे अधिक झारखंड के पठारी इलाकों में पाया गया है. 2018-19 में वनस्पतियों की कमी के कारण 17.81 फीसदी भूमि का क्षरण हुआ है. यह 2011-13 की तुलना में अधिक है.

2011-13 में कुल क्षरण का 17.30 फीसदी का कारण अनुपयुक्त वनस्पतियां थी, जबकि, 2003-05 में यह 16.40 फीसदी था. अध्ययन में माना गया है कि यह कारण मानव निर्मित है. 2003-05 से 2018-19 के दौरान झारखंड में घने जंगलों में कमी हुई. आवासीय परिसर बढ़े. कृषि का क्षेत्रफल भी घटा. दरअसल पेड़-पौधे, घास-फूस जमीन की परत को पकड़ कर रखते हैं. इनके नहीं रहने से जमीन की ऊपरी परत कमजोर हो जाती है और पानी के तेज बहाव में पानी के साथ ही बह कर निकल जाती है. यहां तक की तेज हवा से भी भूमि की ऊपरी परत को नुकसान होता है. पठारी इलाकों में इसकी गति और तेज रहती है.

झारखंड में घने और मध्यम स्तर के जंगल घटे

वर्ष 2017 में कराये गये सर्वेक्षण में 2015 की तुलना में वन क्षेत्र में वृद्धि का दावा वन विभाग करता है. हालांकि, इस दौरान राज्य में घने जंगलों का क्षेत्रफल घटा है. घने जंगल में करीब तीन फीसदी की कमी आयी है. फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून द्वारा कराये गये सर्वे के अनुसार मध्यम स्तर के जंगल में भी छह फीसदी की कमी हुई है. वहीं, ओपेन फॉरेस्ट का एरिया 38 फीसदी बढ़ा है. झाड़ियों में भी करीब 16 फीसदी की कमी आयी है.

क्या होता है भूमि का क्षरण

कई कारणों से भूमि की ऊपरी परत को नुकसान होता है. इसमें भूमि की उपजाऊ क्षमता कम होती है. इसके कई कारण होते हैं. इससे भूमि अम्लीय हो जाती है. अम्लीय भूमि में उपज क्षमता कम हो जाती है. इसके उपचार की जरूरत होती है.

पूरे देश में झारखंड सर्वाधिक प्रभावित

राज्य खराब हो रही जमीन

झारखंड 68.77

राजस्थान 62.06

दिल्ली 61.73

गोवा 52.64

गुजरात 52.22

कारण 2018-19 2011-13 बदलाव

अनुपयुक्त वनस्पति 1419362 1379038 40324

जल का तेज बहाव 3915868 4036785 -120918

मानव निर्मित संरचना 95301 52734 42567

सेटलमेंट 51730 30169 21569

जैविक कारणों से मिट्टी की गुणवत्ता नष्ट होती है

भौतिक , रासायनिक एवं जैविक कारणों से मृदा की गुणवत्ता नष्ट होती है, जो जैव विविधता को कम करता है. इस कारण भूमि खराब होने लगती है. धीरे धीरे भूमि की गुणवत्ता कम होती जाती है. भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने के कारण भूमि बंजर होने लगती है. झारखंड राज्य में जल क्षरण के कारण भूमि का क्षरण अधिक इसलिए होता है क्योंकि यहां की भूमि समतल नहीं है. इस कारण ढलान पर वर्षा जल तेजी से बहता है और अपने साथ मिट्टी को भी बहा ले जाता है.

लाल रत्नाकर सिंह,

पूर्व बायोडायवर्सिटी बोर्ड के अध्यक्ष

Posted By : Sameer Oraon

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Published Date

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