स्थानीय भाषा और प्रतिभाओं से ग्लोबल पहचान बनाएगा झारखंडी सिनेमा: असीम सिन्हा

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असीम सिन्हा | Prabhat Khabar Network

झारखंड फिल्म विकास निगम के कार्यक्रम में फिल्मकार असीम सिन्हा ने कहा कि स्थानीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।

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रांची. झारखंड में स्थानीय सिनेमा को ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाने की संभावना है. इसके लिए शहरों से लेकर गांवों तक सिनेमा का सकारात्मक माहौल और फिल्म निर्माण का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है. यह बात फिल्म एडिटर व फिल्मकार असीम सिन्हा ने शनिवार को सूचना भवन सभागार में झारखंड फिल्म विकास निगम लिमिटेड (जेएफडीसीएल) की ओर से आयोजित मीट द मेंटर कार्यक्रम में कही.

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केवल वित्तीय सहायता पर्याप्त नहीं

उन्होंने कहा कि केवल वित्तीय सहायता पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिनेमा कल्चर को बढ़ावा देने और स्थानीय कलाकारों को अवसर देने की जरूरत है. फिल्मों के लिए सीड फंडिंग और स्क्रिप्ट मूल्यांकन की मजबूत प्रणाली भी आवश्यक है.

स्थानीय भाषा और प्रतिभाओं को दे प्राथमिकता

असीम सिन्हा ने कहा कि स्थानीय भाषा, कला और प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने से झारखंड की फिल्मों को वैश्विक पहचान मिल सकती है. सरकार को फिल्म उद्योग को और गति देनी चाहिए, ताकि यह दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह मजबूत हो सके. उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों, फिल्म एडिटिंग में तकनीकी बदलावों और श्याम बेनेगल, चंद्र प्रकाश द्विवेदी, तिग्मांशु धूलिया, कल्पना लाजमी, केतन मेहता और कुंदन शाह जैसे फिल्मकारों के साथ काम करने के अनुभव साझा किये.

40 साल पुराना सपना अब साकार

40 साल पुराना सपना अब हो रहा साकार असीम सिन्हा ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से उनकी इच्छा थी कि झारखंड में एक फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना हो. अब यह सपना साकार होता दिख रहा है. उन्होंने बताया कि रांची में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई गये, जहां सैकड़ों फिल्मों का संपादन किया.

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नॉन फीचर फिल्म श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष

वर्तमान में वह 72वें राष्ट्रीय फिल्मपुरस्कारों की नॉन फीचर फिल्म श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष हैं. कार्यक्रम में विभाग के उपनिदेशक सैय्यद राशिद अख्तर ने उन्हें शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया. संयुक्त निदेशक आनंद ने कहा कि असीम सिन्हा ने 100 से अधिक फिल्मों का संपादन किया है और करीब 30 वर्षों तक सक्रिय रहते हुए अपनी अलग पहचान बनायी है. उनका अनुभव झारखंड के उभरते फिल्म उद्योग के लिए प्रेरणास्रोत है. कार्यक्रम में सहायक निदेशक अभय कुमार, जेब अख्तर, अनुज कुमार, महेश माझी समेत फिल्म क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद थे.


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