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Coronavirus In Jharkhand : तीसरी वेब की तैयारी में जुटी झारखंड सरकार, राज्य के 1.39 करोड़ बच्चों की रक्षा के लिए बना रही है ये प्लान

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
झारखंड पहला राज्य जिसने तीसरे वेव के लिए राष्ट्रीय वेबिनार
झारखंड पहला राज्य जिसने तीसरे वेव के लिए राष्ट्रीय वेबिनार
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  • तीसरे वेव : 1.39 करोड़ बच्चों को है बचाना : सरकार कर रही है तैयारी

  • पहले चरण में शुरु हो रहा है निमोनिया टीकाकरण अभियान, डेढ़ माह के बच्चों

  • शिशु रोग विशेष की संख्या राष्ट्रीय औसत से भी आधी

  • एमबीबीएस डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जायेगा

  • प्रत्येक जिले के सदर अस्पतालों में 20-20 बेड का चाइल्ड केयर वार्ड बनाने की कार्रवाई शुरु

  • झारखंड पहला राज्य जिसने तीसरे वेव के लिए राष्ट्रीय वेबिनार

Coronavirus Third Wave News Jharkhand, Corona Update Jharkhand रांची : झारखंड सरकार कोरोना के थर्ड वेव की तैयारी में जुट गयी है. कहा जा रहा है कि तीसरे वेव में इस बार बच्चों पर सबसे अधिक संक्रमित होने का खतरा है. इसे लेकर सरकार हर स्तर पर तैयारी कर रही है. झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने तीसरे वेव को लेकर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के जाने-माने विशेषज्ञ डॉक्टरों से इस पर राय ली है. विशेषज्ञों ने कहा भी है कि सबसे पहले आधारभूत संरचना को मजबूत करें. डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी को प्रशिक्षित करें. बच्चों का जो भी रूटीन टीकाकरण होता है वह करते रहें.

1.39 करोड़ बच्चे पर पेडियाट्रिक्स केवल 377

झारखंड में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या काफी कम है. पूरे राज्य में कुल 377 शिशु रोग विशेषज्ञ हैं. जबकि जीरो से 14 वर्ष के बच्चों की आबादी 1.39 करोड़ है. यानी एक शिशु रोग विशेषज्ञ पर 36 हजार बच्चों का भार है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा एमबीबीसी डॉक्टर को प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसके लिए रांची के रानी चिल्ड्रेन अस्पताल और रिम्स को नोडल सेंटर बनाया गया है. जहां एमबीबीएस डॉक्टर को वेंटीलेटर्स व आइसीयू में बच्चे के इलाज के बाबत प्रशिक्षित किया जायेगा.

निमोनिया का खतरा अधिक, जून से डेढ़ माह के शिशुओं को लगेगा निमोनिया का टीका

संक्रमित होने पर 90 प्रतिशत बच्चों में निमोनिया का खतरा हो सकता है.राज्य सरकार ने पहले से ही निमोनिया टीकाकरण अभियान शुरू करने का फैसला ले लिया था. स्वास्थ्य विभाग आइइसी के नोडल पदाधकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया कि जून के पहले सप्ताह से यह अभियान शुरु होगा.

इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. डेढ़ माह के शिशु को पहला डोज, 3.5 माह पर शिशु को दूसरा डोज व नौ माह पर तीसरा डोज दिया जाना है. अप्रैल माह में जन्म हुए बच्चों को निमोनिया का टीका लगाया जायेगा. लगभग 8.5 लाख शिशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य है. वर्तमान में 77200 वायल निमोनिया का टीका आ चुका है. जैसे-जैसे अभियान चलता रहेगा टीका आता रहेगा और बच्चों को लगाया जायेगा.

सभी अस्पतालों में 20-20 बेड शिशु वार्ड होंगे

स्वास्थ्य विभाग के नोडल पदाधिकारी भुवनेश प्रताप ने कहा कि सभी जिलों के अस्पतालों में 20-20 बेड के चाइल्ड केयर यूनिट बनाने का निर्देश दिया गया है. रिम्स में 100 बेड का चाइल्ड केयर वार्ड बन गया है. जिन जिलों में पेडियाट्रिक्स हैं वहीं चाइल्ड आइसीयू बनाया जायेगा. अन्य जिलों में यदि बच्चे संक्रमित होते हैं तो गंभीर होने पर उन्हें ऐसे अस्पतालों में भर्ती करने की व्यवस्था की जा रही है.

बड़े पैमान पर प्रशिक्षण का अभियान शुरु किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों का अनुमान है कि जितने बच्चे संक्रमित होंगे उसमें एक प्रतिशत ही ऐसे होंगे जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है. सभी जिलों को किस तरह का अस्पताल होगा इसका गाइडलाइन भेज दिया गया है.

कैसा होगा वार्ड

-बच्चों के वार्ड में उनकी देखरेख के लिए माता के लिए भी जगह भी होगी

-वार्ड में प्रमुख कार्टून कैरेक्टर जैसे डोनल्ड डक, मिकी माउस, टॉम एंड जेरी, मोटू पतलू, छोटा भीम, डोरेमोन, लिटिल सिंघम जैसे पात्र की पेंटिंग करते हुए कार्टून कॉर्नर का निर्माण किया जा रहा है.

-वार्ड में टीवी, सॉफ्ट टॉय, कामिक्स बुक्स, स्टोरी बुक की व्यवस्था की जानी है.

-कलरफुल बेडशीट, बर्तन, मग, प्लेट की व्यवस्था की जाये

झारखंड में बच्चों के लिए स्वास्थ्य पर एक नजर

कुल आबादी(मई 21 तक अनुमानित) : 3.86 करोड़

आबादी बच्चों की हिस्सेदारी :

0-4 वर्ष : 11 प्रतिशत

5-9 वर्ष:12.5 प्रतिशत

10-14 वर्ष : 12.4 प्रतिशत

15-20 वर्ष : 9.7 प्रतिशत

14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या : 1.39 करोड़

कुपोषित बच्चे : 42 प्रतिशत

एनिमिक बच्चे : 65 प्रतिशत

पूर्ण टीकाकृत बच्चे : 63 प्रतिशत

अस्पतालों की स्थिति

अस्पताल में बेड की संख्या : 29146

आइसीयू बेड : 1457

वेंटीलेटर्स : 729

शिशु रोग विशेषज्ञ : 377

एक शिशु रोग विशेषज्ञ पर बच्चों का भार : 36 हजार

Posted By : Sameer Oraon

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Published Date

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