मुआवजा नहीं देने पर BSRTC की बस रांची में जब्त, करीब 1.15 करोड़ रुपये का करना है भुगतान
बीएसआरटीसी बस का प्रतीकात्मक फोटो.
मुआवजा भुगतान नहीं करने पर रांची सिविल कोर्ट ने बीएसआरटीसी की बस जब्त की. मृतक के परिजनों को ब्याज सहित करीब 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.
रांची: सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के आश्रितों को मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करने पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की एक बस शुक्रवार को जब्त कर ली गयी. मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी), रांची के कुर्की आदेश के अनुपालन में सिविल कोर्ट की टीम ने यह कार्रवाई की. जब्त बस को सिविल कोर्ट परिसर में रखा गया है. अदालत के आदेश के अनुसार, मुआवजा राशि का भुगतान होने के बाद ही बस को रिलीज किया जा सकेगा. निगम को मूल मुआवजा राशि 93,38,294 रुपये के साथ ब्याज मिलाकर करीब 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.
डिपो में खड़ी बस को किया गया जब्त
जानकारी के अनुसार, सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल और अधिवक्ता प्रदीप कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में टीम ने बीएसआरटीसी के डिपो में खड़ी बस को जब्त किया. न्यायाधिकरण ने निगम की चार बसों को जब्त करने का आदेश दिया था. हालांकि, कार्रवाई के दौरान डिपो में केवल एक बस ही उपलब्ध मिली. इसके बाद टीम ने उसी बस को जब्त कर लिया और उसे कोर्ट परिसर में लाकर खड़ा कर दिया.
2024 में दिया गया था मुआवजा देने का आदेश
यह मामला सड़क दुर्घटना में विभूति प्रसाद सिंह की मौत से जुड़ा है. मृतक की पत्नी मुन्नी देवी और उनके तीन बच्चों की ओर से मुआवजे के लिए वर्ष 2023 में मामला दायर किया गया था. सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में एमएसीटी, रांची ने बीएसआरटीसी को मृतक के आश्रितों को 93,38,294 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. न्यायाधिकरण ने मुआवजा राशि पर 26 मई 2023 से भुगतान होने तक 7.5% वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया था. इसके बावजूद निगम की ओर से निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया. इस कारण मृतक के आश्रितों को अब तक अदालत द्वारा तय मुआवजे की राशि नहीं मिल सकी. भुगतान नहीं होने पर आश्रितों ने अदालत में निष्पादन याचिका दायर की. इसमें निगम की संपत्तियों को कुर्क कर मुआवजा राशि वसूलने की मांग की गई थी. इसी याचिका पर कार्रवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने निगम की चार बसों को जब्त करने का आदेश दिया.
एकपक्षीय आदेश के खिलाफ निगम को नहीं मिली राहत
मुआवजा भुगतान के आदेश के बाद बीएसआरटीसी ने एकपक्षीय अवार्ड को वापस लेने के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन दिया था. हालांकि, न्यायाधिकरण ने निगम के आवेदन को खारिज कर दिया. इसके बाद निगम ने झारखंड हाईकोर्ट में सिविल रिव्यू याचिका दाखिल की. निगम को उम्मीद थी कि हाईकोर्ट से राहत मिलने पर मुआवजा भुगतान के आदेश पर पुनर्विचार हो सकेगा. लेकिन, हाईकोर्ट से भी निगम को राहत नहीं मिली. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को समीक्षा याचिका खारिज कर दी. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पहले के फैसले में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है. साथ ही समीक्षा याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया.
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भुगतान होने तक कोर्ट परिसर में रहेगी बस
हाईकोर्ट से समीक्षा याचिका खारिज होने और इसके बाद भी मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर अब निगम की संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई शुरू हुई है. शुक्रवार को एक बस जब्त कर कोर्ट परिसर में रख दी गई. अदालत के आदेश के मुताबिक, मुआवजा और देय ब्याज का भुगतान होने के बाद ही बस को मुक्त किया जा सकेगा. इस कार्रवाई से बीएसआरटीसी पर करीब 1.15 करोड़ रुपये के बकाया मुआवजे के भुगतान का दबाव बढ़ गया है. वहीं, मृतक के आश्रितों को न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि मिलने की उम्मीद है.
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