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झारखंड में ऐसे चलता है धंधा : यह स्कूल तो है नहीं, जैक कहता है यहीं से 559 बच्चों को पास कराओ

Updated at : 16 Jun 2016 1:14 AM (IST)
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झारखंड में ऐसे चलता है धंधा : यह स्कूल तो है नहीं, जैक कहता है यहीं से 559 बच्चों को पास कराओ

सरकार चाहती है झारखंड में शिक्षा का स्तर बेहतर हाे. खुद मुख्यमंत्री इसके लिए आदेश देते हैं लेकिन गड़बड़ी करनेवाले सुधर नहीं रहे. रांची में सिर्फ नाम का एक स्कूल है. यह जांच रिपाेर्ट कहती है. जैक अध्यक्ष अपने तीन सदस्याें काे उस स्कूल की जांच कर मान्यता खत्म करने का आदेश देते हैं. ये […]

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सरकार चाहती है झारखंड में शिक्षा का स्तर बेहतर हाे. खुद मुख्यमंत्री इसके लिए आदेश देते हैं लेकिन गड़बड़ी करनेवाले सुधर नहीं रहे. रांची में सिर्फ नाम का एक स्कूल है. यह जांच रिपाेर्ट कहती है. जैक अध्यक्ष अपने तीन सदस्याें काे उस स्कूल की जांच कर मान्यता खत्म करने का आदेश देते हैं. ये तीनों सदस्य मान्यता खत्म करने की जगह अनुशंसा करते हैं कि इसी स्कूल से 559 बच्चाें काे परीक्षा दिलायी जाये. गंभीर जांच हाे ताे झारखंड में आैर भी ऐसे स्कूल निकलेंगे.
रांची : झारखंड में एक ऐसे स्कूल से 243 बच्चों ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा पास की है, जहां न तो कोई छात्र पढ़ता है और न ही पढ़ानेवाला कोई शिक्षक है. स्कूल भवन के नाम पर पांच कमरे का एक मकान है, जिसमें स्थानीय लोग गाय-भैंस बांधते हैं. स्कूल के दो कमरे में सिलाई सेंटर चलता है. स्थानीय लोग कुछ कमरों में अनाज भी रखते हैं.

ओरमांझी के पिस्का में स्थित इस स्कूल (स्थापना अनुमति प्राप्त) को लोग आदिवासी आवासीय उच्च विद्यालय बता रहे हैं. कमाल का काम तो जैक के अधिकारियों ने किया है. मामले का खुलासा होने के बाद भी अधिकारियों ने रांची के डीइओ से उक्त स्कूल से 2017 की मैट्रिक परीक्षा में 559 छात्रों को शामिल कराने की अनुशंसा की है. जबकि डीइओ ने पिछले साल इस कथित स्कूल को जांच में बंद पाया था. इसकी िरपोर्ट जैक को दी थी.

पांच साल में 2500 छात्रों को करा दी मैट्रिक पास : ग्रामीणों की मानें, तो यह स्कूल काफी पुराना है. पिछले पांच सालों से इसकी स्थिति काफी खराब हो गयी है. इस दौरान लगभग 2500 छात्रों को इस स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास करा दी गयी. पिछले साल इसकी बदहाली का मामला उजागर होने के बाद जैक के पूर्व अध्यक्ष डॉ आनंद भूषण ने शिक्षा विभाग को इसकी जांच करने को लिखा था. जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से दो सदस्यीय जांच कमेटी ने दो बार इस स्कूल का निरीक्षण किया. दोनों बार स्कूल बंद पाया गया. जांच टीम के सदस्यों ने स्थानीय लोगों से बात की, तो पता चला कि स्कूल अक्सर बंद रहता है. वहां गाय-भैंस ही बंधे रहते हैं.
जांच कमेटी ने छात्र हित की दुहाई दी : जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीइओ ने स्कूल बंद होने और यहां िशक्षक व छात्र नहीं होने की बात कही थी. इसके बाद भी जैक ने स्कूल की जांच के लिए एक बार फिर कमेटी बना दी. जैक की कमेटी में बासुकी यादव, पुष्कर बाला व नाथू गाड़ी थे. कमेटी ने छात्र हित की दुहाई देते हुए स्कूल से छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की अनुशंसा की है.
सालाना 50 लाख का कारोबार
स्कूल से लगभग 500 छात्र हर साल मैट्रिक परीक्षा में शामिल होते हैं. जानकारों का कहना है कि स्कूल से परीक्षा में शामिल कराने के लिए प्रति विद्यार्थी से लगभग 10 हजार रुपये लिये जाते हैं. ऐसे में प्रति वर्ष लगभग 50 लाख का कारोबार इस विद्यालय से होता है.
जमीनी हकीकत मंगलवार सुबह 10.45 बजे जब प्रभात खबर की टीम स्कूल में पहुंची, तो पाया कि बरामदे पर गोबर बिखरा था. स्कूल के दो कमरे में धान रखे थे. एक कमरा कचरे और टूटे-फूटे सामान से भरा था. दो कमरों में महिलाएं सिलाई का काम कर रही थीं. स्थानीय लोगों ने बताया कि ओरमांझी के देवेंद्र नाथ ठाकुर स्कूल का संचालन करते हैं. स्कूल में एक शिलापट्ट दिखा. इस पर 2005 के तत्कालीन खिजरी विधायक कड़िया मुंडा व सांसद रामटहल चौधरी का नाम है. स्थानीय निवासी जेठू बेदिया ने बताया : यहां कोई स्कूल नहीं चलता. यह उसके परिवारवालों की जमीन है. इस कारण वह गाय-भैंस रखते हैं. इंटर के छात्र मनोज कुमार ने कहा : विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती, बंद रहता है.
बासुकी यादव हैं जैक सदस्य, पढ़िए क्या कहते हैं
आपने आदिवासी आवासीय विद्यालय पिस्का की जांच की थी.
-हां, मेरे साथ दो और सदस्य नाथू गाड़ी व पुष्कर बाला थे.
आपने स्कूल में क्या देखा? – हम लोग जब जांच करने पहुंचे, तो तीन बज रहा था, स्कूल बंद था. तीन-चार लोग थे. बताया गया कि वे शिक्षक हैं. उपस्थिति पंजी देखी. बच्चे नहीं थे.
स्कूल बंद होने के बाद कमेटी जांच करने क्यों पहुंची?
हमें स्थलीय निरीक्षण करने को कहा गया था.
क्या आपको लगता है कि स्कूल से 559 विद्यार्थी के बैठने की क्षमता है? – इस बारे में आप जिला शिक्षा पदाधिकारी से पूछिए.
डीइओ की रिपोर्ट के बाद स्कूल की मान्यता (स्थापना अनुमति) समाप्त करने के लिए कमेटी गठित की गयी. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्कूल की मान्यता समाप्त की जानी थी. पर कमेटी ने स्कूल से छात्रों को परीक्षा में शामिल कराने की अनुशंसा कर दी. इस संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए सचिव से बात कर सकते हैं.
डॉ अरविंद प्रसाद सिंह, जैक अध्यक्ष
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