विजिलेंस टीम की जांच से नाराज हैं रिम्स के सीनियर डॉक्टर, दी सामूहिक वीआरएस की धमकी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : हाइकोर्ट के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनी विजिलेंस टीम की जांच से रिम्स के सीनियर डॉक्टर नाराज हैं. निजी प्रैक्टिस करनेवाले डाॅक्टरों की सूचना एकत्र करने पर आक्रोशित डॉक्टरों ने सोमवार को रिम्स में बैठक की. इस बैठक में सीनियर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से वीआरएस देने का फैसला लिया. सूत्रों की मानें तो 25 से 30 सीनियर डॉक्टर मंगलवार को वीआरएस देने को लेकर हस्ताक्षरयुक्त सूची रिम्स प्रबंधन को सौंपेगे. रिम्स प्रबंधन के माध्यम से वे सरकार को यह प्रस्ताव भी देंगे कि नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) काे वैकल्पिक किया जाये.

इससे वैसे डॉक्टर जो निजी प्रैक्टिस करना चाहते हैं, एनपीए नहीं लेंगे. वहीं, जो निजी प्रैक्टिस नहीं करना चाहते, वह एनपीए लेंगे. इससे समस्या का समाधान हो जायेगा. इस संबंध में रिम्स के निदेशक ने कहा कि यदि वीआरएस से संबंधित मामला उनके पास आता है, तो वह नियम संगत कार्रवाई करेंगे.

इधर, डॉक्टरों की बैठक रिम्स में काफी गरम माहौल में हुई. सीनियर डॉक्टर सरकार के इस रूख पर काफी नाराज दिखे. एक सीनियर डॉक्टर ने कहा कि हम अगर मरीज को परामर्श देते हैं, तो क्या गलत करते हैं?

कोई चोरी तो नहीं करते हैं. ड्यूटी के समय का पालन करने के बाद ही मरीजों को परामर्श देते हैं. इससे किसी का भला ही होता है. हालांकि नॉन क्लिनिकल के एक डॉक्टर ने कहा कि खुलेआम दिन-रात मरीज देखनेवालों पर लगाम तो लगनी ही चाहिए. कुछ डॉक्टरों के कारण पूरे रिम्स के डॉक्टर बदनाम होते है.

विजिलेंस टीम ने स्वास्थ्य सचिव को सौंपी जांच रिपोर्ट

हाइकोर्ट के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनायी गयी विजिलेंस टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट सोमवार को स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी को सौंप दी है. टीम की रिपोर्ट का आकलन कर स्वास्थ्य विभाग कोर्ट को डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस से संबंधित जानकारी उपलब्ध करायेगा. गौरतलब है कि विजिलेंस की टीम ने रिम्स के कई डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस करते पकड़ा है.

सरकार द्वारा गठित विजिलेंस कमेटी सूचना एकत्र कर रही है, इसलिए इस विषय पर कुछ नहीं कहा जा सकता है. अगर डाॅक्टर वीआरएस देते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग को सूचना भेज दी जायेगी.

डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स

दो दर्जन डॉक्टर व कर्मी नहीं बना सके हाजिरी

सुबह 9:35 बजे रिम्स निदेशक ने बायोमेट्रिक्स सिस्टम को बंद कराया

रांची : रिम्स के दो दर्जन से ज्यादा डॉक्टर व कर्मचारी सोमवार को बायोमेट्रिक्स सिस्टम से हाजिरी नहीं बना सके. रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह के आदेश पर सोमवार को पूर्व अधीक्षक कार्यालय में लगे बायोमेट्रिक्स सिस्टम को सुबह 9:35 बजे बंद कर दिया गया.

कंप्यूटर बंद होने से डॉक्टर व कर्मचारी बिना हाजिरी बनाये ही काम पर गये. हाजिरी बनाने के लिए कई डॉक्टर व कर्मचारी बायोमेट्रिक्स के कर्मचारी से उलझ गये, लेकिन आदेश का हवाला देते हुए कर्मचारी ने दोबारा कंप्यूटर खोलने से मना कर दिया. गौरतलब है कि निदेशक ने शुक्रवार को निरीक्षण के बाद सोमवार से सख्ती का आदेश दिया था.

निदेशक सोमवार की सुबह 9:20 बजे बायोमेट्रिक्स कार्यालय पहुंच गये थे. वे डाॅक्टरों के आने का समय देख रहे थे. दीवार पर लगी घड़ी में जैसे ही 9:35 बजा, निदेशक ने कर्मचारी बायोमेट्रिक्स का कंप्यूटर बंद करने का आदेश दिया. इसके बाद वे अपने कार्यालय चले गये. इधर, विलंब से ड्यूटी आनेवाले डॉक्टरों व कर्मचारियों का आधा दिन का सीएल (आकस्मिक छुट्टी) काटा जायेगा.

इमरजेंसी में बायोमेट्रिक्स सिस्टम बंद हुआ, तो नहीं हो सकेगा पंजीयन : इमरजेंसी व विभागाध्यक्षों के कमरे में भी बायोमेट्रिक्स सिस्टम लगाया गया है, जहां वे हाजिरी बना सकते हैं. इमरजेंसी में लगे बायोमेट्रिक्स सिस्टम को बंद करने से वहां लगा पंजीयन का कंप्यूटर भी बंद हो जायेगा. ऐसे में इमरजेंसी के बायोमेट्रिक्स सिस्टम को पंजीयन काउंटर पर लगे कंप्यूटर से अलग करना होगा. ऐसा नहीं करने पर इमरजेंसी में लगे बायोमेट्रिक्स सिस्टम को बंद करने से पंजीयन भी बंद हो जायेगा.

बायोमेट्रिक्स सिस्टम से हाजिरी का ब्योरा मांगा गया है. इसके बाद डॉक्टर व कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जायेगा व कार्रवाई की जायेगी.

डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स

कैंसर विंग में दो मरीजों की सफल सर्जरी हुई

रांची : रिम्स के सर्जिकल अंकोलॉजी विभाग में चक्रधरपुर निवासी 33 वर्षीय महिला व 55 वर्षीय एक पुरुष के कैंसर की सफल सर्जरी की गयी.

कैंसर से पीड़ित दाेनों मरीजों का ऑपरेशन कैंसर सर्जन डॉ रोहित कुमार झा व डॉ अजीत कुशवाहा ने किया. ऑपरेशन के बाद दाेनों मरीजाें की स्थिति पहले से बेहतर है. महिला बच्चेदानी के कैंसर से पीड़ित थी. वहीं पुरुष मरीज को चेहरे में ट्यूमर था. डॉ रोहित ने बताया कि निजी अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया था, लेकिन ऑपरेशन के छह माह बाद गांठ हो गया था.

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