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रांची : मेगालिथ संस्कृति का किया जायेगा अध्ययन

Updated at : 24 Oct 2019 8:53 AM (IST)
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रांची : मेगालिथ संस्कृति का किया जायेगा अध्ययन

सुनील चौधरी रांची : मेगालिथ संस्कृति का प्राचीन इतिहास से वर्तमान स्थिति तक का अध्ययन झारखंड सरकार कराने जा रही है. इसमें राज्य के विभिन्न जनजातीय समुदायों में महापाषाण युग से चली आ रही मेगालिथ (पत्थर लगाना) संस्कृति का अध्ययन होगा. साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के आदिवासियों की मेगालिथ संस्कृति […]

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सुनील चौधरी
रांची : मेगालिथ संस्कृति का प्राचीन इतिहास से वर्तमान स्थिति तक का अध्ययन झारखंड सरकार कराने जा रही है. इसमें राज्य के विभिन्न जनजातीय समुदायों में महापाषाण युग से चली आ रही मेगालिथ (पत्थर लगाना) संस्कृति का अध्ययन होगा.
साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के आदिवासियों की मेगालिथ संस्कृति तथा झारखंड की मेगालिथ संस्कृति का तुलनात्मक अध्ययन कराया जायेगा. गौरतलब है कि झारखंड में मेगालिथ की कई साइट हैं, जो पर्यटन का केंद्र हैं. हजारीबाग और तमाड़ में ऐसे साइट्स हैं, जिसका उपयोग जनजातीय समुदाय समय और नक्षत्रों की गणना के लिए करते थे. अरुणाचल प्रदेश में का वृहत मेगालिथ पार्क पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है.
शोध कराने की जिम्मेवारी डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान (टीआरअाइ) को दी गयी है. टीआरइ ने दिल्ली, बीएचयू, ओड़िशा, प. बंगाल, झारखंड के प्रमुख विश्वविद्यालयों से शोध में भाग लेने का आग्रह किया है.
इसके लिए निविदा भी जारी की गयी है. टीआरआइ के निदेशक रणेंद्र बताते हैं कि झारखंड में पाषाणयुग से ही मेगालिथ का इस्तेमाल होता आया है. अभी भी भागलपुर में मंदार पहाड़ और खैरी पहाड़ में पत्थर का किला मेगालिथ का एक बेहतरीन उदाहरण है. मुंडा समुदाय में शव को दफनाने के बाद पत्थर गाड़ने की परंपरा आज भी है. वहीं कई जगहों पर गांव की भाषा, संस्कृति बताने के लिए भी पत्थर का इस्तेमाल होता था. कुछ लोग युद्ध और तत्कालीन परिस्थिति की कहानी पत्थर लगा कर बताते थे. नये गांव की बसावट पर भी मेगालिथ लगाने की परंपरा रही है.
झारखंड के जनजातीय समुदायों का अन्य राज्यों के जनजातीय समुदायों के मेगालिथ से मिलान कर संबंधों की तलाश की जायेगी. मेगालिथ पर झारखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों में मौखिक कहानी का अध्ययन कराया जायेगा. दामोदर घाटी सभ्यता के विकास में मेगालिथ की भूमिका और इसकी वर्तमान स्थिति पर अध्ययन कराया जाना है.
रणेंद्र, निदेशक, टीआरआइ
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