लोग मुझे गुजराती झारखंडी कहने लगे हैं : जस्टिस पटेल

Updated at : 27 May 2019 1:17 AM (IST)
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लोग मुझे गुजराती झारखंडी कहने लगे हैं : जस्टिस पटेल

राणा प्रताप रांची : झारखंड में रहते हुए लंबा अरसा हो गया है. गुजरात हाइकोर्ट से स्थानांतरण के बाद तीन फरवरी 2009 को झारखंड हाइकोर्ट के न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद से यहां हूं. यहां की आबोहवा में रच-बस गया हूं. सब कुछ अपना सा लगता है. झारखंड में मुझे काम करने के […]

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राणा प्रताप

रांची : झारखंड में रहते हुए लंबा अरसा हो गया है. गुजरात हाइकोर्ट से स्थानांतरण के बाद तीन फरवरी 2009 को झारखंड हाइकोर्ट के न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद से यहां हूं. यहां की आबोहवा में रच-बस गया हूं. सब कुछ अपना सा लगता है. झारखंड में मुझे काम करने के लिए काफी अवसर मिले. मैंने अपना सब कुछ देने का प्रयास किया है. न्याय को सुलभ बनाने का प्रयास किया. अब तो लोग मुझे गुजराती झारखंडी कहने लगे हैं. उक्त बातें झारखंड हाइकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस (एसीजे) व दिल्ली हाइकोर्ट के नामित चीफ जस्टिस डीएन पटेल ने कही.

एसीजे पटेल ने कहा कि उन्होंने बताैर न्यायाधीश हमेशा न्याय देने का कार्य किया है. एसीजे के कार्यकाल के दाैरान झारखंड ज्यूडिशियरी में भी सुधार लाने का प्रयास किया. बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों में कमी लाने के लिए निचली अदालतों के लिए माहवार लक्ष्य तय किया. इसकी लगातार मॉनिटरिंग की गयी. रिजल्ट सकारात्मक निकलने लगा.

चेक बाउंसिंग के मामले हों, पांच वर्ष या उससे अधिक समय से लंबित मुकदमे हों, सभी के लिए लक्ष्य दिया गया. न्यायिक अधिकारियों ने लक्ष्यों को हासिल किया. काम नहीं करनेवाले लगभग 12 न्यायिक अधिकारियों पर कार्रवाई की. निचली अदालतों में काम करने का माहाैल तैयार हो गया.
उन्होंने स्वयं छुट्टी के दिनों में प्रत्येक शनिवार को झारखंड हाइकोर्ट में लंबे समय से लंबित क्रिमिनल अपील याचिकाअों पर सुनवाई करने की परंपरा की शुरुआत की. इस प्रयास से 100 से अधिक लंबित क्रिमिनल अपील मामले निष्पादित हुए. हालांकि बाद में यह परंपरा कायम नहीं रह सकी.
  • जस्टिस डीएन पटेल
  • जन्म: 13 मार्च 1960
  • वकालत: 28 जुलाई 1984
  • जज बने: गुजरात हाइकोर्ट में सात मार्च 2004
  • झारखंड कब आये: तीन फरवरी 2009
  • दिल्ली हाइकोर्ट: सात जून 2019 को चीफ जस्टिस पद की लेंगे शपथ
झारखंड ने देश में अपनी अलग पहचान बनायी
एसीजे पटेल ने कहा कि देश में झारखंड ने कार्य कर अपनी अलग पहचान बनायी है. देश में ऐसा कोई राज्य नहीं है, जहां कि एक भी अदालत साैर ऊर्जा से संचालित है. झारखंड में 13 जिला अदालतों (सिविल कोर्ट) में बिजली की पूरी जरूरत साैर ऊर्जा से पूरी की जाती है. ये सभी निचली अदालतें पूरी तरह से साैर ऊर्जा से अाच्छादित हैं. अवकाश के दिनों में अदालतों में उपयोग नहीं रहने पर साैर ऊर्जा ग्रिड के माध्यम से सरकार उपयोग करती है.
राज्य में खूंटी जिला अदालत साैर ऊर्जा से अाच्छादित देश का पहला जिला है. एसीजे पटेल ने कहा कि हमें अच्छी तनख्वाह मिलती है. सरकार वेतन पर काफी पैसे खर्च कर रही है, तो हमारा भी दायित्व बन जाता है कि हम भी (न्यायाधीश) पूरी निष्ठा से कार्य करें. मामलों की सुनवाई कर उसका निष्पादन करें.
लोगों को न्याय दिलायें. उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों के सवाल पर कहा कि झारखंड लीगल सर्विसेज अॉथोरिटी (झालसा) के माध्यम से ग्रासरूट पर कार्य हुआ है. झारखंड में कई ऐसे कार्य किये गये हैं, जिसकी चर्चा पूरे देश में होती है. पिछले कई वर्षों से झालसा पूर्वी भारत में टॉप पर रहा है. लिम्का बुक अॉफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ है. पूरे राज्य में पारा लीगल वोलेंटियर (पीएलवी) 2838 पैनल में शामिल हुए.
1219 पीएलवी का सहयोग लिया जा रहा है. 710 लीगल एड क्लिनिकों का संचालन किया जाता है. एक साथ एक ही दिन 500 स्कूलों में लीगल एड क्लिनिक की स्थापना कर झालसा ने पूरे देश में रिकॉर्ड बनाया था. इतना ही नहीं विश्वविद्यालयों से संबंधित लंबित मामलों के लिए देश में अपनी तरह का एक अलग विश्वविद्यालय लोक अदालत लगायी गयी थी. इसमें सैकड़ों मामले निबटाये गये थे.
55 करोड़ से अधिक की राशि पक्षकारों को चेक के माध्यम से भुगतान किया गया था. बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार दिलाया गया है. इसका सकारात्मक परिणाम निकला. मैंने इसे बरकरार रखने को कहा है, ताकि बच्चों में बदलाव आ सके. एसीजे पटेल ने कहा कि झारखंड का प्रयोग वे दिल्ली में करने का प्रयास करेंगे. वहां भी काम करने का काफी अवसर है.
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